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लोकसभा में चुनाव सुधार संशोधन बिल पास

नई दिल्ली: लोकसभा में आज भारी हंगामे के बीच वोटर आईडी को आधार से जोड़ने वाला बिल पारित हो गया। केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने इस बिल को लोकसभा में पेश किया। इस बिल में मतदाता सूची में दोबारा और फर्जी मतदान रोकने के लिए मतदाता कार्ड और सूची को आधार कार्ड से जोड़ने का प्रस्ताव है।

सदन में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, MIM, BSP ने इस विधेयक को पेश किये जाने का विरोध किया। साथ ही कांग्रेस ने विधेयक को विचार के लिये संसद की स्थायी समिति को भेजने की मांग की।

केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने इसकी जरूरत और उपयोगिता समझाई लेकिन विपक्षी सांसद नहीं मानें। AIMIM चीफ ओवैसी ने इस बिल का विरोध करते हुए कहा कि सरकार इस बिल का अपने हितों के लिए इस्तेमाल कर सकती है इसलिए मैं चाहता हूं इस बिल को संसद में रखने जाने को लेकर डिविजन हो। उन्होंने बार-बार डिविजन की बात दोहराई और हंगामा जारी रहा।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि आधार का मतलब केवल निवास का प्रमाण होना था, यह नागरिकता का प्रमाण नहीं है। यदि आप मतदाताओं के लिए आधार मांगने की स्थिति में हैं, तो आपको केवल एक दस्तावेज मिल रहा है जो नागरिकता नहीं बल्कि निवास दर्शाता है। आप संभावित रूप से गैर-नागरिकों को वोट दे रहे हैं।

तृणमूल कांग्रेस के नेता सौगत रॉय ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि आधार कार्ड सरकार सभी नागरिकों के लिए जारी करती है। केंद्र सरकार चुनावी प्रक्रिया में दखल देने की कोशिश कर रही है। लेकिन केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष की आपत्तियों को ख़ारिज करते हुए कहा कि सरकार फर्जी मतदान को रोकने की कोशश कर रही है और इस मुद्दे पर विपक्ष को सरकार का समर्थन करना चाहिए।

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आपको बता दें कि 2019 में आधार अधिनियम में उचित संशोधन के साथ आधार के संग्रह की अनुमति देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद चुनाव आयोग ने कानून मंत्रालय को पत्र लिखकर आधार के साथ मतदाता कार्ड को अनिवार्य रूप से जोड़ने के लिए एक उपयुक्त संशोधन की मांग की। इस पर कानून मंत्रालय ने सहमति जताई है।

जबकि नव-पात्र मतदाता के पंजीकरण के लिए कई तिथियां- कहा जाता है कि कैबिनेट ने 1 जनवरी, 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर की चार तिथियों को एक वर्ष में मंजूरी दे दी है। धारा 14 (बी) में संशोधन के माध्यम से संभव हो जाएगी। अगस्त 2015 में, आधार पर सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश ने मतदाता सूची में कई प्रविष्टियों की जांच के लिए UIDAI (आधार) संख्या को मतदाता मतदाता डेटा के साथ जोड़ने के लिए चुनाव आयोग की परियोजना पर ब्रेक लगा दिया था।

Credit : news 24

हुड़दंग न्यूज

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