मध्य प्रदेश के बड़वानी में तृतीय जिला न्यायालय ने पूर्व एसडीएम अभय सिंह खराड़ी को अधीनस्थ पटवारी के साथ लैंगिक शोषण और हिंसा के आरोप में दोषी ठहराया। 10 साल की सजा सुनाई गई, मामला 2016 से चला आ रहा था। मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले से न्याय व्यवस्था की एक मिसाल कायम करने वाली खबर आई है। तृतीय जिला एवं सत्र न्यायालय ने पूर्व एसडीएम सेंधवा डॉ. अभय सिंह खराड़ी को अधीनस्थ महिला पटवारी के साथ लंबे समय से चले आ रहे लैंगिक अपराध, बलात्कार और मारपीट के गंभीर आरोपों में दोषी करार दिया। कोर्ट ने उन्हें 10 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाई, साथ ही 1 लाख 1 हजार रुपये का भारी जुर्माना भी लगाया। यह फैसला न केवल पीड़िता को न्याय दिलाने वाला है, बल्कि सरकारी अधिकारियों द्वारा सत्ता के दुरुपयोग पर कड़ी चेतावनी भी है।
मामला 2016 से जुड़ा है, जब खराड़ी बड़वानी में एसडीएम के पद पर तैनात थे। पीड़िता, जो पटवारी के रूप में सेवा दे रही थीं, ने अप्रैल 2024 में थाने में शिकायत दर्ज कराई। उनके बयान के अनुसार, आरोपी ने अपने आधिकारिक बंगले पर कई मौकों पर दबाव डालकर शारीरिक संबंध स्थापित करने की कोशिश की। खासतौर पर 22 दिसंबर 2023 की रात को जुलवानिया के गायत्री कॉलोनी स्थित उनके घर पर घुसकर न सिर्फ हिंसा की, बल्कि अशोभनीय शब्दों का इस्तेमाल किया और जान से मारने की धमकी दी। अभियोजन पक्ष के वकील शिवपाल सिंह सिसोदिया ने बताया कि कुल चार-पांच बार ऐसी घटनाएं हुईं, जिनमें ब्लैकमेलिंग और रिश्ते तोड़ने की धमकियां भी शामिल थीं।
कोर्ट ने पाया कि खराड़ी ने अपनी पदवी का फायदा उठाकर पीड़िता को लंबे समय तक ब्लैकमेल किया। तेजाब डालने जैसी भयानक धमकियां देकर उन्हें डराया। दिलचस्प बात यह है कि आरोपी के निजी जीवन में भी उथल-पुथल मची हुई थी। उनकी पत्नी को इन संबंधों पर शक हो गया था, जिसके चलते शासकीय आवास पर परिवारों के बीच झड़पें हुईं। पत्नी ने भी कई बार घरेलू हिंसा के आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ केस दर्ज कराए थे। सार्वजनिक जगहों पर दोनों के बीच कलह आम हो गई थी, जो स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी।
अभियोजन पक्ष ने मजबूत साक्ष्य पेश किए, जिसमें पीड़िता के मेडिकल रिपोर्ट, गवाह बयान और आरोपी के खुद के संदेश शामिल थे। जज ने सभी आरोप साबित मानते हुए कहा कि पद की मर्यादा का उल्लंघन असहनीय है। सजा सुनते ही कोर्ट रूम में सन्नाटा छा गया, जबकि पीड़िता के समर्थक न्याय की जीत मना रहे थे।
प्रभाव और आगे की कार्रवाई
यह फैसला मध्य प्रदेश में सरकारी अमलों के खिलाफ न्यायिक सख्ती का प्रतीक बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अन्य पीड़ित महिलाओं को आगे आने का हौसला मिलेगा। खराड़ी की अपील की गुंजाइश बनी हुई है, लेकिन सजा तुरंत लागू हो गई। प्रशासन ने मामले की समीक्षा शुरू कर दी है, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।







