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जबलपुर में बनेगा मां कामाख्या का मंदिर:किन्नर समाज की महामंडलेश्वर हिमांगी सखी ने किया भूमिपूजन, ओल्ड एज होम से लेकर स्कूल तक होगा

असम के बाद अब जबलपुर में भी मां कामाख्या का मंदिर बनेगा। ग्वारीघाट रेत नाका में इस मंदिर का निर्माण किन्नर समाज कराने जा रहा है। इसकी अगुवाई किन्नर माही शुक्ला कर रही हैं। किन्नर समाज की महामंडलेश्वर हिमांगी सखी ने भूमि पूजन किया। इस मंदिर में विशेष पूजन और उतारा होगा। मंदिर में ओल्ड एज होम, बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कूल भी खुलेगा।

मां कामाख्या मंदिर के निर्माण को लेकर माही शुक्ला ने बताया कि 6 साल से मां के दर्शन सपने में हो रहे थे। उनकी प्रेरणा से ही इस मंदिर निर्माण की नींव रखी गई। इस मंदिर के गर्भगृह में महामंडलेश्वर हिमांगी सखी का विश्राम गृह और गुरु सिंहासन होगा। इसके ऊपर अनाज गृह और सबसे ऊपर मां कामाख्या का मंदिर होगा।

24 घंटे लंगर की व्यवस्था

इस मंदिर से कोई भी भूखा नहीं जाएगा। यहां 24 घंटे लंगर की व्यवस्था होगी। मंदिर के विशाल प्रांगड़ में ही ओल्ड एज होम होगा। इसमें किन्नर समाज के बुजुर्ग लोगों को रखा जाएगा। एक स्कूल होगा, जिसमें किन्नर समाज के बच्चों को वैष्णवी शिक्षा प्रदान की जाएगी। इसके अलावा सामान्य शिक्षा भी दी जाएगी। उन्हें आत्मनिर्भर होने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

समाज के लिए जीते-मरते हैं किन्नर
मंदिर निर्माण की नींव रखने वाली किन्नर महामंडलेश्वर हिमांगी सखी ने किन्नर माही शुक्ला की इस पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि हम किन्नर तो समाज के लिए ही जीते हैं और समाज के लिए ही मरते हैं। हम भले ही किन्नर के रूप में पैदा हुए, लेकिन समाज के प्रति हमारी भी जिम्मेदारी है। इसी दिशा में माही का ये प्रयास अभूतपूर्व है।

मंदिर निर्माण के लिए स्वेच्छा से मिलने वाला चंदा ही स्वीकार करेंगे
माही शुक्ला ने कहा कि वे मंदिर निर्माण के लिए किसी के सामने हाथ नहीं फैलाएंगी। स्वेच्छा से जिसे देना होगा, वो खुद आकर यहां दे जाएगा। इसके बदले में रसीद दी जाएगी। ग्वारीघाट के दूसरी ओर गौरी-पार्वती का भी एक छोटा सा मंदिर बनेगा। सबसे पहले गौरी-पार्वती मंदिर का दर्शन करना होगा। इसके बाद ही मां कामाख्या मंदिर का दर्शन सफल माना जाएगा।

माही पहली किन्नर, जिसने अपना सरनेम लगाया
माही शुक्ला जबलपुर की पहली किन्नर हैं, जिन्होंने अपने नाम के साथ सरनेम लगाना शुरू किया। वह हर शनिवार और रविवार को ग्वारीघाट में बच्चों, गरीबों और भिखारियों को भोजन कराती हैं। उनकी टोली में शामिल विपिन भट्‌ट, विभु चौधरी पुष्कल चौधरी, साफी, पिंकी, कशिश, संजना, पीकू, तारा, रोमा, साक्षी शामिल हैं।

किन्नर समाज काे भी मुख्यधारा में लाने के लिए जल्द केंद्रीय किन्नर बोर्ड का होगा गठन
किन्नर महामंडलेश्वर हिमांगी सखी ने बताया कि जल्द ही केंद्रीय किन्नर बोर्ड का गठन होगा। इस दिशा में सामाजिक न्यायमंत्री रामदास अठावले ने पत्र के माध्यम से इसकी जानकारी साझा की है। दिसंबर के अंत तक ये बोर्ड अमल में लाया जा सकता है। केंद्रीय किन्नर बोर्ड का गठन होने से किन्नरों को भी आवास, शिक्षा, राशन, पेंशन, नौकरी आदि की सुविधाएं मिल सकेंगी।

source- www.bhaskar.com

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