मध्यप्रदेश

इंदौर के चिडिय़ाघर में पहली बार नजर आया काला बाघ

विश्व बाघ दिवस पर इंदौर के वन्य प्रेमियों को एक खास सौगात मिली। डेढ़ माह के इंतजार का बाद ब्लैक टाइगर विक्की बाड़े में नजर आया। विक्की को बाड़े में निगमायुक्त प्रतिभा पाल ने गेट खोलकर छोड़ा। इस मौके पर निगमायुक्त ने कहा अब चिड़ियाघर में पीले, काले, सफेद तीनों रंगों के बाघ है। इन्हें देखने का उत्साह बच्चों में बहुत है। अब प्राणी संग्रहालय में कई और नए जानवरों को लाएंगे। जल्दी चिड़ियाघर में जेब्रा को लाया जाएगा। ओडिशा के नंदन कानन जू से 30 अप्रैल को ब्लैक और व्हाइट टाइगर लाए गए हैं। इसके साथ ही इंदौर जू में तीनों कलर के टाइगर हो गए। इनमें संघर्ष की स्थिति ना बने इस पर प्रबंधन पूरी नजर रखे हुए है। अब नगर निगम तीनों टाइगर की ब्रांडिंग भी करेगा जिससे यहां ज्यादा से ज्यादा सैलानी आएं।

इंदौर आने वाले सैलानी अब यहां के चिड़ियाघर में यलो और व्हाइट टाइगर के बाद ब्लैक टाइगर भी देख सकते हैं। गुरुवार को ब्लैक टाइगर को भी ओपन एनक्लोजर में छोड़ा गया। नया होने के कारण पहले इसे अलग रखा गया था। जब ये टाइगर चिड़ियाघर के बाकी टाइगर से हिल मिल गया तो उसे बाहर निकालकर ओपन एनक्लोजर में छोड़ दिया गया। ब्लैक टाइगर पैंथर की तरह पूरा काला नहीं होता बल्कि उसके शरीर पर पड़ी काली धारियों की गणना के आधार पर उसे ब्लैक और यलो कहा जाता है। फिलहाल ब्लैक टाइगर को लगभग एक एकड़ के बाड़े में रखा गया है। इसका नाम विक्की है। यादव ने बताया कि बाघों के संरक्षण के लिए सरकार, वन विभाग, पर्यावरण प्रेमी तो अपने-अपने स्तर पर सक्रिय हैं है। इसमें चिड़ियाघर भी अहम भूमिका निभा रहा है। इसका नतीजा है कि यहां रहने वाले बाघ औसत से ज्यादा आयु तक जीते है। एक करोड़ 70 लाख की राशि से एक एकड़ में नया बाड़ा बनाया है। जंगल सा माहौल देने के लिए इसमें पत्थरों से पहाड़, तालाब, मचान और गुफा बनाई गई है। चिड़ियाघर में बाघों की उम्र व संख्या बढ़ने का कारण सही वक्त पर उपचार और सही मात्रा में भोजन मिलना है।

हुड़दंग न्यूज

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