32 कार्यवाहक पुलिसकर्मियों का हुआ डिमोशन, कईयों के उतर सकते है स्टार, 15 हजार पुलिसकर्मियों में बढ़ी चिंता

कार्यवाहक पदोन्नति वापस लेने की कार्रवाई भी शुरू हो गई है। इसकी पहली बड़ी कार्रवाई पांडुर्णा में हुई, जहां पुलिस अधीक्षक ने कार्यवाहक प्रधान आरक्षक के रूप में पदस्थ  प्रभार समाप्त कर उन्हें मूल पद आरक्षक पर पदस्थ करने के आदेश जारी किए हैं। अब सभी पुलिसकर्मी फिर आरक्षक की वर्दी और रैंक में ड्यूटी करेंगे। करीब एक दशक तक नियमित पदोन्नति नहीं होने से बड़ी संख्या में आरक्षकों को कार्यवाहक प्रधान आरक्षक का प्रभार दिया गया था। अब नियमित पदोन्नति से पहले पिछले पांच साल की एसीआर, विभागीय दंड, निलंबन और न्यायालय में लंबित मामलों की जांच की जा रही है। एक हजार अधिकारी-कर्मचारी पर इस असर पड़ सकता है।
Vijay

Vijay

Local Desk | Updated: 10 Sep 2026, 02:16 PM IST | 1 min read
32 कार्यवाहक पुलिसकर्मियों का हुआ डिमोशन, कईयों के उतर सकते है स्टार, 15 हजार पुलिसकर्मियों में बढ़ी चिंता
Share:

प्रदेश में पिछले 5 साल से कार्यवाहक पदोन्नति लेकर उच्च पदों पर काम कर रहे करीब 15 हजार पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों के सामने अब डिमोशन का खतरा खड़ा हो गया है। मप्र पदोन्नति नियम- 2025 लागू होने के बाद नियमित विभागीय पदोन्नति समिति की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसमें जो अधिकारी-कर्मचारी निर्धारित मापदंडों पर पात्र नहीं पाए जाएंगे, उनका कार्यवाहक प्रभार समाप्त कर उन्हें मूल पद पर लौटना होगा। इसे लेकर पुलिस महकमे में असंतोष भी उभरने लगा है। प्रदेश में वर्ष 2016 से नियमित पदोन्नति रुकी हुई थी। इसके बाद 2021 से पुलिस मुख्यालय ने आरक्षक से निरीक्षक स्तर तक कार्यवाहक प्रभार देना शुरू किया। वर्तमान में आरक्षक से लेकर डीएसपी स्तर तक हजारों कर्मचारी उच्च पद की वर्दी और रैंक के साथ जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

पांदुर्णा में 32 पुलिसकर्मी मूल पद पर वापस भेजे गए

कार्यवाहक पदोन्नति वापस लेने की कार्रवाई भी शुरू हो गई है। इसकी पहली बड़ी कार्रवाई पांडुर्णा में हुई, जहां पुलिस अधीक्षक ने कार्यवाहक प्रधान आरक्षक के रूप में पदस्थ  प्रभार समाप्त कर उन्हें मूल पद आरक्षक पर पदस्थ करने के आदेश जारी किए हैं। अब सभी पुलिसकर्मी फिर आरक्षक की वर्दी और रैंक में ड्यूटी करेंगे। करीब एक दशक तक नियमित पदोन्नति नहीं होने से बड़ी संख्या में आरक्षकों को कार्यवाहक प्रधान आरक्षक का प्रभार दिया गया था। अब नियमित पदोन्नति से पहले पिछले पांच साल की एसीआर, विभागीय दंड, निलंबन और न्यायालय में लंबित मामलों की जांच की जा रही है। एक हजार अधिकारी-कर्मचारी पर इस असर पड़ सकता है।

Trending Reels

शिक्षा विभाग का कर्मचारी पैसे लेते कमरे में कैद, देखें वीडियो

Comments (0)