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नोटबंदी को हुए पूरे 5 वर्ष, जाने कब और क्यों हुई नोटबंदी

08 नवंबर 2016 की रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन दिया। 8:00 बजे का यह संबोधन देश में चल रहे ₹500 और 1000 रुपए के नोट को प्रचलन से बाहर करने के लिए था। नोटबंदी को हुए पूरे 5 वर्ष हो गए, हालाकी नोटबंदी पहली बार अंग्रेज सरकार ने 1946 में की थी, इसके बाद 1978 में भी नोटबंदी की गई थी, 08 नवंबर 2016 को हुई नोट बंदी को लेकर आज पूरे 5 वर्ष हो गए।

लोगों के मन में अक्सर सवाल उठते हैं कि नोटबंदी की जरूरत क्यों थी नोटबंदी या विमुद्रीकरण की आवश्यकता किसी भी देश को तब पड़ती है जब देश में काला धन जमा खोरी, जाली नोटों का कारोबार अधिक हो जाता है, ऐसे में लोग टैक्स चोरी करने के लिए नगद रुपए में लेनदेन करते हैं जिनमें अधिकतर बड़े रुपए के नोट शामिल होते हैं। भ्रष्टाचार, काला धन, नकली नोट, महंगाई और आतंकवादी गतिविधियों में काबू करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 08 नवंबर को नोटबंदी का ऐलान किया था।

क्यों लिया गया था नोटबंदी का फैसला?

देश में Demonetization यानी नोटबंदी लाने के लिए मोदी सरकार ने कई वजहें बताईं। सबसे पहला था कालेधन का खात्मा करना। इसके अलावा सर्कुलेशन में मौजूद नकली नोटों को खत्म करना, आतंकवाद और नक्सल गतिविधियों पर लगाम कसने समेत कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा देने जैसे कई वजहें गिनाई गई थीं।

नोटबंदी को हुए पूरे 5 वर्ष, जाने कब और क्यों हुई नोटबंदी
नोटबंदी को हुए पूरे 5 वर्ष, जाने कब और क्यों हुई नोटबंदी

भारत में कब-कब हुई नोटबंदी

2016 से पहले भी दो बार देश में नोटबंदी हो चुकी थी। पहली बार अंग्रेज सरकार ने 1946 में नोटबंदी की थी। इसके बाद 1978 में भी नोटबंदी की गई थी।

  • पहली बार साल 1946 में 500, 1000 और 10 हजार के नोटों को बंद करने का फैसला लिया गया था।
  • 1970 के दशक में भी प्रत्यक्ष कर की जांच से जुड़ी वांचू कमेटी ने विमुद्रीकरण का सुझाव दिया था, लेकिन सुझाव सार्वजनिक हो गया, जिसके चलते नोटबंदी नहीं हो पाई थी।
  • जनवरी 1978 में मोरारजी देसाई की जनता पार्टी सरकार सरकार ने एक कानून बनाकर 1000, 5000 और 10 हजार के नोट बंद कर दिए। हालांकि तत्कालीन आरबीआई गवर्नर आईजी पटेल ने इस नोटबंदी का विरोध किया था।
  • भारत में 2005 में मनमोहन सिंह की कांग्रेस सरकार ने 500 के 2005 से पहले के नोटों का विमुद्रीकरण कर दिया था।
  • 2016 में भी मोदी सरकार ने 500 और 1000 के नोटों की नोटबंदी या विमुद्रीकरण का फैसला किया। भारतीय अर्थव्यवस्था में इन दोनों नोटों का प्रचलन लगभग 86 फीसदी था। यही नोट बाजार में सबसे अधिक चलते थे।

क्या हुआ फायदा ?

नोटबंदी से क्या फायदा ये किसी को नहीं पता। हालांकि सरकार का तर्क है कि नोटबंदी के बाद टैक्स कलेक्शन बढ़ा और कालेधन में इस्तेमाल होने वाला पैसा सिस्टम में आ चुका है, लेकिन इससे जुड़े कोई आंकड़े इतने साल बाद भी सामने नहीं आए हैं। हालांकि RBI के आंकड़े कहते हैं कि नोटबंदी के दौरान बंद हुए 99.30 फीसदी 500 और 1000 के पुराने नोट बैंक में वापस आ गए।

हुड़दंग न्यूज

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