हमारे यहां फैशन की बहुत बड़ी दुनिया है ट्रेडिशनल फुटवियर की जब बात आती है तो कोल्हापुरी चप्पल जरूर नाम लिया जाता है। यह कोई आम चप्पल नहीं है यह हमारे भारतीय कारीगरों के हुनर और परंपराओं की एक पुरानी पहचान है। आज भले ही मार्केट में आपको फुटवियर की हजारों डिजाइन मिल जाएगी, बावजूद कोल्हापुरी चप्पल आज भी लोगों के द्वारा खूब पसंद की जाती है।
महाराष्ट्र के कोल्हापुर शहर से जुड़ी यह चप्पल सिर्फ देश नहीं बल्कि विदेशों में भी खूब पसंद की जाने वाली है, कई लोग ट्रेडीशनल आउटफिट के लिए पहनते हैं और कुछ लोग मॉडल ड्रेस के साथ पहनते हैं। आज ज्यादातर लोग कोल्हापुरी चप्पलों पहनते है और पहचानते हैं, लेकिन शायद आपको इसका इतिहास मालूम नहीं होगा। आज हम कोल्हापुरी चप्पल के इतिहास के बारे में आपको बताने जा रहे हैं।

सदियों पुराना है इतिहास
कोल्हापुरी चप्पल का इतिहास हजारों साल पुराना है, माना जाता है इसकी शुरुआत 12वीं और 13वीं शताब्दी में हुई थी, उस समय हाथ से बनी चमड़े की चप्पलों का इस्तेमाल किया जाता था। समय के साथ-साथ चप्पल की डिजाइन बदली लेकिन पहचान वही पुरानी बनी रही।
पहले सिर्फ पहनते थे पुरुष लेकिन अब महिलाएं भी - डिजाइन देखने और खरीदने के लिए क्लिक कीजिये
अगर कोल्हापुरी चप्पल की बात करें तो पहले के जमाने में सिर्फ पुरुषों के लिए यह चप्पल बनाई जाती थी इसलिए इसकी डिजाइन भी उसी के हिसाब से बनाई जाती थी, बाद में जब फैशन की दुनिया में बदलाव हुआ तो महिलाओं के लिए भी अलग-अलग डिजाइन के लिए कोल्हापुरी चप्पल तैयार की जाने लगी। आज बाजार में कलरफुल, कढ़ाई वाली और कई तरह की डिजाइन वाली आपको कोल्हापुरी चप्पल बाजार में मिल जाएंगी।
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आप सोच रहे होंगे कि इस चप्पल का नाम कोल्हापुर ही क्यों रखा गया? आपको हम बता दे की महाराष्ट्र के कोल्हापुर शहर से इस चप्पल का नाम पड़ा था, कोल्हापुर लंबे समय से अपने कारीगरी और हैंडमेड चीजों के लिए जाना जाता रहा है। यही से कारीगरों ने अपने मेहनत से इस फुटवियर को पहचान दी, धीरे-धीरे आसपास इलाकों में फेमस हुआ और आज विश्व पटल पर कोल्हापुरी चप्पल का नाम लिया जाता है।
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