By Vijay
शहडोल/भोपाल -
मप्र में बाघों का कुनबा फल-फूल रहा है। वर्ष 2026 की बाघ गणना में इनकी संख्या 1100 तक पहुंचने की उम्मीद है। 2022 में मप्र में 785 बाघ दर्ज किए गए थे, जो देश में सबसे ज्यादा थे। इस लिहाज से ये 40% की बढ़ोतरी होगी। मप्र में बाघों की बढ़ती संख्या के कारण अब वे टाइगर रिजर्व से निकलकर असंरक्षित वन क्षेत्रों और नए कॉरिडोर में पहुंच रहे हैं। लिहाजा, अब उनके लिए नए ठिकानों की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती होगा। 2026 की गणना में तेंदुओं की 4500 के पार हो सकती है।
शहडोल - देश की सर्वाधिक आबादी वाले भारत के टाइगर स्टेट मप्र और यहां सर्वाधिक बाघों वाले बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पर्यटकों के सबसे पसंदीदा जोन 'ताला' में बाघों की टेरिटरी और उनके अजब-गजब नाम पर्यटकों के मन में रोमांच पैदा कर देते हैं। झुमरी तलैया, सीता मंडप, रामपुर पहाड़ी सुनकर आपको बॉलीवुड की किसी फिल्म का एहसास मिलेगा पर ये नाम सफारी के दौरान पर्यटकों के कानों में पड़ने वाले ऐसे नाम हैं जो या तो बाघों की टेरिटरी हैं या फिर मनमोहक वनक्षेत्र एक तलैया में पानी कम होने से उसे झुरही तलैया कहने लगे तो गाइडों ने नामकरण झुमरी तलैया कर दिया।
पूरे साल घने पेड़ के आवरण से ढके रहने वाले स्थान का नाम अंधियारी झिरिया दे दिया, यहां इन दिनों बजरंग बाघ की टेरिटरी है। शोले फिल्म में गब्बर की पहाड़ी की तरह दिखने वाली रामपुर पहाड़ी की बात हो या मंडप जैसा लगने वाला सम्राट बाघ की टेरिटरी सीता मंडप घोड़े के नाल जैसे नाला का कटाव होने के बाद क्षेत्र का नाम घोड़ा डेमन हो गया।
बांधवगढ़ में बढ़ रही पर्यटकों की संख्या
बांधवगढ़ के फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय के अनुसार पिछले साल जुलाई 2024 से जून 2025 तक 30 हजार 766 विदेशी व एक लाख 66 हजार 123 देशी पर्यटकों की तुलना में इस साल 30 जून तक 31 हजार 613 विदेशी और एक लाख 80 हजार 873 देशी पर्यटक बांधवगढ़ पहुंचे।
पिछले साल 16 करोड़ 33 लाख 58 हजार 421 रुपए की तुलना में इस साल 19 करोड़ 50 लाख 47 हजार 789 रुपए की राजस्व में बढ़ोतरी हुई।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, कभी बाघ विहीन रहा पत्रा आज प्रदेश का नया टाइगर नर्सरी क्षेत्र बन चुका है। यहां लगातार शावक जन्म ले रहे हैं और युवा बाघ नए इलाकों की ओर फैल रहे हैं। इस बार यहां बाघों की संख्या 100 से अधिक हो सकती है। रातापानी टाइगर रिजर्व में पिछली गणना में 45 बाघ थे। इस बार इनकी संख्या 70 से ज्यादा होने की उम्मीद है।
रायसेन, मऊ, देवास वन मंडल में भी इनकी संख्या बढ़ी है। सिर्फ यही नहीं, एक समय नक्सलियों के कारण बालाघाट वन मंडल में बाघ लगभग शून्य हो चुके थे। वर्ष 2020-21 में पहली बार एक बाघिन का नियमित मूवमेंट दर्ज हुआ। इसके बाद विभाग और ग्रामीणों के प्रयासों से संख्या बढ़ी। अब इस लैंडस्केप में करीब 40 बाघों की मौजूदगी बताई जा रही है।