By Vijay
29 अक्टूबर यानी कल देश भर में महिलाएं करवा चौथ का व्रत रखेंगी, कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को शास्त्रों में एक पवित्र तिथि माना गया। इसलिए सुहागन महिला अपने पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन के लिए यह व्रत रखती हैं शाम को चांद देखने के पहले महिलाएं पानी का एक घूंट भी नहीं पीती हैं, करवा चौथ पर सुहागनों के व्रत रखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है लेकिन कई बार ऐसी बहस आती है कि सिर्फ महिलाएं ही क्यों करवा चौथ व्रत रखती हैं, पुरुष क्यों नहीं आइए जानते हैं ।
आचार्य राज मिश्रा कहते हैं कि सनातन धर्म में महिलाओं को बहुत ही खास दर्जा दिया गया है जिसकी कोई भी कल्पना नहीं कर सकता, शास्त्रों ग्रंथों में हर जगह धर्मपत्नी का वर्णन किया जाता है कहीं भी धर्म पति का जिक्र नहीं किया गया है इसलिए धर्मपत्नी द्वारा किया गया कोई भी सिद्ध कार्य लोगों के जीवन में बदलाव लाता है करवा चौथ, अहोई अष्टमी, संकट चतुर्थी जैसे महत्वपूर्ण व्रत महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखते हैं।
सनातन धर्म की परंपरा के अनुसार स्त्री को सृजन शक्ति और करुणा का प्रतीक माना गया है । स्त्री को देवी का दर्जा देने के पीछे उसके त्याग सृजन शक्ति करुणा और मातृत्व जैसे गुणों को सम्मान देना है, इसलिए धर्म ग्रंथों में देवी उपासना के साथ-साथ स्त्री के सम्मान का भी वर्णन मिलता है। ऐसी मान्यता है कि जहां स्त्रियों का सम्मान होता है वहीं पर देवी देवता विराजमान करते है । उनकी मौजूदगी के बिना कोई भी शुभ काम रस्म संस्कार पूरे नहीं किए जा सकते हैं । घर में लगभग सभी शुभ कार्य स्त्रियों के हाथों से ही करने की परंपरा चली आ रही है।