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सामूहिक दुष्कर्म मामले में पूर्व मंत्री दोषी करार

डेस्क रिपोर्ट। उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति समेत तीन को लखनऊ की एमपी-एमएलए कोर्ट ने बुधवार को सामूहिक दुष्कर्म के मामले में दोषी करार दिया है। सामूहिक दुष्कर्म मामले में पूर्व मंत्री दोषी करार

जबकि इसी मामले में गायत्री का गनर और पीआरओ समेत चार साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिए गए हैं। 18 फरवरी, 2017 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गायत्री प्रसाद प्रजापति व अन्य छह अभियुक्तों के खिलाफ थाना गौतमपल्ली में सामूहिक दुष्कर्म, जानमाल की धमकी व पाक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था।

सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश पीड़िता की अर्जी पर दिया था। पीड़िता ने गायत्री प्रजापति व उनके साथियों पर दुष्कर्म का आरोप  लगाया था।

पीड़िता ने आरोप लगाया था कि साल 2014 में गायत्री के आवास पर उसके साथ गैंगरेप हुआ था। गायत्री प्रसाद प्रजापत‍ि गैंगरेप के मामले में 15 मार्च 2017 से जेल में बंद हैं। गायत्री समेत सभी अभियुक्तों को मार्च 2017 में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।

उनके अलावा अदालत ने मामले के दो अन्य आरोपियों आशीष शुक्ला और अशोक तिवारी को भी दोषी ठहराया। अदालत ने गायत्री के बंदूकधारी चंद्रपाल, पीआरओ रूपेश्वर उर्फ ​​रूपेश और एक वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी के बेटे बिकाश वर्मा और अमरेंद्र सिंह उर्फ ​​पीटू के खिलाफ कोई सबूत नहीं पाया और उन्हें बरी कर दिया।

बुधवार को गायत्री समेत सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया. विशेष न्यायाधीश गायत्री समेत तीनों आरोपियों को आईपीसी की धारा 376डी और पोक्सो एक्ट की धारा 5जी/6 के तहत दोषी ठहराया गया था. IPC धारा में आजीवन कारावास का प्रावधान है, जबकि POCSO धारा में मृत्युदंड का भी प्रावधान है। सजा पर सुनवाई 12 नवंबर को होगी।

हुड़दंग न्यूज

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