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IVF son born : कई साल इन्फर्टिलिटी से जूझी, फिर उनके लिए सपोर्ट सिस्टम बनाया जो मां नहीं बन पा रहीं

IVF son born – लखनऊ में पली-बढ़ी। जेएनयू से पढ़ाई हुई। 10 साल कॉरपोरेट में नौकरी भी की। फौजी पति मिला। बहुत प्यार करने वाला। लेकिन शादी के बाद जो हर लड़की की ख्वाहिश होती है मां बनना, उसके लिए तरस गई।

10 सालों तक इंफर्टिलिटी झेली। डॉक्टरी इलाज के साथ बाबाओं के पास भी गई कि किसी तरह मां बन जाऊं। मैं मां बनी पर जो दुख मैंने सहे, उसकी अंतहीन पीड़ा रही। कभी किसी को मातृत्व का सुख पाने में ऐसा सफर न करना पड़े, इसलिए ‘फर्टिलिटी दोस्त’ बनाया।

वुमन से गीतांजलि बनर्जी खास बातचीत में कहती हैं, शादी के एक साल बाद मैंने कंसीव करने की कोशिश की, लेकिन हुआ नहीं। तब हम दोनों पति-पत्नी डॉक्टर के पास गए। यहीं से मेरी इंफर्टिलिटी की जर्नी शुरू हुई और 10 साल तक मैंने इसे भोगा।

मेरे पांच मिसकेरेज हुए। एक IVF son born भी फेल हुआ। हर मिसकैरेज के साथ दिक्कतें बढ़ती चली गईं। इस बीच फर्स्ट स्टेज का ओवेरियन कैंसर का भी पता चला। इस स्टेज में डॉक्टर ने बोला कि मैं मां बनने की कोशिश न करूं।

IVF son born  जान को भी खतरा
मैं नेचुरली कंसीव कर पा रही थी, लेकिन बच्चे की धड़कन नहीं आ रही थी। डॉक्टर ने यह भी कहा कि आप बच्चा एडोप्ट करने की सोचें। मेरे हसबैंड को भी बोला कि अगर आप लोगों ने फिर से कोशिश की तो आपकी पत्नी की जान भी जा सकती है।

लोन पर लेकर अंगूठियां पहनीं
मैं पागलों की तरह वह सब कर रही थी जो जैसा बता रहा था। दुर्गा पूजा अष्टमी में जो केला चढ़ाया जाता है उसे खाया। अपनी औकात से महंगी अंगूठियां पहनीं। यहां तक कि लोन लेकर अंगूठियां पहनी। हर उस बाबा के पास गई जहां से उम्मीद नजर आती थी। होम्योपैथी, नेचुरोपैथी, आयुर्वेद, एस्ट्रोलजर सब के पास गई।

घावों को कुरेदते हैं लोग
डिप्रेशन में मैंने कई बार मरने की सोची। किसी भी पार्टी में जाती तो लोग मेरे करिअर से ज्यादा बच्चे के बारे में पूछते। एक बार तो एक पार्टी में खीझकर कह दिया कि अभी पांच दिन पहले ही मिसकैरेज हुआ है। हमें हमारी स्थिति पर छोड़ दें। लोग घावों को कुरेदते।

IVF son born  के लिए खुद को फिर तैयार किया
एक IVF son born हो चुका था। बेहिसाब पैसे लगे। दवाएं भी खानी पड़ीं। पूरा शरीर खराब हो गया था। मेंटली और फिजिकली दोनों तरह से परेशान हुई। दोबारा IVF son born के लिए डर रही थी। घबराहट थी कि इस बार भी IVF son born  हो गया तो क्या करूंगी। मैंने तय कर लिया कि इस बार ऐसा कुछ हुआ तो बच्चा गोद ले लूंगी। आखिरकार 2014 में आईवीएफ से मुझे बेटा हुआ। आज वह आठ साल का है।

ऐसे बना ‘फर्टिलिटी दोस्त’
मुझे लगा कि मैं अकेली नहीं हूं। कई महिलाएं इंफर्टिलिटी से जूझ रही हैं। तब मैंने सिक्रेट फेसबुक पेज शुरू किया। वहां कई महिलाओं ने अपने अनुभव शेयर किए। कुछ महिलाओं ने यह भी कहा कि उनके पति उन्हें छोड़ने को तैयार हैं। कुछ ने कहा कि घर में उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। मैंने ब्लॉग लिखना शुरू किया। यहां भी पहले अपनी कहानी बताई ताकि लोग अपने बारे में बता पाएं।

 हिम्मत न हारें
मेरी पूरी जर्नी में मुझे कोई सपोर्ट सिस्टम नहीं मिला। मैंने तय किया कि एक ऐसा स्पेस बनाया जाए, जिसके जरिए लोगों को सपोर्ट सिस्टम मिले। मेरे पास कंसीव न होने, IVF son born होने, हसबैंड-वाइफ के रिलेशन ठीक नहीं बन पाने, मिसकैरेज होने, ज्यादा वजन की वजह से कंसीव न कर पाने जैसी परेशानियां लेकर लोग आते हैं। ये लोग 3 से 6 महीने में ऐसी परेशानियों से उबर जाते हैं। मदद करने के लिए देशभर में विशेषज्ञों की पूरी टीम है।

मैं हर महिला को कहती हूं कि मां बनने का सफर कई बार बहुत दुखदायी हो जाता है, लेकिन हिम्मत न हारें। ऐसे लोगों के चक्कर में न पड़ें जो आपको भरमाये। ऐसे विकल्प देखें जहां से आपको मदद मिल सकती है।

IVF son born : कई साल इन्फर्टिलिटी से जूझी, फिर उनके लिए सपोर्ट सिस्टम बनाया जो मां नहीं बन पा रहीं
photo by google

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