बिहार में शराबबंदी कानून की सख्ती ने एक बार फिर अनोखा मोड़ लिया। वीर कुंवर सिंह चेकपोस्ट पर उत्पाद विभाग की सामान्य जांच के दौरान नशे में धुत एक व्यक्ति की पहचान ने आठ साल पुराना पारिवारिक गुमशुदगी का राज खोल दिया। सुधीर दास नामक यह शख्स समस्तीपुर के मारीचा गांव का निवासी निकला, जिसे परिजन मान चुके थे मृत। बुधवार की यह घटना न सिर्फ विभाग के लिए यादगार बनी, बल्कि एक परिवार को नई जिंदगी दे गई।
जांच के दौरान सुधीर को हिरासत में लेने पर पूछताछ शुरू हुई। पते की तस्दीक में पता चला कि वह ज्ञानी दास का पुत्र है, जो 2018 से लापता था। स्थानीय पुलिस ने तुरंत समस्तीपुर सूचित किया। गुरुवार को पिता समेत परिजन बक्सर पहुंचे और आंसुओं के बीच गले मिले। उत्पाद अधीक्षक अशरफ जमाल ने इसे विभागीय सफलता बताया।
लापता होने की दर्दभरी कहानी और आठ साल का संघर्ष
सुधीर सात भाइयों में चौथा था। शादी के दो साल बाद वह गायब हो गया, छोड़ गया पत्नी और छोटे बच्चे को। सालों की तलाश नाकाम रही तो परिवार ने श्राद्ध कर दिया। पत्नी ने लंबे इंतजार के बाद दूसरी शादी कर ली। पिता ज्ञानी दास की आंखें नम होते हुए बोले, “हमने सोचा भी न था कि बेटा जिंदा लौटेगा।”
सुधीर ने ज्यादा कुछ नहीं बताया। सिर्फ इतना कहा कि मजदूरी से पेट पाल रहा था। उसके शांत स्वभाव ने बचपन से सबको प्रभावित किया था। क्या नशा इस लापता होने का कारण बना? या कोई और राज? अभी स्पष्ट नहीं।
विभाग की मुस्तैदी और समाज पर संदेश
यह घटना शराबबंदी अभियान की सकारात्मक छवि पेश करती है। अधीक्षक जमाल ने कहा, “हमारी चेकिंग ने परिवार को जोड़ा।” बिहार में ऐसी कहानियां प्रेरणा देती हैं। अब सुधीर का परिवार फिर जुड़ेगा या पुरानी जटिलताएं हल होंगी? स्थानीय प्रशासन मदद के लिए तैयार है।








