ग्वालियर के अंकित शर्मा को रद्दी में बिकती किताबें देख दुख होता था। वे ऐसे कई जरूरतमंद छात्रों को जानते थे, जो जरूरी किताबें तक नहीं खरीद पाते थे। उन्होंने घर-घर घूमकर 3 हजार किताबें जुटाई। इनसे एक लाइब्रेरी खोली। यहां इंटरनेट वाईफाई भी लगवाया। यहां पढ़ने का कोई शुल्क नहीं देना होता।








