इंदौर के डांसिंग कॉप रंजीत सिंह को मिली सजा, हुआ डिमोशन, बन गए आरक्षक

By: शुलेखा साहू

On: Friday, January 30, 2026 6:43 AM

इंदौर के डांसिंग कॉप रंजीत सिंह को मिली सजा, हुआ डिमोशन, बन गए आरक्षक
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इंदौर के ट्रैफिक चौराहों पर डांस करते हुए वायरल हो चुके पुलिसकर्मी रंजीत सिंह को अब विभागीय सजा का सामना करना पड़ा है। पुलिस मुख्यालय ने उन्हें कार्यवाहक प्रधान आरक्षक के पद से हटाकर मूल पद आरक्षक पर वापस भेज दिया। यह कार्रवाई मुंबई की एक युवती द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद हुई, जिसमें अश्लील चैट और अनुचित व्यवहार का दावा किया गया।

रंजीत सिंह, जिनकी डांसिंग वीडियोज ने देशभर में लाखों व्यूज बटोरे, वर्तमान में इंदौर रक्षित केंद्र में तैनात थे। विभागीय जांच के बाद एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया के कार्यालय ने यह जानकारी साझा की। अनुशासनात्मक प्रक्रिया पूरी होने पर उनका अतिरिक्त प्रभार छीना गया, जो पुलिस महकमे में सख्ती का संकेत देता है।

मामला तब गरमाया जब मुंबई निवासी राधिका सिंह ने इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट कर रंजीत पर इल्जाम लगाए। उन्होंने दावा किया कि रंजीत ने उन्हें दोस्ती का प्रस्ताव दिया, इंदौर आने को कहा और फ्लाइट टिकट व होटल बुकिंग की बात कही। राधिका ने कहा कि यह व्यवहार अस्वीकार्य था, इसलिए उन्होंने सार्वजनिक रूप से विरोध जताया। उनके वीडियो में रंजीत की शक्ल-सूरत पर तीखे कमेंट्स भी थे, साथ ही समाज में पुरुषों के डराने वाले रवैये पर सवाल उठाए।

रंजीत ने सफाई देते हुए बताया कि डेढ़ साल पहले राधिका ने खुद को उनका फैन बताया था। उन्होंने लाइव ड्यूटी देखने की इच्छा जताई तो मजाक में फ्लाइट-होटल की बात कही थी। लेकिन राधिका के दूसरे वीडियो ने विवाद और भड़काया, जिसमें उन्होंने रंजीत को कठोर शब्दों में ललकारा और अपने कपड़ों-सिगरेट पीने पर ट्रोलर्स को जवाब दिया।

यह घटना सोशल मीडिया के दौर में पुलिसकर्मियों की छवि पर सवाल खड़े करती है। रंजीत की डांसिंग स्टाइल ने उन्हें हीरो बना दिया था—ट्रैफिक नियम सिखाने के लिए वायरल वीडियोज ने युवाओं को प्रभावित किया। लेकिन निजी चैट्स ने उनकी लोकप्रियता को चुनौती दी। विभाग की यह कार्रवाई अन्य पुलिसवालों के लिए चेतावनी है कि ड्यूटी के अलावा निजी जीवन में भी सतर्क रहें।

फिलहाल रंजीत मूल पद पर लौट आए हैं, लेकिन मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में बना हुआ है। क्या यह विवाद उनकी डांसिंग जर्नी का अंत है या नया मोड़? आने वाले दिनों में विभागीय रिपोर्ट और अधिक खुलासे हो सकते हैं। इंदौर पुलिस ने अनुशासन को प्राथमिकता देते हुए संदेश दिया है कि कोई भी पद या लोकप्रियता कानून से ऊपर नहीं।

 

 

शुलेखा साहू

मैं एक स्वतंत्र लेखक और पत्रकार हूँ, जो समाज, राजनीति, शिक्षा और तकनीक से जुड़े मुद्दों पर गहराई से लिखती हूँ। आसान भाषा में जटिल विषयों को पाठकों तक पहुँचाना Hurdang News के मंच से मेरा प्रयास है कि पाठकों तक निष्पक्ष, स्पष्ट और प्रभावशाली जानकारी पहुँच सके।
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