मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के सिहोरा के खितौला स्थित इसाफ स्मॉल फाइनेंस बैंक से 15 करोड़ रुपये की लूट की सनसनीखेज वारदात के नए अहम सुराग पुलिस के हाथ लगे हैं। अपराधी इस वारदात को अंजाम देने के बाद करीब 24 घंटे तक घटना स्थल से 31 किलोमीटर दूर इंद्राना गांव में रुके रहे और वहां से पुलिस की हरकतों पर नजर रखते रहे। वारदात के अगले दिन बाइक से फरार हुए डकैतों ने हथियारों को उसी किराए के मकान में छोड़ दिया, जिसे वे सात दिन पहले एक दलाल के जरिए किराए पर लेकर वहां रुक रहे थे। पुलिस ने इस मामले का मास्टरमाइंड एक पाटन का युवक बताया है, जिसकी तलाश अब भी जारी है।
वारदात एकदम फिल्मी अंदाज में हुई। डकैतों ने अलग-अलग बाइक से हेलमेट लगाकर सिहोरा में बैंक की हफ्तों तक रेकी की। उन्होंने बैंक के कर्मचारियों के ड्यूटी के समय और ग्राहक आने-जाने का पूरा शेड्यूल समझा। उसी योजना के तहत सोमवार सुबह 9 बजे पांच नकाबपोश हथियारबंद बदमाश बैंक में घुसे और महज 27 मिनट में 14 किलोग्राम 875 ग्राम सोना और करीब 5 लाख 70 हजार रुपये नकद लूटकर फरार हो गए।
डकैत वारदात के बाद करीब 24 घंटे इंद्राना के इसी मकान पर रुके, जहां उन्होंने हथियार, कट्टे, कुछ बैग, और कपड़े छोड़ दिए। पुलिस ने मकान का ताला तोड़कर छानबीन की, जहां रिवाल्वर समेत कई हथियार मिले। मकान मालिक इंद्रजीत विश्वकर्मा और किराए पर मकान दिलाने वाले सिहोरा निवासी सोनू नामक युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस का अनुमान है कि कम से कम तीन डकैत बाहर से थे।
जांच से पता चला है कि डकैतों ने फर्जी आधार कार्ड के सहारे मकान किराए पर लिया था और खुद को फाइनेंस कंपनी कर्मचारी बताकर गांव में रह रहे थे। पुलिस ने उनकी गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए आसपास के सीसीटीवी फुटेज कब्जे में लिए हैं। इससे भी कई संदिग्ध पकड़ में आए हैं।
इसी बीच, पाटन के रहने वाले रईस खान नामक युवक को गिरफ्तार किया गया है, जिसने डकैतों को मकान दिलाने में मदद की। पुलिस उसकी पूछताछ कर रही है और पूरे गिरोह के पीछे की साजिश को उजागर करने में लगी है। फिलहाल, पुलिस ने डकैतों को पकड़ने के लिए 30 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है।







