भोपाल। मप्र सरकार वित्त वर्ष 2026-27 का बजट 18 फरवरी को पेश करने जा रही है। इस बार प्रदेश का बजट 4,65,491 करोड़ रुपए होना अनुमानित है, जो पिछले साल के बजट 4.21 लाख करोड़ रुपए से करीब 15% ज्यादा होगा। लेकिन इन सबके बीच सबसे बड़ी चिंता यह है कि प्रदेश का कर्ज भी 5 लाख करोड़ पार हो जाएगा। वजह – लाड़ली बहना, लाड़ली लक्ष्मी, वेतन भत्ते के खर्चे इस साल सरकार पर भारी पड़ने वाले हैं। यानी इन तीनों पर ही 1.14 लाख करोड़ रुपए खर्च होंगे।
लाड़ली बहना योजना का खर्च आगामी वित्तीय वर्ष में 23 हजार करोड़ रुपए पार कर जाएगा। इसी तरह, लाड़ली लक्ष्मी योजना में 1200 करोड़ व कर्मचारी – पेंशनर के वेतन-भत्तों पर 90 हजार करोड़ रु. खर्च होंगे। कुल मिलाकर पिछले साल की तुलना में इस साल 45 हजार करोड़ रु. ज्यादा खर्च होगा। सबसे बड़ी चुनौती यह भी है कि अगले वित्त वर्ष में अकेले बाजार से करीब 78 हजार करोड़ रुपए कर्ज लेने का अनुमान है। इतनी ही राशि किस्त- ब्याज चुकाने में जाएगी।
2020-21 में सरकार सालभर में 31,686 करोड़ उधार लेती थी। अब 1.10 लाख करोड़ पहुंच सकता है। यानी 6 साल में सालाना कर्ज लेने की जरूरत ढाई गुना बढ़ गई है।
असर क्या सड़क- स्कूल – अस्पताल जैसे कार्यों के लिए बजट कम पड़ेगा
कर्ज कहां से लिया?
सरकार ने बाजार और वित्तीय संस्थानों से कुल 85,076 करोड़ रुपए कर्ज लिया। इसमें से 76,210 करोड़ रुपए बाजार से बॉन्ड के जरिए लिए गए।
चुकाया कितना?
इस साल सरकार ने 58,616 करोड़ रुपए सिर्फ पुराने कर्ज की किस्त और ब्याज में दे दिए। इसमें 29,980 करोड़ रुपए मूल रकम ( किस्त) थी व 28,636 करोड़ रुपए ब्याज था।
इसका असर क्या होगा?
जब बड़ी रकम ब्याज और किस्त में चली जाएगी, तो सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों जैसे विकास कार्यों के लिए कम पैसा बचेगा। हालांकि, सरकार का तर्क यह है कि जो कर्ज लिया जा रहा है, वह विकास कार्यों में खर्च होगा और उनसे भविष्य में आय देने वाले एसेट (जैसे सड़क, इंफ्रास्ट्रक्चर) बनेंगे।
जो बजट बढ़ाया, वह राशि आएगी कहां से?
करीब 43 हजार करोड़ रु. का अतिरिक्त इंतजाम करना होगा। यह राशि राज्य के रेवेन्यू सोर्स से ही बढ़ाई जा सकती है, लेकिन इसकी गुंजाइश कम ही है। आगामी तीन सालों के बजट में हर साल 15 से 17 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होगी।
इधर, आरबीआई की रिपोर्ट…. देश के कुल कर्ज में 5% हिस्सा मप्र का
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के बजट अनुमानों के मुताबिक, देश के कुल राज्यों की देनदारी में मप्र का हिस्सा 5% से अधिक है। • मप्र की देनदारियां 2007 में 52,731.1 करोड़ रु. थी, 2026 में 5,31,012.8 करोड़ रु. हो गई है। यानी 19 साल में 10 गुना ।








