रायसेन जिला अस्पताल में सुरक्षा गार्ड प्रधान आरक्षक और नर्सों के बीच विवाद ने हंगामा मचा दिया। मंगलवार को नर्सों ने आरोपी प्रधान आरक्षक कृष्णपाल पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए अस्पताल पुलिस चौकी पर ताला जड़ दिया। डॉक्टरों ने काली पट्टी बांधकर समर्थन किया, लेकिन देर शाम दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया।
तीन दिन पुरानी शिकायत पर भड़का आक्रोश
विवाद शनिवार रात शुरू हुआ जब कुछ मरीज परिजन अस्पताल पहुंचे। नर्स और प्रधान आरक्षक के बीच बहस हो गई। नर्सों का आरोप है कि ड्यूटी के दौरान आरक्षक ने अभद्रता की। तीन दिन पहले कलेक्टर व एसपी को लिखित शिकायत दी गई, लेकिन कार्रवाई न होने से स्वास्थ्यकर्मी भड़क उठे। “सुरक्षा देने वाले ही असुरक्षित महसूस करा दें, तो काम कैसे चले?” नर्सों ने नारेबाजी की।
विरोध प्रदर्शन: चौकी बंद, उग्र चेतावनी
नाराज नर्सों ने पुलिस चौकी बंद कर ताला लटका दिया। डॉक्टरों संग काली पट्टी बांधकर उन्होंने तत्काल कार्रवाई की मांग की। चेतावनी दी कि बिना एक्शन के काम बंद कर उग्र आंदोलन करेंगी। अस्पताल सेवाएं प्रभावित होने का खतरा मंडराया, मरीजों में अफरा-तफरी हुई।
शाम को सुलझा विवाद, आपसी सहमति
देर शाम सिविल सर्जन डॉ. यशपाल बाल्यान और थाना प्रभारी नरेंद्र गोयल की मध्यस्थता से समझौता हुआ। स्टाफ नर्स और प्रधान आरक्षक ने अनजाने में हुई गलती मानी। “आगे ऐसा नहीं होगा, साथ मिलकर जनसेवा करेंगे,” दोनों पक्षों ने कहा। विवाद समाप्त कर चौकी खोल दी गई। अब अस्पताल में सामान्य कामकाज शुरू।
स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल
यह घटना अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलती है। स्वास्थ्यकर्मी अग्रिम मोर्चे पर रहते हैं, लेकिन आंतरिक विवाद सेवा प्रभावित करते हैं। प्रशासन ने समझौते को सकारात्मक बताया, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाओं रोकने के उपाय जरूरी। मरीजों को राहत कि सेवाएं बहाल।








