जल जीवन मिशन के नाम पर 1000 करोड़ की हेराफेरी का मामला सामने आया है यह मामला मध्य प्रदेश का है, आरोप सीधे पीएचई मंत्री संपत्तिया उइके पर लगा है चौंकाने वाली बात यह है कि हेराफेरी की जांच का आदेश उन्हीं के विभाग के इंजीनियर इन चीफ ने जारी कर दिया है पूरा मामला बीते 12 अप्रैल से शुरू हुआ जब पूर्व विधायक किशोर ने प्रधानमंत्री कार्यालय ( PMO ) को शिकायत पत्र भेजा था।
आरोप था कि जल जीवन मिशन के टेंडर में मोटी रिश्वतखोरी हुई है मंत्री खुद इसमें शामिल है इसके बाद पीएमओ ने 24 अप्रैल को शिकायत राज्य सरकार को भेजी वहां से फाइल लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग होते हुए 21 जून को पीएमसी संजय के पास पहुंची।
सूत्र बताते हैं कि यह शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय ( PMO ) तक पहुंची थी इसके बाद जांच के आदेश जारी किए गए जांच में मंत्री के अलावा मंडला में पदस्थ कार्यपालन यंत्री मनोज पर भी हजारों करोड़ की रिश्वतखोरी की आरोप है.
30,000 करोड़ रुपए का होगा हिसाब-किताब
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार ने मध्यप्रदेश को जल जीवन मिशन के तहत 30,000 करोड़ रुपये दिए है. जिसे जांच करने का आदेश दिया है. साथ ही मध्य प्रदेश की लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) मंत्री संपतिया उईके जिन पर 1000 करोड़ घूस लेने का आरोप लगा है, उनकी भी संपत्ति जांच करने के आदेश दिए हैं.
सीबीआई जांच में निकलेगा बड़ा घोटाला
किशोर समरीते ने शिकायत में कहा कि जल जीवन मिशन के लिए केंद्र द्वारा दिए गए 30 हजार करोड़ रुपए में मिले हैं. जिसमें से 1000 करोड़ रुपये मंत्री संपतिया उइके ने रिश्वत के तौर पर लिया है. साथ ही यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश में हजारों काम के फर्जी प्रमाण पत्र केंद्र को भेजे गए हैं. सीबीआई जांच कराई जाए तो यह देश का बड़ा घोटाला निकलेगा. शिकायत के बाद पीएमओ ( PMO ) और केंद्र सरकार ने तुरंत एक्शन लेते हुए राज्य सरकार से जांच कर रिपोर्ट मांगी है. बताया जा रहा है कि विभाग के अधिकारी भी जांच के घेरे में हैं.
सोर्स- मीडिया रिपोर्ट








