इंदौर। इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से 10 लोगों की मौत, 200 से अधिक बीमार। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सवाल पर भड़के, वीडियो वायरल होने के बाद मांगी माफी। स्वच्छता में देश का गौरव बन चुका इंदौर इन दिनों एक दर्दनाक त्रासदी से गुजर रहा है। भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से फैली बीमारी ने मंगलवार रात तक 10 लोगों की जान ले ली, जबकि दो सौ से अधिक लोग अब भी अलग-अलग अस्पतालों में इलाज करवा रहे हैं। इस बीच, स्थिति पर टिप्पणी करते हुए प्रदेश के नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय मीडिया के एक सवाल पर भड़क गए — और मामला देखते ही देखते राजनीतिक तूफान में बदल गया।
सवाल पर गुस्साए मंत्री, कैमरे के सामने बिगड़े बोल
बुधवार रात मीडिया ब्रीफिंग के दौरान विजयवर्गीय शुरुआत में संयमित दिखे। पर जब रिपोर्टर्स ने प्रभावित क्षेत्र में पीने के पानी की पुनर्व्यवस्था और चिकित्सा बिल रिफंड को लेकर सवाल पूछे, तो मंत्री ने स्पष्ट रूप से नाराजगी जताई। उनके एक विवादास्पद बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसे लेकर विपक्ष ने राज्य सरकार पर जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया है।
मौतों के बीच व्यवस्थाओं पर उठे सवाल
भागीरथपुरा, जो विजयवर्गीय का ही विधानसभा क्षेत्र इंदौर-1 का हिस्सा है, में पिछले एक सप्ताह से जलजनित संक्रमण तेजी से फैला है। नगर निगम टीम ने करीब 50 घरों के नमूनों में बैक्टीरिया की मौजूदगी की पुष्टि की। स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति को “स्थानीय आपदा” घोषित करते हुए आपात टीम तैनात की है। अब तक 212 लोगों को अस्पतालों में भर्ती किया गया है, जिनमें से 50 को छुट्टी मिल चुकी है।
सोशल मीडिया पर विरोध और माफी बयान
वायरल वीडियो में मंत्री के असंयमित शब्दों पर सोशल मीडिया पर कड़ी प्रतिक्रिया आई। कई यूजर्स ने इसे “संवेदनहीनता की पराकाष्ठा” बताया। मामले के बढ़ने के बाद कैलाश विजयवर्गीय ने देर रात सोशल मीडिया पोस्ट जारी करते हुए कहा कि दुख और थकान के बीच उनके शब्द गलत निकल गए। उन्होंने कहा, “मेरे क्षेत्र के लोगों की पीड़ा देखकर मन व्यथित है। मेरी प्राथमिकता उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य ही है।”
जनता में आक्रोश और प्रशासन पर सवाल
स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया कि फिल्टर प्लांट की मेंटेनेंस में लापरवाही बरती गई, जिससे दूषित पानी सप्लाई हुआ। नगर प्रशासन ने अब नई टंकियों की सफाई और जल स्रोतों की जांच के आदेश दिए हैं। वहीं, कांग्रेस ने मंत्री से इस्तीफे की मांग की है, जबकि भाजपा ने इसे ‘अनजाने में कही गई बात’ बताकर बचाव किया है।








