नक्सलियों का रणनीतिक चाणक्य माना जाने वाला गणेश उइके (69) ओडिशा में कंधमाल जिले के जंगलों में मुठभेड़ के दौरान अपने 5 साथियों के साथ मारा गया है। मई में नक्सल संगठन के महासचिव बसवाराजू और महीनेभर पहले दुर्दात नक्सली माड़वी हिडमा के एनकाउंटर के बाद नक्सल उन्मूलन की दिशा में यह फोर्स की तीसरी सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है।
वह पक्का हनुमंतु, राजेश तिवारी, चामरू और रूपा जैसे नामों से भी जाना जाता था। वह ओडिशा में नक्सल गतिविधियों की जिम्मेदारी संभालने के एक साल से भी कम समय बाद मारा गया।
छत्तीसगढ़, ओडिशा के अलावा आंध्रप्रदेश और तेलंगाना में भी वह सुरक्षा बलों की हिट लिस्ट में शामिल था। अलग-अलग सरकारों ने उस पर कुल 1.1 करोड़ रुपए इनाम रखा था । गृह मंत्री अमित शाह ने इस ऑपरेशन को नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी सफलता बताया।
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, यह ओडिशा को नक्सलवाद से मुक्त करने की दिशा में बड़ा कदम है। ओडिशा में अब कोई बड़ा नक्सल नेता नहीं बचा ओडिशा के डीजीपी वाईबी खुरानिया ने कहा कि उइके की मौत से ओडिशा में नक्सल गतिविधियों की रीढ़ टूट गई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि संगठन के पास अब कोई वरिष्ठ नेता नहीं बचा है।







