नई दिल्ली, 17 मार्च 2026: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने फास्टैग वार्षिक पास की दरों में वृद्धि का ऐलान किया है। 1 अप्रैल 2026 से यह सुविधा महंगी हो जाएगी, जिससे लाखों वाहन चालकों की जेब पर असर पड़ेगा। यह बदलाव टोल संग्रह प्रणाली को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से लाया गया है, लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि आखिर यह किन वर्गों के लिए वरदान साबित होगा?
एनएचएआई के अनुसार, फास्टैग वार्षिक पास उन लोगों के लिए आदर्श है जो राष्ट्रीय राजमार्गों पर बार-बार यात्रा करते हैं। विशेष रूप से, टोल प्लाजा के 15-20 किलोमीटर दायरे में रहने वाले निवासियों को इससे बड़ा लाभ मिलेगा। अब हम गहराई से समझते हैं कि यह पास कैसे यात्रियों की मुश्किलें हल कर सकता है।
टोल प्लाजा के पास रहने वालों की परेशानी दूर
मान लीजिए आप दिल्ली-मेरठ हाईवे के किनारे रहते हैं और रोजाना ऑफिस जाते हुए टोल पार करते हैं। हर बार 50-100 रुपये का टोल कटना बोझिल हो जाता है। फास्टैग वार्षिक पास खरीदकर आप पूरे साल भर अनलिमिटेड यात्रा (या 200 क्रॉसिंग तक) कर सकते हैं। यह खासकर उन परिवारों के लिए उपयोगी है जहां स्कूल, बाजार या कार्यस्थल हाईवे के दूसरी ओर है। एक बार फीस चुकाने पर रिचार्ज की टेंशन खत्म!
दैनिक यात्रियों के लिए मनी सेवर
दो शहरों के बीच डेली कम्यूट करने वाले ट्रक ड्राइवरों, सेल्समैन या बिजनेसमैन के लिए यह पास वरदान है। उदाहरणस्वरूप, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर रोजाना आने-जाने वाले व्यक्ति सालाना हजारों रुपये बचा सकते हैं। एनएचएआई का कहना है कि यह पास केवल केंद्र सरकार के राष्ट्रीय राजमार्गों पर वैलिड है—राज्य स्तरीय सड़कों पर नहीं। वैलिडिटी एक वर्ष या 200 टोल क्रॉसिंग (जो पहले समाप्त हो) तक रहती है।
क्यों हो रही कीमत बढ़ोतरी?
एनएचएआई ने बताया कि बढ़ती लागत और रखरखाव खर्च के कारण यह कदम उठाया गया। पहले 3,000 रुपये के आसपास की यह सुविधा अब अधिक होगी, लेकिन फायदे गिनाने पर यह सस्ती ही लगेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे टोल चोरी रुकेगी और राजमार्गों का रखरखाव बेहतर होगा। हालांकि, लंबी दूरी के यात्रियों को सामान्य फास्टैग ही ज्यादा फायदेमंद रहेगा।








