नई दिल्ली। आसमान आज रात एक अद्भुत नज़ारे का गवाह बनेगा। साल 2025 का अंतिम चंद्र ग्रहण रविवार रात पड़ रहा है, जो भारतीय समयानुसार 7 सितंबर रात 9 बजकर 58 मिनट से शुरू होकर 8 सितंबर तड़के 1 बजकर 26 मिनट पर समाप्त होगा। लगभग 3 घंटे 29 मिनट तक चलने वाले इस पूर्ण चंद्र ग्रहण में चांद लाल रंग की आभा के साथ दिखाई देगा, जिसे खगोल विज्ञान में “ब्लड मून” कहा जाता है।
सूतक काल और धार्मिक महत्व
हिन्दू पंचांग के अनुसार यह ग्रहण भाद्रपद पूर्णिमा की रात को लग रहा है। ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल प्रारंभ हो जाता है। यानी दिन में ही पूजा-पाठ रोकने और भोजन से पहले सावधानियां बरतने की परंपरा लागू हो गई। सूतक काल का समापन 1 बजकर 26 मिनट पर ग्रहण समाप्त होने के साथ हो जाएगा। परंपरा के अनुसार इस अवधि में पूजा, भोजन और शुभ कार्य करने से परहेज किया जाता है।
ब्लड मून की खगोलीय खासियत
यह ग्रहण कुंभ राशि और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में घटित हो रहा है। इस दौरान सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा में आ जाएंगे और पृथ्वी की परछाई चंद्रमा पर पूरी तरह पड़ेगी। इसी वजह से चांद सामान्य सफेद चमक की जगह लालिमा लिए हुये नजर आएगा। यह दृश्य भारत सहित एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका और यूरोप के कई हिस्सों में देखा जा सकेगा।
अपने शहर में कब दिखेगा लाल चांद
भारत में “ब्लड मून” का सबसे खूबसूरत दृश्य रात 11 बजे से 12 बजकर 22 मिनट के बीच दिखेगा। खगोलविदों का कहना है कि यह ग्रहण बिना किसी उपकरण के नंगी आंखों से सुरक्षित रूप से देखा जा सकता है। खासकर मौसम साफ रहने पर चंद्रमा के बदलते रंगों का अद्भुत नजारा लोगों को वर्षों तक याद रहेगा।
ज्योतिष और जनमानस की मान्यता
ज्योतिष के अनुसार यह ग्रहण स्वास्थ्य और आर्थिक मामलों को प्रभावित कर सकता है। साथ ही राशियों के आधार पर लोगों के जीवन में छोटे-बड़े बदलाव की भविष्यवाणी की गई है। वहीं, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण का समय आत्ममंथन और मंत्र-जप के लिए शुभ माना जाता है। कई मठों और मंदिरों में विशेष अनुष्ठान की तैयारियां भी की गई हैं।
विज्ञान बनाम आस्था
जहां वैज्ञानिक समुदाय इसे ब्रह्मांड की प्राकृतिक घटना बताकर रोमांचक अवसर मान रहा है, वहीं धार्मिक दृष्टिकोण से लोग इसे पूजा-व्रत और परंपराओं से जोड़कर देख रहे हैं। यही विरोधाभास चंद्र ग्रहण को केवल एक खगोलीय घटना न रहकर सामाजिक और सांस्कृतिक अनुभव भी बना देता है।








