गाजियाबाद के कौशांबी में 23 दिसंबर को पुलिस ने झुग्गी में रहने वालों से की मजाकिया पूछताछ, वीडियो वायरल। बिहार की रोशनी खातून बोलीं- हम भारतीय हैं। ACP ने SHO को दी चेतावनी, गाजियाबाद के कौशांबी इलाके में 23 दिसंबर 2025 को एक वीडियो ने सोशल मीडिया पर हंगामा मचा दिया। नीले चितकबरे वर्दे में रैपिड एक्शन फोर्स के जवान और खाकीधारी पुलिसकर्मी एक झुग्गी में घुसे। वहां रहने वालों से उन्होंने पूछा- “बांग्लादेशी हो? पीठ पर मशीन लगाओ, ये तो बता रही है तुम विदेशी हो।” यह दृश्य अवैध घुसपैठियों के खिलाफ चल रहे अभियान का हिस्सा था, लेकिन इसमें स्थानीय गरीबों को निशाना बनते दिखा।
वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की। झुग्गी में रहने वाली रोशनी खातून, जो बिहार के अररिया जिले से 14-15 साल पहले काम की तलाश में आईं, ने सफाई दी। उन्होंने कहा, “हम भारतीय हैं। पुलिस ने आईडी चेक की और मजाक में ऐसा कहा, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई। वीडियो खुद पुलिस ने बनाया और वायरल किया।” रोशनी के जीजा मोहम्मद कैसर आलम ने भी यही बात दोहराई। उन्होंने बताया कि पुलिस ने मोबाइल फोन को ‘मशीन’ बताकर पीठ पर रखा और पूछा- “सच बोलो, बांग्लादेशी हो या हिंदुस्तानी?”
कौशांबी के भोवापुर स्लम में भी यही कहानी दोहराई गई। यहां बिहार और बंगाल से आए मजदूर रहते हैं। एक निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “पुलिस और सीआरपीएफ जवान छानबीन के नाम पर आए। कोई बांग्लादेशी नहीं मिला, सिर्फ हम जैसे गरीबों को परेशान किया।” इन बस्तियों में न पीने का पानी है, न शौचालय। लोग ठेले पर ड्रम लादकर दूर से पानी भरते हैं और हर बार शौच के लिए पैसे चुकाते हैं।
पुलिस ने इसे ‘एरिया डोमिनेशन’ बताया। इंदिरापुरम के एसीपी ने कहा कि वीडियो थाना कौशांबी के एसएचओ अजय कुमार शर्मा का है। उन्हें सख्त चेतावनी दी गई है। जांच चल रही है। एसएचओ शर्मा ने सफाई दी, “यह रूटीन जांच थी। झुग्गियों में हर 10-15 दिन में संदिग्धों, जिला बदर या अपराधियों की तलाश होती है। न गालीबाजी हुई, न धमकी। बस सामान्य बातचीत थी, जैसे बच्चों को डराने के लिए पुलिस का नाम लिया जाता है।”
यह घटना दिल्ली-यूपी में चल रहे ऑपरेशन टॉर्च और घुसपैठिया जैसे अभियानों की पोल खोलती है। असम के मुसलमानों या बांग्ला बोलने वालों पर शक की नजर पड़ रही है। गरीब मजदूर नागरिकता साबित करने में जुटे हैं, लेकिन बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। क्या सुरक्षा के नाम पर निर्दोषों का उत्पीड़न जारी रहेगा?








