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Natural Saree : प्राकृतिक रंगों से तैयार किये जाते है मध्य प्रदेश की ये साड़िया

Natural Saree : आज पूरी दुनिया में फेमस है यह धार जिले के छोटे से गांव बाग से बाग प्रिंट कि यह कला, क्योंकि इसमें प्राकृतिक रंगों के साथ ब्लॉक प्रिंटिंग ( block printing)  का इस्तेमाल किया जाता है जिसे यहां के लोकल लोगों से बात करते हुए शिल्पकार मोहम्मद अयूब खत्री ने बताया कि साल 1990 में यह बाग प्रिंट का काम करते आ रहे हैं

Natural Saree : प्राकृतिक रंगों से तैयार किये जाते है मध्य प्रदेश की ये साड़िया
photo by social media

यह उनका पुश्तैनी काम है। उन्होंने उसे बाग प्रिंट के बारे में बताते हुए यह भी कहा की पुरानी (Old )  परंपरा मध्य प्रदेश के धार जिले के बाग गांव से शुरू हुई थी जिसे इसका नाम बाग प्रिंट के नाम से जाना जाता है, यह बाग की मूल तकनीकी को बरकरार रखते हुए प्रिंट में मुख्य रूप से फूल पत्तियों और ज्योमैट्रिक पैटर्न शामिल होते हैं

इसमें चटक और पक्के रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। जिसे बाग प्रिन्ट साड़ियों के साथ-साथ बेडशीट, टेबल कवर या अन्य आउटफिट में इसका उपयोग किया जाता है जिसे बेहद खूबसूरत डिजाइंस (Design  ) एक से एक बढ़कर बनते हैं जिसे लोगों को एक ही नजर में पसंद आ जाता है।

Natural Saree : बाघ प्रिंट का इतिहास

मध्य प्रदेश के धार के एक छोटे से कस्बे से बाघ प्रिंट का नाम आधारित है यह लगभग 1000 वर्ष पहले विपरीत वातावरण और शासको की तानाशाही की वजह से बाघ की छपाई कारीगर सिंध द्वारा विस्थापित (displaced)  किया गया है इस कारीगर पर सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का गहरा प्रभाव भी दिखाई देता है।

Natural Saree : बाघ प्रिंट की साड़ियां ऐसे बनती है

सबसे पहले बाघ की छपाई की प्रक्रिया खरा पद्धति से कपड़े को अरंडी का तेल और बकरी की मांगी में डूबा कर रखा जाता है फिर इसे सुखाया जाता है ऐसा तीन बार करते हैं और फिर आखरी बार सूख जाने के बाद कपड़े को बहेड़ा पाउडर के साथ डूबा कर रखा जाता है,

जिसे इसकी छपाई का लाल रंग फिटकरी और इमली के बीज से बनाया जाता है इसी के साथ काले रंग को तैयार करने के लिए लोहे के महीन पाउडर के साथ गुड को 15 से 20 दोनों तक रखा जाता है फिर कपड़े पर छपाई  (printing) के लिए लकड़ी के चैन जैसे कर साज दिशा कलम इत्यादि का उपयोग किया जाता है जिसे बहते हुए नदी के पानी में धोकर फूलों और एलीजरीन के पानी में तांबे के बर्तन में इसे उबाला जाता है।

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Natural Saree : 29 दिन एक साड़ी को तैयार करने में लगते हैं

Natural Saree : एक बाघ प्रिंट साड़ी को तैयार करने के लिए लगभग 29 दिन लग जाते हैं इस बाघ प्रिंस साड़ी को तैयार करने के लिए गोंद, अनार के छिलके, अफीम का डोडा और हरड़ बहेड़ा आदि का उपयोग किया जाता है। जिसे एक बाघ प्रिंट साड़ी को बनाने में 97% काम गैर मशीनरी है, जिसे संरक्षित ( Protected )  कल का नाम बाग प्रिंट है एक साड़ी की कीमत₹500 से लेकर ₹2000 तक होती है इस साड़ी को आप ऑनलाइन भी ऑर्डर कर सकती हैं।

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सुलेखा साहू

समाचार संपादक @ हुड़दंग न्यूज (दबंग शहर की दबंग खबरें)समाचार / लेख / विज्ञापन के लिए संपर्क कीजिये-  hurdangnews@gmail.com

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