भोपालमध्यप्रदेश

अब बिरसा मुंडा की जयंती के बहाने आदिवासी वर्ग में प्रवेश करेगी भाजपा

अब बिरसा मुंडा की जयंती के बहाने आदिवासी वर्ग में प्रवेश करेगी भाजपा – मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव लगभग दो साल बाद होने हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी 2018 की गलतियों को नहीं दोहरा चाहती है। इसलिए वह अभी से उन सभी मोर्चे पर जुट गई है जिसकी नजरअंदाजी की वजह से 2018 में उसे बड़ा सियासी नुकसान उठाना पड़ा था।

इसी रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा राज्य के अनसूचित जनजातियों और अनुसूचित जातियों तक पहुंचना। शिवराज सरकार भोपाल में 15 नवंबर को जनजातीय सम्मेलन का आयोजन कर रही है। सम्मेलन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संबोधित करेंगे। इसमें प्रदेशभर से 2 लाख आदिवासियों को लाने का टारगेट तय किया है। निमाड़ और महाकौशल से डेढ़ लाख आदिवासियों को भोपाल लाया जा रहा है। सम्मेलन का आयोजन का सियासी मकसद भी है। मध्य प्रदेश में आदिवासी आबादी करीब 23% है। प्रदेश में विधानसभा की 230 में से 47 सीटें इस वर्ग के लिए रिजर्व हैं। इनके अलावा, 84 सीटें ऐसी भी हैं, जहां आदिवासी जीत और हार तय करते हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने आदिवासी बहुल 84 में से 34 सीट पर ही जीत हासिल की थी। इससे पहले 2013 में इस इलाके में 59 सीटों पर बीजेपी को जीत मिली थी। इससे साफ है कि आदिवासियों का साथ नहीं मिलने के कारण भाजपा सत्ता में वापसी नहीं कर पाई थी।

मालवा में भाजपा को मिली थी छह सीटें

पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को ट्राइबल रिजर्व सीटों पर सबसे ज्यादा नुकसान हुआ था। मालवा में आदिवासियों के लिए रिजर्व 22 में से मात्र 6 सीटें बीजेपी को मिली थीं, जबकि कांग्रेस ने 16 सीटें जीती थीं। 2013 में आदिवासियों ने भाजपा का साथ दिया था, तब पार्टी को यहां 18 सीटें मिली थीं। कांग्रेस को 4 सीटों से ही संतोष करना पड़ा था। यही वजह है कि जनजातीय सम्मेलन में निमाड़-मालवा से डेढ़ लाख आदिवासियों को लाने का टारगेट रखा गया है। इसके बाद महाकौशल में 15 में से 4 सीटें ही बीजेपी जीत पाई थी। अब इस इलाके पर फोकस किया जा रहा है। यही वजह है कि भाजपा ने जबलपुर में आयोजन किया था।

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