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रासुका का कदम गलत, सरकार पर लगा 10 हजार का जुर्माना

सतना – अगस्त माह में मारपीट कर थूक चटवाने वाली घटना के जिस मामले में जिला प्रशासन ने सख्त रूख अपनाते हुए आरोपी पर रासुका की कार्रवाई की थी, वह कार्रवाई अब जिला प्रशासन के लिए गले की हड्डी बन गई है। इस मामले में यूं तो पुलिस ने प्रभावी कार्रवाई करते हुए आरोपी को जेल का रास्ता दिखा दिया था लेकिन इस मामले में की गई रासुका की कार्रवाई ने जिला प्रशासन को बैकफुट पर धकेल दिया है।

इस मामले में लगाई गई हैबियस कार्पस पेटीशन की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार पर 10 हजार का जुर्माना लगाया है। जिले का यह संभवत: पहला मामला है कि जब रासुका की कार्रवाई में जिला प्रशासन के आला अधिकारी पर 10 हजार का जुर्माना लगाया गया है।

दरअसल अगस्त माह में नागौद कस्बे के गढ़ी चौराहा से संतोष पांडेय नामक युवक को अगवा कर मारपीट करने और जमीन पर थूक कर थूक चटवाने के साथ सिर पर जूता रखवाने के आरोप शशांक सिंह बघेल व अन्य साथियों पर लगे थे। इस मामले में नागौद पुलिस ने प्रभावी कदम उठाते हुए शशंक सिंह बघेल समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ धारा 365, 386, 341, 294, 323, 500, 506, 34 के तहत कार्रवाई की। शशांक और उसके साथी का पुलिस ने जुलूस निकाला और शशांक के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई का प्रस्ताव पुलिस ने तैयार कर कलेक्टर को प्रेषित किया। अमानवीय हरकत को अंजाम देने वाले मुख्य आरोपी शशांक सिंह बघेल उर्फ सुशांत सिंह उर्फ श्रीशांत सिंह पिता मधुप सिंह 29 वर्ष निवासी सोनौरा स्मार्ट सिटी डीपीएस स्कूल के पास थाना कोलगवां के विरुद्ध पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर राष्टÑीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कार्रवाई का प्रकरण तैयार किया गया। प्रस्ताव को सरकार के पास अनुशंसा के लिए भेजा गया है और अनुशंसा मिलते ही शशांक पर रासुका के तहत कार्रवाई की गई। क्

क्यों रोकी पांच दिन फाइल

इस मामले में बंदी प्रत्याक्षीकरण याचिका लगवाने वाले शहर के वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्र सिंह ने हैबियस कार्पस के तहत अधिवक्ता सिद्धार्थ दत्त के जरिए हाईकोर्ट में तर्क रखा कि शशांक सिंह बघेल पर रासुका के तहत की गई कार्रवाई गलत है। अधिवक्ताओं ने यह सवाल भी उठाया कि आखिर 18 अगस्त को पुलिस विभाग द्वारा भेजी गई फाइल को पांच दिनों (23 अगस्त) तक क्यों अपने अधिकार में रखा गया और फाइल को राज्य शासन के पास अविलंब क्यों नहीं भेजा गया? इस दौरान अधिवक्ताओं ने यह तर्क भी रखा कि शशांक सिंह बघेल द्वारा अंजाम दिया गया कृत्य निश्चित तौर पर अपराध है जिसके लिए उसे भादवि की धाराओं के तहत कार्रवाई कर जेल भी भेज दिया गया है। ऐसे में आखिर वे कौन सी परिस्थितियां थीं जिसके चलते उस पर रासुका की कार्रवाई कर दी गई? अधिवक्ताओं ने माननीय अदालत को बताया कि शशांक सिंह बघेल ने अपराध किया और उसे सजा मिली लेकिन उसका अपराध न तो आतंकवाद से प्रेरित रहा है और न ही राष्टÑद्रोह से, फिर रासुका जैसी संगीन कार्रवाई कैसे कर दी गई? हालंकि दूसरे पक्ष ने अदालत को यह बताकर कि यदि आरोपी जेल से बाहर निकला और जिले में रहा तो खतरा पैदा हो सकता है। मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन व तर्कों को सुनने के बाद हाईकोर्ट के माननीय जज पुरूषेंद्र कुमार कौरव व शील नागू ने निर्णय सुनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के तर्क सही व प्रमाणित हैं, ऐसे में राज्य सरकार पर विद्वान न्यायधीश ने 10 हजार का जुर्माना लगाया है। जुर्माने की राशि 30 दिवस के भीतर जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं।

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