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शिव को समर्पित है श्रावण

आ षाढ़ पूर्णिमा के समाप्त होते ही 25 जुलाई से श्रावण कृष्णपक्ष का प्रवेश होगा। इस वर्ष 4 सोमवारों से सुसज्जित श्रावण मास 29 दिवसीय होगा। पुराणों में 4 माह का विशेष महत्व बताया गया है। यह माह क्रमश: कार्तिक, माघ ,वैशाख और सावन हैं। मान्यता है कि जब जगत नियंत्रा भगवान विष्णु शयन हेतु राजा बलि के लोक, पाताल में गमन करते हैं तब जगत के पोषण की जिम्मेदारी भगवान शिव पर आती है, और यही से प्रारंभ होता है श्रावण मास। पौराणिक मान्यताएं भी है कि श्रावण मास के दौरान भगवान शिव कैलाश पर्वत से आकर पृथ्वी पर विचरण करते हैं। श्रावणमास लगते ही कांवरियों की कांवर यात्रा प्रारंभ हो जाएगी साथ ही शुरू हो जाएंगे भोलेनाथ के भक्तों द्वारा उन्हें रिझाने के जतन। श्रावण मास में शिव अभिषेक तथा पार्थिव शिवलिंग पूजन का विशेष महत्व माना गया है। पौराणिक मान्यताएं हैं कि इनमें से कोई भी एक कृत्य श्रावण मास में संपन्न करने से वर्षपर्यंत दुख दारिद्र से छुटकारा प्राप्त होता है।

इस वर्ष सावन माह का आरम्भ 25 जुलाई से होगा। श्रावण मास 29 दिनों का रहकर 22 अगस्त 2021 श्रावण पूर्णिमा रक्षाबंधन के दिन समाप्त होगा। इस वर्ष के श्रावण मास की विशेषता है कि यह रविवार से प्रारंभ होकर रविवार के दिन ही समाप्त होगा। आम तौर पर श्रावण मास में चार सोमवार का सन्योग बनता रहा है। वर्ष 2017 के श्रावण मास में पांच सोमवारों का संयोग बना था।

इस बार सावन में होंगे चार सोमवार

पहला सोमवार: 26 जुलाई को श्रावण मास का पहला सोमवार है। इस दिन धन प्रदाता धनिष्ठा नक्षत्र, सौभाग्य के बाद शोभन योग, वरियानऔर महाशुभ नामक औदायिक योग है। इस दिन के व्रत से आर्थिक लाभ और दरिद्रता का शमन होगा।

दूसरा सोमवार: 2 अगस्त को श्रावण मास का दूसरा सोमवार है। इस दिन कृतिका के बाद रोहिणी नक्षत्र, वृद्धि योग, गर करण और सुस्थिर नामक औदायिक योग है। चंद्रमा उच्चाभिलाषी है। इस दिन के व्रत से स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति एवं संतान पक्ष के अभ्युदय का योग मिलेगा।

तीसरा सोमवार: 9 अगस्त को श्रावण मास का तीसरा सोमवार है। इस दिन श्लेषा के बाद मघा नक्षत्र, वरियान योग, किंस्तुघ्न करण और औदायिक योग सौम्य का मान है। इस दिन के व्रत से पुण्य की अभिवृद्धि और पूर्वाजित पापों का क्षय होगा।

चौथा सोमवार: 16 अगस्त को श्रावण मास का चौथा सोमवार है। इस दिन अनुराधा नक्षत्र, ब्रह्म योग, वरियान और मानस नाम का औदायिक योग है। इस दिन के व्रत से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। साथ ही मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होगा

हुड़दंग न्यूज

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