इन्दौर

Success Story: इंदौर के मूसाखेड़ी की सड़क पर सब्जी बेचने वाली बेटी बनी न्यायाधीश

Success Story:   इंदौर : संघर्ष की भट्टी में तपकर इंदौर की बेटी अंकिता नागर (Ankita Nagar) ने कमाल किया है। अंकिता इंदौर (Indore) में अपने माता-पिता के साथ सब्जी बेचती है।

इससे वक्त मिलते ही वह पढ़ाई में लग जाती थी। सिविल जज में चयन होने के बाद भी अंकिता अपनी दुकान पर पहुंचकर सब्जी बेच रही थी। अंकिता की सफलता पर उसके पूरे परिवार को गर्व है।

सिविल जज बनी अंकिता (Ankita Civil Judge) को तीसरी कोशिश में यह सफलता हाथ लगी है। एलएलबी की पढ़ाई के दौरान ही वह सिविल जज की तैयारी में जुट गई थी। माता-पिता ने भी अपनी आर्थिक स्थिति को इसकी पढ़ाई में कभी आड़े नहीं आने दिया।

29 वर्षीय अंकिता जज बनने की अपनी कहानी सुनाती (Success Story) हैं तो संघर्ष की सफलता से उनका चेहरा खिल उठता है। अब वह ‘न्यायाधीश’ हो गए हैं। अंकिता ने कहा, मेरे माता-पिता सब्जी बेचकर परिवार चलाते हैं। शाम को जब दुकानदारों की भीड़ होती है तो मैं भी सब्जी के ठेले में उनकी मदद के लिए पहुंच जाती हूं। यह हमारी दिनचर्या है।

पिता अशोक नागर सुबह पांच बजे उठकर सब्जी लेने बाजार जाते थे। चाहे तेज बारिश हो या ठंड, वे घर से निकल जाते थे। वहीं मेरी मां लक्ष्मी सुबह  उठकर घर का काम करने लगती थीं क्योंकि बाद में उन्हें अपने पिता को सब्जी बेचने में मदद करनी पड़ती थी. मेरे माता-पिता खासकर मेरी मां चाहते थे कि मैं पढ़ूं और आगे बढ़ूं।

दो प्रयास विफल (Success Story)

यह पूछे जाने पर कि जज बनने तक का सफर कैसा रहा, अंकिता ने कहा, ‘मैं दो बार फेल हो चुकी हूं। सभी ने सोचा कि मैं जज नहीं बन सकती , लेकिन मैं हार नहीं मानना ​​चाहती थी अंतत: तीसरी बार सफलता मिली। 29 अप्रैल को रिजल्ट आया और उसके बाद उसने सबसे पहले मां को गले लगाया और बधाई दी और कहा कि मां मैं जज बन गई हूं. वह मेरे जीवन का सबसे खुशी का पल था।

 Success Story

वहीं, अंकिता ने अपने सपने को पूरा करने के लिए शादी तक नहीं की है। उसके बड़े भाई और छोटी बहन की शादी हो चुकी है। अंकिता बताती है कि मैं निष्पक्ष निडर होकर अब आम जनता की मदद करूंगी और उन्हें न्याय दिलाऊंगी।

अंकिता उन बच्चों के लिए भी एक प्रेरणा है जो कड़ी मेहनत के बाद भी कई बार परिश्रम करते हुए परीक्षा में फेल हो जाते हैं। साथ ही गलत कदम उठा लेते हैं। अंकिता भी कई बार असफल रही लेकिन लक्ष्य से डिगी नहीं। मजबूत आत्मविश्वास ने उसे सफल बनाया है।

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Success Story:   इंदौर : संघर्ष की भट्टी में तपकर इंदौर की बेटी अंकिता नागर (Ankita Nagar) ने कमाल किया है। अंकिता इंदौर (Indore) में अपने माता-पिता के साथ सब्जी बेचती है।

इससे वक्त मिलते ही वह पढ़ाई में लग जाती थी। सिविल जज में चयन होने के बाद भी अंकिता अपनी दुकान पर पहुंचकर सब्जी बेच रही थी। अंकिता की सफलता पर उसके पूरे परिवार को गर्व है।

सिविल जज बनी अंकिता (Ankita Civil Judge) को तीसरी कोशिश में यह सफलता हाथ लगी है। एलएलबी की पढ़ाई के दौरान ही वह सिविल जज की तैयारी में जुट गई थी। माता-पिता ने भी अपनी आर्थिक स्थिति को इसकी पढ़ाई में कभी आड़े नहीं आने दिया।

29 वर्षीय अंकिता जज बनने की अपनी कहानी सुनाती (Success Story) हैं तो संघर्ष की सफलता से उनका चेहरा खिल उठता है। अब वह ‘न्यायाधीश’ हो गए हैं। अंकिता ने कहा, मेरे माता-पिता सब्जी बेचकर परिवार चलाते हैं। शाम को जब दुकानदारों की भीड़ होती है तो मैं भी सब्जी के ठेले में उनकी मदद के लिए पहुंच जाती हूं। यह हमारी दिनचर्या है।

पिता अशोक नागर सुबह पांच बजे उठकर सब्जी लेने बाजार जाते थे। चाहे तेज बारिश हो या ठंड, वे घर से निकल जाते थे। वहीं मेरी मां लक्ष्मी सुबह  उठकर घर का काम करने लगती थीं क्योंकि बाद में उन्हें अपने पिता को सब्जी बेचने में मदद करनी पड़ती थी. मेरे माता-पिता खासकर मेरी मां चाहते थे कि मैं पढ़ूं और आगे बढ़ूं।

दो प्रयास विफल (Success Story)

यह पूछे जाने पर कि जज बनने तक का सफर कैसा रहा, अंकिता ने कहा, ‘मैं दो बार फेल हो चुकी हूं। सभी ने सोचा कि मैं जज नहीं बन सकती , लेकिन मैं हार नहीं मानना ​​चाहती थी अंतत: तीसरी बार सफलता मिली। 29 अप्रैल को रिजल्ट आया और उसके बाद उसने सबसे पहले मां को गले लगाया और बधाई दी और कहा कि मां मैं जज बन गई हूं. वह मेरे जीवन का सबसे खुशी का पल था।

 Success Story

वहीं, अंकिता ने अपने सपने को पूरा करने के लिए शादी तक नहीं की है। उसके बड़े भाई और छोटी बहन की शादी हो चुकी है। अंकिता बताती है कि मैं निष्पक्ष निडर होकर अब आम जनता की मदद करूंगी और उन्हें न्याय दिलाऊंगी।

अंकिता उन बच्चों के लिए भी एक प्रेरणा है जो कड़ी मेहनत के बाद भी कई बार परिश्रम करते हुए परीक्षा में फेल हो जाते हैं। साथ ही गलत कदम उठा लेते हैं। अंकिता भी कई बार असफल रही लेकिन लक्ष्य से डिगी नहीं। मजबूत आत्मविश्वास ने उसे सफल बनाया है।

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