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NCL की मदद से IIT – BHU के संतो ने कर दिया कमाल

NCL की मदद से IIT – BHU के संतो ने कर दिया कमाल  – जिस प्रकार आवश्यकता आविष्कार की जननी होती है, उसी प्रकार तकनीकि मुश्किलों को आसान बनाती है। आज कल NCL  भी तकनीकि के रथ पर सवार होकर अपनी तमाम समस्याओं का निदान कर रहा है।

इसमें NCL  -आईआईटी बीएचयू का संयोग भी योगदान दे रहा है। आईआईटी बीएचयू के आईआईटियन आज कई समस्याओं का समाधान कर रहे हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र, कृषि, पशुपालन, रोजगार, शिक्षा आदि के क्षेत्र में नई तकनीकि से ग्रामीणों को अवगत करा रहे हैं।

हालत यह है कि NCL  की बड़ी-बड़ी दैत्याकार मशीनें पूर्जों के अभाव में बंद हो जाती हैं, तो आईआईटियन्स की यह टीम उनके लिये उतने ही कारगर पुर्जे भी तैयार कर दे रही है। जिसका फायदा यह होता है कि NCL  की उत्पादन क्षमता कम समय के लिये प्रभावित होती है।

कोयले के उत्पादन का सिलसिला बरकरार रहता है और हर साल NCL  अपने लक्ष्य को प्राप्त करता है, उससे भी अधिक कोयले का उत्पादन और डिस्पैच करता है। यदि इसी प्रकार NCL को आईआईटियन्स का सहयोग मिलता रहा तो अच्छे दिन जरूर आयेंगे।

थ्रीडी प्रिंटर का है कमाल

आईआईटियन्स ग्रुप के मुखिया प्रदीप कुमार ने बताया कि -उन्होंने स्वयं एक थ्रीडी प्रिंटर तैयार किया है। जिसकी लागत मात्र 5 लाख के करीब है। जबकि बाजार में इसकी कीमत 15 लाख के करीब है।

इस थ्रीडी प्रिंटर की भी तरह के पुर्जे की साइज और डिजाइन डाल दी जाये तो यह कुछ देर में वह पुर्जा तैयार कर देता है। छोटा-बड़ा कैसा भी हो यह प्रिंटर पार्टस को कुछ ही घंटों में तैयार कर देता है। इससे फ्लावर पॉटस जैसी अन्य घरेलू चीजें भी बनाई जा सकती हैं। श्री कुमार ने बताया कि आने वाले दिनों में थ्रीडी तकनीकि से घरों का निर्माण भी किया जायेगा।।

क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

प्रदीप ने बताया कि NCL  में भारी भरकम मशीनें रातदिन काम करती हैं, तब जाकर जरूरत भर का कोयला निकल पाता है। इनमें यदि एक भी मशीन किसी पुर्जे के खराब हो जाने से खड़ी हो जाती है तो लाखों रूपये का नुकसान होता है।

इसीलिये तत्काल पुर्जों के निर्माण के लिये थ्रीडी प्रिंटर का निर्माण किया है। यह प्रिंटर सिर्फ पुर्जों का निर्माण ही नहीं करता बल्कि भवन निर्माण तकनीकि को भी बेहतर बनाता है। मौजूदा दौर में भवनों का निर्माण इसी तकनीकि से हो रहा है। इससे समय, पैसा दोनो बचता है और मजबूती भी ज्यादा रहती है।

NCL की मदद से IIT - BHU के संतो ने कर दिया कमाल
NCL की मदद से IIT – BHU के संतो ने कर दिया कमाल

क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

प्रदीप ने बताया कि NCL  में भारी भरकम मशीनें रातदिन काम करती हैं, तब जाकर जरूरत भर का कोयला निकल पाता है। इनमें यदि एक भी मशीन किसी पुर्जे के खराब हो जाने से खड़ी हो जाती है तो लाखों रूपये का नुकसान होता है।

इसीलिये तत्काल पुर्जों के निर्माण के लिये थ्रीडी प्रिंटर का निर्माण किया है। यह प्रिंटर सिर्फ पुर्जों का निर्माण ही नहीं करता बल्कि भवन निर्माण तकनीकि को भी बेहतर बनाता है। मौजूदा दौर में भवनों का निर्माण इसी तकनीकि से हो रहा है। इससे समय, पैसा दोनो बचता है और मजबूती भी ज्यादा रहती है।

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