Viral Video : राजस्‍थान में शादी की अनोखी रस्‍म, दूल्‍हे को ‘मां का दूध पिलाना’ क्‍या परंपरा है? वायरल वीडियो पर उठ रहे सवाल

By: शुलेखा साहू

On: Tuesday, December 9, 2025 7:33 AM

Viral Video : राजस्‍थान में शादी की अनोखी रस्‍म, दूल्‍हे को ‘मां का दूध पिलाना’ क्‍या परंपरा है? वायरल वीडियो पर उठ रहे सवाल
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Viral Video :  सोशल मीडिया पर हाल के दिनों में एक ऐसा वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें एक दूल्हा शादी से ठीक पहले भरी सभा में अपनी मां का दूध पीता हुआ दिख रहा है। यह वीडियो एक राजस्‍थानी शादी की ‘दूध पिलाई’ नामक रस्म से जुड़ा है, जिसे इंस्टाग्राम पर कंटेंट क्रिएटर इंद्रा राम चौधरी समेत कई पेजों ने शेयर किया, और फिर देखते ही देखते यह अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर फैल गया।​

क्लिप में मां घोड़ी चढ़ने से पहले बेटे को अपने आँचल/वक्ष के पास ले जाती है और प्रतीकात्मक रूप से स्तनपान करवाने की क्रिया करती है, जिसे स्थानीय लोग आशीर्वाद और संस्कार का हिस्सा मानते हैं। यही दृश्य ऑनलाइन आने के बाद बहुत से यूज़र्स को असहज लगा, तो कई लोगों ने इसे अपनी संस्कृति का ‘भावनात्मक और पवित्र’ पक्ष बताते हुए समर्थन किया।​

Viral Video :  ‘दूध पिलाई’ रस्‍म का प्रतीकात्मक अर्थ

राजस्‍थान के कुछ इलाकों, खासकर भीलवाड़ा के बिजौलिया और आसपास के ग्रामीण समुदायों में यह रस्‍म सदियों से प्रचलित बताई जाती है। इस रिवाज में मां, बेटे की बारात निकलने से ठीक पहले उसके बचपन और अपने ‘मां के दूध के कर्ज’ की याद दिलाने के लिए प्रतीकात्मक रूप से दूध पिलाने की क्रिया करती है।​

लोक मान्यता के अनुसार, यह रस्म तीन संदेश देती है – पहला, अब बेटा बचपन से निकलकर गृहस्थ जीवन में प्रवेश कर रहा है; दूसरा, उसे मां के दूध की लाज रखते हुए जीवन भर उसके सम्मान और मूल्यों की रक्षा करनी है; और तीसरा, शादी के बाद भी पत्नी के आने से मां का स्थान कम नहीं होगा। कई परिवारों में यह पूरा क्रिया-कलाप घोड़ी चढ़ने या बारात रवाना होने से पहले, रिश्तेदारों की मौजूदगी में किया जाता है।​

Viral Video :  क्या वास्तव में स्तनपान होता है?

कई स्थानीय जानकार और रिपोर्टें साफ कहती हैं कि अधिकतर मामलों में यह रस्म पूरी तरह प्रतीकात्मक होती है, यानी वास्तविक स्तनपान नहीं होता, बल्कि सिर को वक्ष के पास झुकाने, आँचल के नीचे लेने या हल्के स्पर्श के रूप में निभाई जाती है।​

कुछ पुराने वीडियो और इंटरनेट पर फैली क्लिप्स को देखकर लोगों में धारणा बनी कि यह हमेशा वास्तविक स्तनपान ही होता है, जबकि सांस्कृतिक लेख और स्थानीय लोगों के बयान बताते हैं कि समय के साथ रस्‍म का तौर-तरीका भी बदला है और अब कई जगह इसे सिर्फ ‘आशीर्वाद की सांकेतिक क्रिया’ के रूप में निभाया जाता है।​

Viral Video :  अन्य राज्यों की मिलती-जुलती परंपराएं

शादी के पहले या बारात से पहले मां द्वारा बेटे को दूध पिलाने या दूध से जुड़ा अनुष्ठान केवल राजस्‍थान तक सीमित नहीं है। रिपोर्टों में उल्लेख है कि उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा और कुछ अन्य क्षेत्रों में भी दूल्हे को घर से रवाना होने से पहले गिलास से दूध पिलाने या उसके हाथ में दूध का गिलास देकर ‘आशीर्वाद’ देने की रस्म होती है।​

Viral Video : राजस्‍थान में शादी की अनोखी रस्‍म, दूल्‍हे को ‘मां का दूध पिलाना’ क्‍या परंपरा है? वायरल वीडियो पर उठ रहे सवाल
Viral Video : राजस्‍थान में शादी की अनोखी रस्‍म, दूल्‍हे को ‘मां का दूध पिलाना’ क्‍या परंपरा है? वायरल वीडियो पर उठ रहे सवाल

इन जगहों पर भी इसका अर्थ यह माना जाता है कि मां बेटे को भावनात्मक विदाई दे रही है, उसे जिम्मेदारी का बोध करा रही है और यह संकेत दे रही है कि अब वह किसी और घर का घर-वर बनने जा रहा है। कई जनजातीय समुदायों में विवाह, मातृत्व और संतान संबंधों से जुड़े अलग-अलग प्रतीकात्मक अनुष्ठान प्रचलित हैं, जिनकी व्यापक जानकारी आमतौर पर इंटरनेट पर उपलब्ध नहीं होती और ज्यादातर मौखिक परंपरा के रूप में ही आगे बढ़ती है।​

Viral Video :  सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया

वायरल वीडियो के सामने आते ही सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई। एक वर्ग का कहना है कि ऐसे निजी और अत्यंत भावनात्मक संस्कारों को सार्वजनिक मंच पर इस तरह दिखाना, क्लोज़-अप एंगल में शूट करना और ‘वायरल कंटेंट’ की तरह परोसना, परंपरा की गरिमा और मां-बेटे के पवित्र रिश्ते का अनादर है।​

दूसरी ओर, कई यूज़र्स और स्थानीय लोग इसे अपनी संस्कृति की खूबसूरत विरासत बताते हैं और तर्क देते हैं कि वीडियो को संदर्भ से काटकर पेश करने से गलतफहमी पैदा होती है। उनका मानना है कि जो लोग इस रस्‍म के पीछे की संवेदना – त्याग, ममता और जिम्मेदारी का संदेश – नहीं समझते, वे इसे केवल ‘अजीब’ या ‘आपत्तिजनक’ कहकर आसानी से खारिज कर देते हैं।​

Viral Video :  परंपरा, निजता और संवेदनशीलता

विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत जैसे विविधताओं वाले देश में अनगिनत ऐसी प्रथाएं हैं, जिनकी जड़ें लोकसंस्कृति में हैं और जिनका अर्थ सतही तौर पर देखकर समझा नहीं जा सकता। समस्या तब पैदा होती है, जब बेहद निजी या प्रतीकात्मक संस्कारों को कैमरे के लिए ‘एक्सपोज़’ कर दिया जाता है और क्लिप्स बिना संदर्भ के दुनियाभर में घूमने लगती हैं, जहां दर्शक न तो भाषा जानते हैं न पृष्ठभूमि।​

इसीलिए कई समाजशास्त्री और कंटेंट क्रिएटर्स सुझाव दे रहे हैं कि यदि किसी सांस्कृतिक रस्म को ऑनलाइन दिखाया भी जाए, तो उसके साथ स्पष्ट व्याख्या, संदर्भ और सहमति (कंसेंट) का पूरा ध्यान रखा जाए। वरना इसे लेकर गलत धारणाएं, अशोभनीय कमेंट्स और संस्कृतियों के बीच अनावश्यक टकराव बढ़ सकता है, जबकि मूल भाव अक्सर प्रेम, कृतज्ञता और विदाई की करुणा का ही होता है।​

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क्लिप में मां घोड़ी चढ़ने से पहले बेटे को अपने आँचल/वक्ष के पास ले जाती है और प्रतीकात्मक रूप से स्तनपान करवाने की क्रिया करती है, जिसे स्थानीय लोग आशीर्वाद और संस्कार का हिस्सा मानते हैं। यही दृश्य ऑनलाइन आने के बाद बहुत से यूज़र्स को असहज लगा, तो कई लोगों ने इसे अपनी संस्कृति का ‘भावनात्मक और पवित्र’ पक्ष बताते हुए समर्थन किया।​

Viral Video :  ‘दूध पिलाई’ रस्‍म का प्रतीकात्मक अर्थ

राजस्‍थान के कुछ इलाकों, खासकर भीलवाड़ा के बिजौलिया और आसपास के ग्रामीण समुदायों में यह रस्‍म सदियों से प्रचलित बताई जाती है। इस रिवाज में मां, बेटे की बारात निकलने से ठीक पहले उसके बचपन और अपने ‘मां के दूध के कर्ज’ की याद दिलाने के लिए प्रतीकात्मक रूप से दूध पिलाने की क्रिया करती है।​

लोक मान्यता के अनुसार, यह रस्म तीन संदेश देती है – पहला, अब बेटा बचपन से निकलकर गृहस्थ जीवन में प्रवेश कर रहा है; दूसरा, उसे मां के दूध की लाज रखते हुए जीवन भर उसके सम्मान और मूल्यों की रक्षा करनी है; और तीसरा, शादी के बाद भी पत्नी के आने से मां का स्थान कम नहीं होगा। कई परिवारों में यह पूरा क्रिया-कलाप घोड़ी चढ़ने या बारात रवाना होने से पहले, रिश्तेदारों की मौजूदगी में किया जाता है।​

Viral Video :  क्या वास्तव में स्तनपान होता है?

कई स्थानीय जानकार और रिपोर्टें साफ कहती हैं कि अधिकतर मामलों में यह रस्म पूरी तरह प्रतीकात्मक होती है, यानी वास्तविक स्तनपान नहीं होता, बल्कि सिर को वक्ष के पास झुकाने, आँचल के नीचे लेने या हल्के स्पर्श के रूप में निभाई जाती है।​

कुछ पुराने वीडियो और इंटरनेट पर फैली क्लिप्स को देखकर लोगों में धारणा बनी कि यह हमेशा वास्तविक स्तनपान ही होता है, जबकि सांस्कृतिक लेख और स्थानीय लोगों के बयान बताते हैं कि समय के साथ रस्‍म का तौर-तरीका भी बदला है और अब कई जगह इसे सिर्फ ‘आशीर्वाद की सांकेतिक क्रिया’ के रूप में निभाया जाता है।​

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शादी के पहले या बारात से पहले मां द्वारा बेटे को दूध पिलाने या दूध से जुड़ा अनुष्ठान केवल राजस्‍थान तक सीमित नहीं है। रिपोर्टों में उल्लेख है कि उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा और कुछ अन्य क्षेत्रों में भी दूल्हे को घर से रवाना होने से पहले गिलास से दूध पिलाने या उसके हाथ में दूध का गिलास देकर ‘आशीर्वाद’ देने की रस्म होती है।​

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इन जगहों पर भी इसका अर्थ यह माना जाता है कि मां बेटे को भावनात्मक विदाई दे रही है, उसे जिम्मेदारी का बोध करा रही है और यह संकेत दे रही है कि अब वह किसी और घर का घर-वर बनने जा रहा है। कई जनजातीय समुदायों में विवाह, मातृत्व और संतान संबंधों से जुड़े अलग-अलग प्रतीकात्मक अनुष्ठान प्रचलित हैं, जिनकी व्यापक जानकारी आमतौर पर इंटरनेट पर उपलब्ध नहीं होती और ज्यादातर मौखिक परंपरा के रूप में ही आगे बढ़ती है।​

Viral Video :  सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया

वायरल वीडियो के सामने आते ही सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई। एक वर्ग का कहना है कि ऐसे निजी और अत्यंत भावनात्मक संस्कारों को सार्वजनिक मंच पर इस तरह दिखाना, क्लोज़-अप एंगल में शूट करना और ‘वायरल कंटेंट’ की तरह परोसना, परंपरा की गरिमा और मां-बेटे के पवित्र रिश्ते का अनादर है।​

दूसरी ओर, कई यूज़र्स और स्थानीय लोग इसे अपनी संस्कृति की खूबसूरत विरासत बताते हैं और तर्क देते हैं कि वीडियो को संदर्भ से काटकर पेश करने से गलतफहमी पैदा होती है। उनका मानना है कि जो लोग इस रस्‍म के पीछे की संवेदना – त्याग, ममता और जिम्मेदारी का संदेश – नहीं समझते, वे इसे केवल ‘अजीब’ या ‘आपत्तिजनक’ कहकर आसानी से खारिज कर देते हैं।​

Viral Video :  परंपरा, निजता और संवेदनशीलता

विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत जैसे विविधताओं वाले देश में अनगिनत ऐसी प्रथाएं हैं, जिनकी जड़ें लोकसंस्कृति में हैं और जिनका अर्थ सतही तौर पर देखकर समझा नहीं जा सकता। समस्या तब पैदा होती है, जब बेहद निजी या प्रतीकात्मक संस्कारों को कैमरे के लिए ‘एक्सपोज़’ कर दिया जाता है और क्लिप्स बिना संदर्भ के दुनियाभर में घूमने लगती हैं, जहां दर्शक न तो भाषा जानते हैं न पृष्ठभूमि।​

इसीलिए कई समाजशास्त्री और कंटेंट क्रिएटर्स सुझाव दे रहे हैं कि यदि किसी सांस्कृतिक रस्म को ऑनलाइन दिखाया भी जाए, तो उसके साथ स्पष्ट व्याख्या, संदर्भ और सहमति (कंसेंट) का पूरा ध्यान रखा जाए। वरना इसे लेकर गलत धारणाएं, अशोभनीय कमेंट्स और संस्कृतियों के बीच अनावश्यक टकराव बढ़ सकता है, जबकि मूल भाव अक्सर प्रेम, कृतज्ञता और विदाई की करुणा का ही होता है।​

Viral Video : राजस्‍थान में शादी की अनोखी रस्‍म, दूल्‍हे को ‘मां का दूध पिलाना’ क्‍या परंपरा है? वायरल वीडियो पर उठ रहे सवाल
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क्लिप में मां घोड़ी चढ़ने से पहले बेटे को अपने आँचल/वक्ष के पास ले जाती है और प्रतीकात्मक रूप से स्तनपान करवाने की क्रिया करती है, जिसे स्थानीय लोग आशीर्वाद और संस्कार का हिस्सा मानते हैं। यही दृश्य ऑनलाइन आने के बाद बहुत से यूज़र्स को असहज लगा, तो कई लोगों ने इसे अपनी संस्कृति का ‘भावनात्मक और पवित्र’ पक्ष बताते हुए समर्थन किया।​

Viral Video :  ‘दूध पिलाई’ रस्‍म का प्रतीकात्मक अर्थ

राजस्‍थान के कुछ इलाकों, खासकर भीलवाड़ा के बिजौलिया और आसपास के ग्रामीण समुदायों में यह रस्‍म सदियों से प्रचलित बताई जाती है। इस रिवाज में मां, बेटे की बारात निकलने से ठीक पहले उसके बचपन और अपने ‘मां के दूध के कर्ज’ की याद दिलाने के लिए प्रतीकात्मक रूप से दूध पिलाने की क्रिया करती है।​

लोक मान्यता के अनुसार, यह रस्म तीन संदेश देती है – पहला, अब बेटा बचपन से निकलकर गृहस्थ जीवन में प्रवेश कर रहा है; दूसरा, उसे मां के दूध की लाज रखते हुए जीवन भर उसके सम्मान और मूल्यों की रक्षा करनी है; और तीसरा, शादी के बाद भी पत्नी के आने से मां का स्थान कम नहीं होगा। कई परिवारों में यह पूरा क्रिया-कलाप घोड़ी चढ़ने या बारात रवाना होने से पहले, रिश्तेदारों की मौजूदगी में किया जाता है।​

Viral Video :  क्या वास्तव में स्तनपान होता है?

कई स्थानीय जानकार और रिपोर्टें साफ कहती हैं कि अधिकतर मामलों में यह रस्म पूरी तरह प्रतीकात्मक होती है, यानी वास्तविक स्तनपान नहीं होता, बल्कि सिर को वक्ष के पास झुकाने, आँचल के नीचे लेने या हल्के स्पर्श के रूप में निभाई जाती है।​

कुछ पुराने वीडियो और इंटरनेट पर फैली क्लिप्स को देखकर लोगों में धारणा बनी कि यह हमेशा वास्तविक स्तनपान ही होता है, जबकि सांस्कृतिक लेख और स्थानीय लोगों के बयान बताते हैं कि समय के साथ रस्‍म का तौर-तरीका भी बदला है और अब कई जगह इसे सिर्फ ‘आशीर्वाद की सांकेतिक क्रिया’ के रूप में निभाया जाता है।​

Viral Video :  अन्य राज्यों की मिलती-जुलती परंपराएं

शादी के पहले या बारात से पहले मां द्वारा बेटे को दूध पिलाने या दूध से जुड़ा अनुष्ठान केवल राजस्‍थान तक सीमित नहीं है। रिपोर्टों में उल्लेख है कि उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा और कुछ अन्य क्षेत्रों में भी दूल्हे को घर से रवाना होने से पहले गिलास से दूध पिलाने या उसके हाथ में दूध का गिलास देकर ‘आशीर्वाद’ देने की रस्म होती है।​

Viral Video : राजस्‍थान में शादी की अनोखी रस्‍म, दूल्‍हे को ‘मां का दूध पिलाना’ क्‍या परंपरा है? वायरल वीडियो पर उठ रहे सवाल
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इन जगहों पर भी इसका अर्थ यह माना जाता है कि मां बेटे को भावनात्मक विदाई दे रही है, उसे जिम्मेदारी का बोध करा रही है और यह संकेत दे रही है कि अब वह किसी और घर का घर-वर बनने जा रहा है। कई जनजातीय समुदायों में विवाह, मातृत्व और संतान संबंधों से जुड़े अलग-अलग प्रतीकात्मक अनुष्ठान प्रचलित हैं, जिनकी व्यापक जानकारी आमतौर पर इंटरनेट पर उपलब्ध नहीं होती और ज्यादातर मौखिक परंपरा के रूप में ही आगे बढ़ती है।​

Viral Video :  सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया

वायरल वीडियो के सामने आते ही सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई। एक वर्ग का कहना है कि ऐसे निजी और अत्यंत भावनात्मक संस्कारों को सार्वजनिक मंच पर इस तरह दिखाना, क्लोज़-अप एंगल में शूट करना और ‘वायरल कंटेंट’ की तरह परोसना, परंपरा की गरिमा और मां-बेटे के पवित्र रिश्ते का अनादर है।​

दूसरी ओर, कई यूज़र्स और स्थानीय लोग इसे अपनी संस्कृति की खूबसूरत विरासत बताते हैं और तर्क देते हैं कि वीडियो को संदर्भ से काटकर पेश करने से गलतफहमी पैदा होती है। उनका मानना है कि जो लोग इस रस्‍म के पीछे की संवेदना – त्याग, ममता और जिम्मेदारी का संदेश – नहीं समझते, वे इसे केवल ‘अजीब’ या ‘आपत्तिजनक’ कहकर आसानी से खारिज कर देते हैं।​

Viral Video :  परंपरा, निजता और संवेदनशीलता

विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत जैसे विविधताओं वाले देश में अनगिनत ऐसी प्रथाएं हैं, जिनकी जड़ें लोकसंस्कृति में हैं और जिनका अर्थ सतही तौर पर देखकर समझा नहीं जा सकता। समस्या तब पैदा होती है, जब बेहद निजी या प्रतीकात्मक संस्कारों को कैमरे के लिए ‘एक्सपोज़’ कर दिया जाता है और क्लिप्स बिना संदर्भ के दुनियाभर में घूमने लगती हैं, जहां दर्शक न तो भाषा जानते हैं न पृष्ठभूमि।​

इसीलिए कई समाजशास्त्री और कंटेंट क्रिएटर्स सुझाव दे रहे हैं कि यदि किसी सांस्कृतिक रस्म को ऑनलाइन दिखाया भी जाए, तो उसके साथ स्पष्ट व्याख्या, संदर्भ और सहमति (कंसेंट) का पूरा ध्यान रखा जाए। वरना इसे लेकर गलत धारणाएं, अशोभनीय कमेंट्स और संस्कृतियों के बीच अनावश्यक टकराव बढ़ सकता है, जबकि मूल भाव अक्सर प्रेम, कृतज्ञता और विदाई की करुणा का ही होता है।​

Viral Video : राजस्‍थान में शादी की अनोखी रस्‍म, दूल्‍हे को ‘मां का दूध पिलाना’ क्‍या परंपरा है? वायरल वीडियो पर उठ रहे सवाल
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क्लिप में मां घोड़ी चढ़ने से पहले बेटे को अपने आँचल/वक्ष के पास ले जाती है और प्रतीकात्मक रूप से स्तनपान करवाने की क्रिया करती है, जिसे स्थानीय लोग आशीर्वाद और संस्कार का हिस्सा मानते हैं। यही दृश्य ऑनलाइन आने के बाद बहुत से यूज़र्स को असहज लगा, तो कई लोगों ने इसे अपनी संस्कृति का ‘भावनात्मक और पवित्र’ पक्ष बताते हुए समर्थन किया।​

Viral Video :  ‘दूध पिलाई’ रस्‍म का प्रतीकात्मक अर्थ

राजस्‍थान के कुछ इलाकों, खासकर भीलवाड़ा के बिजौलिया और आसपास के ग्रामीण समुदायों में यह रस्‍म सदियों से प्रचलित बताई जाती है। इस रिवाज में मां, बेटे की बारात निकलने से ठीक पहले उसके बचपन और अपने ‘मां के दूध के कर्ज’ की याद दिलाने के लिए प्रतीकात्मक रूप से दूध पिलाने की क्रिया करती है।​

लोक मान्यता के अनुसार, यह रस्म तीन संदेश देती है – पहला, अब बेटा बचपन से निकलकर गृहस्थ जीवन में प्रवेश कर रहा है; दूसरा, उसे मां के दूध की लाज रखते हुए जीवन भर उसके सम्मान और मूल्यों की रक्षा करनी है; और तीसरा, शादी के बाद भी पत्नी के आने से मां का स्थान कम नहीं होगा। कई परिवारों में यह पूरा क्रिया-कलाप घोड़ी चढ़ने या बारात रवाना होने से पहले, रिश्तेदारों की मौजूदगी में किया जाता है।​

Viral Video :  क्या वास्तव में स्तनपान होता है?

कई स्थानीय जानकार और रिपोर्टें साफ कहती हैं कि अधिकतर मामलों में यह रस्म पूरी तरह प्रतीकात्मक होती है, यानी वास्तविक स्तनपान नहीं होता, बल्कि सिर को वक्ष के पास झुकाने, आँचल के नीचे लेने या हल्के स्पर्श के रूप में निभाई जाती है।​

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शादी के पहले या बारात से पहले मां द्वारा बेटे को दूध पिलाने या दूध से जुड़ा अनुष्ठान केवल राजस्‍थान तक सीमित नहीं है। रिपोर्टों में उल्लेख है कि उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा और कुछ अन्य क्षेत्रों में भी दूल्हे को घर से रवाना होने से पहले गिलास से दूध पिलाने या उसके हाथ में दूध का गिलास देकर ‘आशीर्वाद’ देने की रस्म होती है।​

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शुलेखा साहू

मैं एक स्वतंत्र लेखक और पत्रकार हूँ, जो समाज, राजनीति, शिक्षा और तकनीक से जुड़े मुद्दों पर गहराई से लिखती हूँ। आसान भाषा में जटिल विषयों को पाठकों तक पहुँचाना Hurdang News के मंच से मेरा प्रयास है कि पाठकों तक निष्पक्ष, स्पष्ट और प्रभावशाली जानकारी पहुँच सके।
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