प्रयागराज – माघ मेला में संगम तट पर पांच करोड़ 51 लाख रुद्राक्षों से निर्मित दिव्य ज्योतिर्लिंग की भव्य स्थापना की गई है। इस 11 फीट ऊंचे, 7 फीट मोटे और 9 फीट चौड़े शिवलिंग का निर्माण एकादश रुद्र, सात पुष्टियों और नौधा भक्ति के प्रतीक के रूप में किया गया है।
अभय चैतन्य ब्रह्मचारी मौनी बाबा ने बताया कि महाकुंभ के बाद शुरू हुए माघ मेले के दौरान सारे देवता धरती पर विराजमान हैं, इसलिए भगवान शिव से विशेष प्रार्थना की जा रही है। बाबा के मुताबिक रामायण की कथा से प्रेरित होकर यह स्थापना की गई। जब भगवान राम ने रावण पर विजय से पूर्व शिवलिंग की पूजा की थी। जिसका मुख्य उद्देश्य भगवान शिव की कृपा से राष्ट्रीय और वैश्विक समस्याओं का समाधान करना है।
पांच प्रमुख संकल्पों में काशी- मथुरा मंदिर निर्माण, आतंकवाद उन्मूलन, बांग्लादेशी हिंदुओं की सुरक्षा, राष्ट्र की संपन्नता और शिक्षा का प्रसार । इनके लिए नित्य परिक्रमा हवन-पूजन और दीप प्रज्वलन का आयोजन किया जा रहा है। शिवलिंग के चारों ओर 11108 त्रिशूल स्थापित किए गए हैं।
इनमें दक्षिण दिशा में काला त्रिशूल आतंकवाद विनाश के लिए, पूर्व में पीला त्रिशूल राष्ट्र रक्षा, पश्चिम में श्वेत त्रिशूल ज्ञान विद्या और चार विशेष त्रिशूल मंगल श्री, अनुग्रह, कृपा शामिल हैं। इसके अलावा, ब्रह्मा इंद्र के 27 ध्वज 27 नक्षत्रों के लिए, भगवत ध्वजा ( शक्ति प्रतीक), छह द्वार षड्दर्शन दर्शन से प्रेरित और प्रत्येक पर विजय श्री घंटे लगाए गए हैं। 12 घंटे सूर्य की 12 राशियों के लिए समर्पित हैं। महायज्ञ मकर संक्रांति से महाशिवरात्रि तक चलेगा।
जिसमें 12 करोड़ 51 लाख महामंत्र जप, 1 लाख दीप प्रज्ज्वलन, 101 कंडल आहुति और नित्य काल बेला में महाकाल की महाआरती होगी । आतंकवाद के विनाश के लिए निरंतर अग्नि जल रही है। जहां पांच परिक्रमाओं में विशेष हवन होंगे। इन अनुष्ठानों से माघ स्नान करने वालों आपदाएं नष्ट होंगी और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।








