फरार सीएसपी सहित तीनों आरोपियों के गिरफ्तारी वारंट निरस्त

कटनी। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी मनीषा की अदालत ने कुठला थाना में सीएसपी नेहा पच्चीसिया सहित तीन आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामले में 18 सितंबर को जारी किए गए गिरफ्तारी वारंट तत्काल प्रभाव से निरस्त करने का आदेश जारी किया है। न्यायालय ने निर्देश दिया है कि अदम तामील (बिना तामील हुए) गिरफ्तारी वारंट तत्काल न्यायालय को वापस भेजे जाएं। साथ ही विशेष न्यायाधीश पीसी एक्ट की कोर्ट द्वारा आरोपियों की गिरफ्तारी का आवेदन निरस्त करने की जानकारी छिपाने पर एसआईटी जबलपुर के निरीक्षक चंद्रकांत झा को नोटिस जारी किया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 21 सितंबर को यह आदेश जारी किया है।
Vijay

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Local Desk | Updated: 22 Sep 2026, 05:42 PM IST | 1 min read
फरार सीएसपी सहित तीनों आरोपियों के गिरफ्तारी वारंट निरस्त
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कटनी। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी मनीषा की अदालत ने कुठला थाना में सीएसपी नेहा पच्चीसिया सहित तीन आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामले में 18 सितंबर को जारी किए गए गिरफ्तारी वारंट तत्काल प्रभाव से निरस्त करने का आदेश जारी किया है। न्यायालय ने निर्देश दिया है कि अदम तामील (बिना तामील हुए) गिरफ्तारी वारंट तत्काल न्यायालय को वापस भेजे जाएं। साथ ही विशेष न्यायाधीश पीसी एक्ट की कोर्ट द्वारा आरोपियों की गिरफ्तारी का आवेदन निरस्त करने की जानकारी छिपाने पर एसआईटी जबलपुर के निरीक्षक चंद्रकांत झा को नोटिस जारी किया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 21 सितंबर को यह आदेश जारी किया है।

कुठला थाना में दर्ज है तीनों आरोपी के खिलाफ मामला

कटनी के कुठला थाना में निलंबित एवं फरार घोषित सीएसपी रही नेहा पच्चीसिया पिता अशोक पच्चीसिया, निवासी पंजाब नेशनल बैंक के पास पिछोर जिला राजगढ़, क्षितिजराज बारापात्रे पिता अशोक बारापात्रे, निवासी 184 आरएस नगर हुजूर भोपाल एवं मारूफ अहमद हनफी पिता हाजी महमूद, निवासी कटनी के विरुद्ध बी. एन. एस. की धारा 61, 61 (2), 198, 199 (बी), 308 (7), 318 (4), 316(2), 316 (5) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 (सी), 12, 13 (2) के तहत अपराध क्रमांक 738/2026 दर्ज किया गया है।

इस मामले में आरोपियों के विरुद्ध गैर म्यादी वारंट जारी करने की मांग करते हुए एसआईटी जबलपुर के निरीक्षक चंद्रकांत झा ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी मनीषा (जैन) तिवारी की अदालत में आवेदन लगाया था, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने 18 सितंबर को तीनों आरोपियों के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे।

एसआईटी ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तारी वारंट से तलब किए जाने का आदेश देने के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी मनीषा (जैन) तिवारी की अदालत में आवेदन प्रस्तुत किया था, 18 सितंबर को केस डायरी के अवलोकन के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कोर्ट द्वारा गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए थे। इसके बाद 19 सितंबर को अधिवक्ता कमलेश शुक्ला कोर्ट में उपस्थित होकर कोर्ट को यह सूचित किया कि इस प्रकरण में शासन विरुद्ध नेहा पच्चीसिया आदि के मामले में कार्यवाही विशेष न्यायाधीश पीसी एक्ट के समक्ष प्रचलित है।

विशेष न्यायाधीश के समक्ष एसआईटी जबलपुर द्वारा धारा 72 बीएनएस के अंतर्गत आरोपियों के गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आवेदन दिया गया था जिसे कोर्ट ने निरस्त कर दिया था। इस तथ्य को छिपाते हुए एसआईटी ने इस व्यायालय से गिरफ्तारी वारंट प्राप्त कर लिए हैं। जिस पर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत द्वारा उपरोक्त तथ्य की जांच के लिए अधिवक्ता को निर्देशित किया गया है कि वह इस संबंध में आवेदन पेश करें तथा अपना मेमो अथवा अभिभाषक पत्र न्यायालय में पेश करें, कोर्ट ने आदेशित किया कि सत्यता की जांच हेतु यह भी आवश्यक है कि इस मामले में न्यायालय की डिमांड पत्रावली का अवलोकन किया जाए, न्यायालय को अनुरोध पत्र प्रेषित कर उनकी न्यायालयीन पत्रावली आहूत की जाए।

19 सितंबर को न्यायालयीन समय समाप्त होने तक पत्रावली प्राप्त न होने के बाद प्रकरण में आगामी कार्यवाही के लिए 21 सितंबर की तारीख तय की गई थी। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी मनीषा (जैन) तिवारी की अदालत ने प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत की पत्रावली का अवलोकन किया। जिससे यह तथ्य सामने आया कि उनके न्यायालय में दिनांक 1 सितंबर 2026 को एसआईटी जबलपुर द्वारा वारंट जारी करने का आवेदन किया गया था जिसे कोर्ट ने 2 सितंबर 2026 को निरस्त कर दिया था।

इसके बाद फरियादी की ओर से अभिभाषक ने भी आरोपियों के विरुद्ध वारंट जारी करने का आवेदन पेश किया था। जिसे न्यायालय ने 16 सितंबर 2026 को निरस्त कर दिया था। अपने आदेश में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी मनीषा (जैन) तिवारी की अदालत ने कहा कि उपरोक्त पत्रावली के अवलोकन से यह दर्शित है कि एसआईटी जबलपुर के निरीक्षक ने न्यायालय से उपरोक्त तथ्य छिपाते हुए उनकी अदालत में यह आवेदन दिया कि प्रकरण के वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी के वारंट जारी किए जाएं, जबकि उनसे यह अपेक्षित था कि कोर्ट को मामले की सच्चाई बताते। सत्र न्यायालय के द्वारा आवेदन निरस्त किए जाने के बाद उनकी कोर्ट का क्षेत्राधिकार वारंट जारी करने का नहीं रह गया।

इस प्रकार उनके न्यायालय द्वारा जारी किए गए दिनांक 18 सितंबर 2026 के वारंट क्षेत्राधिकार नहीं होने के कारण उन पर कार्रवाई किए जाने योग्य नहीं है। न्यायालय द्वारा आरोपियों के वारंट तत्काल प्रभाव से निरस्त मानते हुए न्यायालय को लौटाए जाने हेतु एसआईटी जबलपुर को आदेशित किया जाता है। इसके साथ ही एसआईटी जबलपुर के निरीक्षक चंद्रकांत झाको कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है कि उन्होंने किस प्रकार न्यायालय को भ्रमित कर और तथ्य छिपा कर वारंट जारी कराने का कृत्य किया है।

 

 

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