Critical Illness Insurance – क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस गंभीर बीमारियों की स्थिति में एकमुश्त आर्थिक सुरक्षा देने वाला विशेष बीमा कवर होता है, जो आम हेल्थ इंश्योरेंस [ Critical Illness Insurance ] से अलग तरह से काम करता है। यह न सिर्फ इलाज बल्कि आय रुकने की स्थिति में भी परिवार की आर्थिक स्थिति संभालने में मदद कर सकता है।
क्रिटिकल इलनेस क्या कवर करता है
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यह पॉलिसी [ Critical Illness Insurance ] आमतौर पर कैंसर, हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी फेल्योर, मेजर ऑर्गन ट्रांसप्लांट, पैरालिसिस जैसी तय गंभीर बीमारियों पर लागू होती है।
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जैसे ही लिस्टेड बीमारी की पुष्टि (डायग्नोसिस) होती है और पॉलिसी की शर्तें पूरी होती हैं, कंपनी तय रकम (सम इंश्योर्ड) एकमुश्त देती है, भले अस्पताल का बिल कितना भी हो।
यह पॉलिसी कैसे काम करती है
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क्रिटिकल इलनेस [ Critical Illness Insurance ] कवर एक फिक्स्ड बेनिफिट प्लान होता है, यानी यह उपचार के असल खर्च की भरपाई नहीं, बल्कि प्री-फिक्स्ड लंप सम देता है।
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ज्यादातर प्लान में सर्वाइवल पीरियड की शर्त होती है, जिसमें बीमाधारक को बीमारी की डायग्नोसिस के बाद 14 से 30 दिन तक जीवित रहना जरूरी होता है, तभी क्लेम का भुगतान होता है।
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कैंसर, हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारी पर कैसे होता है बीमा, ऐसे काम आएगा Critical Illness Insurance
खास फायदे और टैक्स लाभ
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पॉलिसी [ Critical Illness Insurance ] से मिलने वाली राशि का उपयोग इलाज, घर के खर्च, बच्चों की पढ़ाई, EMI, लोन, केयरटेकर, ट्रैवल आदि किसी भी जरूरत के लिए किया जा सकता है।
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इस पॉलिसी [ Critical Illness Insurance ] पर भरा गया प्रीमियम आयकर अधिनियम की धारा 80D के तहत हेल्थ इंश्योरेंस की तरह टैक्स कटौती के लिए पात्र होता है, जिसकी सीमा सामान्यतः 25,000 से 50,000 रुपये (उम्र के अनुसार) तक हो सकती है।
क्या-क्या नहीं मिलता (Exclusions)
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कई प्लान्स में प्री-एक्सिस्टिंग क्रिटिकल बीमारियां शुरुआती कुछ सालों तक कवर नहीं होतीं या पूरी तरह निष्कासित हो सकती हैं।
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वेटिंग पीरियड के भीतर पता चली गंभीर बीमारी, सर्वाइवल पीरियड से पहले मौत, नशे, आत्म-हानि, युद्ध या हाई-रिस्क एडवेंचर के कारण हुई चोटें आम तौर पर कवर से बाहर रहती हैं।
किन लोगों को खास तौर पर लेना चाहिए
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जिनके परिवार में कैंसर, हार्ट डिजीज या किडनी फेल्योर जैसी बीमारियों का इतिहास है, उनके लिए यह कवर जोखिम कम कर सकता है।
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40 वर्ष से अधिक उम्र के लोग, हाई-स्ट्रेस जॉब करने वाले और घर के एकमात्र कमाने वाले सदस्य के लिए क्रिटिकल इलनेस कवर आय रुकने की स्थिति में फाइनेंशियल सुरक्षा कवच का काम करता है।
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कैंसर, हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारी पर कैसे होता है बीमा, ऐसे काम आएगा Critical Illness Insurance
हेल्थ इंश्योरेंस बनाम क्रिटिकल इलनेस कवर
| आधार | हेल्थ इंश्योरेंस | क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस |
|---|---|---|
| कवरेज | अस्पताल में भर्ती, सर्जरी, OPD आदि के वास्तविक मेडिकल खर्च कवर करता है। | केवल पॉलिसी में सूचीबद्ध गंभीर बीमारियों पर लागू होता है। |
| भुगतान तरीका | बिल के अनुसार रिइम्बर्समेंट या कैशलेस सेटलमेंट, सम इंश्योर्ड तक। | डायग्नोसिस के बाद तय लंप सम राशि, बिल से लिंक नहीं। |
| सर्वाइवल पीरियड | आमतौर पर नहीं होता। | ज्यादातर प्लान में 14–30 दिन का सर्वाइवल पीरियड अनिवार्य। |
| उपयोग | मुख्यतः इलाज और हॉस्पिटल बिल चुकाने के लिए। | इलाज के साथ-साथ घर का खर्च, EMI, आय की भरपाई आदि के लिए भी। |
क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस [ Critical Illness Insurance ] को बेस हेल्थ इंश्योरेंस के साथ मिलाकर लिया जाए, तो गंभीर बीमारी की स्थिति में इलाज से लेकर घर के खर्च तक के लिए मजबूत वित्तीय ढाल तैयार की जा सकती है।

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Critical Illness Insurance – क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस गंभीर बीमारियों की स्थिति में एकमुश्त आर्थिक सुरक्षा देने वाला विशेष बीमा कवर होता है, जो आम हेल्थ इंश्योरेंस [ Critical Illness Insurance ] से अलग तरह से काम करता है। यह न सिर्फ इलाज बल्कि आय रुकने की स्थिति में भी परिवार की आर्थिक स्थिति संभालने में मदद कर सकता है।
क्रिटिकल इलनेस क्या कवर करता है
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यह पॉलिसी [ Critical Illness Insurance ] आमतौर पर कैंसर, हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी फेल्योर, मेजर ऑर्गन ट्रांसप्लांट, पैरालिसिस जैसी तय गंभीर बीमारियों पर लागू होती है।
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जैसे ही लिस्टेड बीमारी की पुष्टि (डायग्नोसिस) होती है और पॉलिसी की शर्तें पूरी होती हैं, कंपनी तय रकम (सम इंश्योर्ड) एकमुश्त देती है, भले अस्पताल का बिल कितना भी हो।
यह पॉलिसी कैसे काम करती है
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क्रिटिकल इलनेस [ Critical Illness Insurance ] कवर एक फिक्स्ड बेनिफिट प्लान होता है, यानी यह उपचार के असल खर्च की भरपाई नहीं, बल्कि प्री-फिक्स्ड लंप सम देता है।
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ज्यादातर प्लान में सर्वाइवल पीरियड की शर्त होती है, जिसमें बीमाधारक को बीमारी की डायग्नोसिस के बाद 14 से 30 दिन तक जीवित रहना जरूरी होता है, तभी क्लेम का भुगतान होता है।
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कैंसर, हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारी पर कैसे होता है बीमा, ऐसे काम आएगा Critical Illness Insurance
खास फायदे और टैक्स लाभ
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पॉलिसी [ Critical Illness Insurance ] से मिलने वाली राशि का उपयोग इलाज, घर के खर्च, बच्चों की पढ़ाई, EMI, लोन, केयरटेकर, ट्रैवल आदि किसी भी जरूरत के लिए किया जा सकता है।
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इस पॉलिसी [ Critical Illness Insurance ] पर भरा गया प्रीमियम आयकर अधिनियम की धारा 80D के तहत हेल्थ इंश्योरेंस की तरह टैक्स कटौती के लिए पात्र होता है, जिसकी सीमा सामान्यतः 25,000 से 50,000 रुपये (उम्र के अनुसार) तक हो सकती है।
क्या-क्या नहीं मिलता (Exclusions)
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कई प्लान्स में प्री-एक्सिस्टिंग क्रिटिकल बीमारियां शुरुआती कुछ सालों तक कवर नहीं होतीं या पूरी तरह निष्कासित हो सकती हैं।
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वेटिंग पीरियड के भीतर पता चली गंभीर बीमारी, सर्वाइवल पीरियड से पहले मौत, नशे, आत्म-हानि, युद्ध या हाई-रिस्क एडवेंचर के कारण हुई चोटें आम तौर पर कवर से बाहर रहती हैं।
किन लोगों को खास तौर पर लेना चाहिए
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जिनके परिवार में कैंसर, हार्ट डिजीज या किडनी फेल्योर जैसी बीमारियों का इतिहास है, उनके लिए यह कवर जोखिम कम कर सकता है।
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40 वर्ष से अधिक उम्र के लोग, हाई-स्ट्रेस जॉब करने वाले और घर के एकमात्र कमाने वाले सदस्य के लिए क्रिटिकल इलनेस कवर आय रुकने की स्थिति में फाइनेंशियल सुरक्षा कवच का काम करता है।
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कैंसर, हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारी पर कैसे होता है बीमा, ऐसे काम आएगा Critical Illness Insurance
हेल्थ इंश्योरेंस बनाम क्रिटिकल इलनेस कवर
| आधार | हेल्थ इंश्योरेंस | क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस |
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| कवरेज | अस्पताल में भर्ती, सर्जरी, OPD आदि के वास्तविक मेडिकल खर्च कवर करता है। | केवल पॉलिसी में सूचीबद्ध गंभीर बीमारियों पर लागू होता है। |
| भुगतान तरीका | बिल के अनुसार रिइम्बर्समेंट या कैशलेस सेटलमेंट, सम इंश्योर्ड तक। | डायग्नोसिस के बाद तय लंप सम राशि, बिल से लिंक नहीं। |
| सर्वाइवल पीरियड | आमतौर पर नहीं होता। | ज्यादातर प्लान में 14–30 दिन का सर्वाइवल पीरियड अनिवार्य। |
| उपयोग | मुख्यतः इलाज और हॉस्पिटल बिल चुकाने के लिए। | इलाज के साथ-साथ घर का खर्च, EMI, आय की भरपाई आदि के लिए भी। |
क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस [ Critical Illness Insurance ] को बेस हेल्थ इंश्योरेंस के साथ मिलाकर लिया जाए, तो गंभीर बीमारी की स्थिति में इलाज से लेकर घर के खर्च तक के लिए मजबूत वित्तीय ढाल तैयार की जा सकती है।








