Personal Loan – पर्सनल लोन ऐप्स का जाल आज लाखों भारतीयों के लिए धोखाधड़ी, डर और डेटा लीक का कारण बन गया है। RBI और सरकार के ताजा नियमों के बावजूद, कई अवैध डिजिटल लेंडिंग ऐप्स अब भी बाजार में सक्रिय हैं.
Personal Loan – छुपे चार्ज और धमकी की तकनीक
अवैध लोन ऐप्स आकर्षक ब्याज दर और फास्ट अप्रूवल के नाम पर कम प्रोसेसिंग और छुपे चार्ज वसूलते हैं। कई ऐप्स लोन मिलने के बाद वास्तविक रकम से 10% तक प्रोसेसिंग फीस काट लेते हैं, जबकि ब्याज पूरी अमाउंट पर वसूला जाता है। पेमेंट में देरी करने या डिफॉल्ट पर ग्राहकों को गाली-गलौज, फोटो मॉर्फिंग जैसी धमकी भरी तकनीकों से वसूली की जाती है.
Personal Loan – डेटा लीक का बड़ा खतरा
ये ऐप्स फोन की गैलरी, कांटैक्ट व मैसेजेस की एक्सेस मांगते हैं। कई उपभोक्ताओं की निजी जानकारी का दुरुपयोग भी सामने आया है, जहां फोटो मॉर्फ कर सार्वजनिक करने या रिश्तेदारों तक धमकी पहुंचाई गई.
Personal Loan – नकली बैंकिंग पार्टनर और फर्जी पहचान
अवैध ऐप्स खुद को किसी नामी बैंक/एनबीएफसी का पार्टनर बताते हैं, फिर भी वे RBI के रेगुलेटेड लेंडिंग प्लेटफार्म या अधिकृत लेंडिंग सर्विस प्रोवाइडर नहीं होते। फर्जी वेबसाइट और कागजात का सहारा लेकर ग्राहकों को भ्रमित किया जाता है.
Personal Loan – सुरक्षित रहने के उपाय
RBI द्वारा मान्यता प्राप्त और लिस्टेड ऐप से ही लोन लें। 15 जून 2025 से सभी डीएलए (Digital Lending Apps) का पब्लिक डेटाबेस अनिवार्य है.
एप्लिकेशन की सभी यूजर परमिशन ध्यान से पढ़ें, अनावश्यक एक्सेस से इनकार करें।
प्रोसेसिंग फीस व अन्य चार्जेज की पूरी जानकारी पहले ही ले लें।
गूगल प्ले स्टोर या ऐप स्टोर के रिव्यू-अंक जरूर देखें।
किसी भी स्थिति में पर्सनल डेटा या ओटीपी साझा न करें। शिकायत की स्थिति में तुरंत साइबर सेल या ऑनलाइन उपभोक्ता मंच पर रिपोर्ट करें।
Personal Loan – RBI और सरकार के सख्त कदम
RBI ने मई 2025 में नए डिजिटल लेंडिंग गाइडलाइंस लागू किए, जिसके तहत लोन राशि ग्राहक के बैंक खाते में सीधा ट्रांसफर, फुल चार्ज डिस्क्लोजर और सख्त रिकवरी नियम शामिल हैं। सरकार ने 1 करोड़ जुर्माना व 10 साल तक जेल का भी प्रावधान प्रस्तावित किया है.
Personal Loan – डेटा सुरक्षा के नए नियम
नवंबर 2025 में लागू DPDP (Digital Personal Data Protection) नियम के तहत हर ऑनलाइन संस्था को ग्राहकों के डेटा का सुरक्षित संग्रहण और उपयोग पारदर्शिता के साथ करना अनिवार्य है। किसी भी उल्लंघन पर भारी जुर्माना और जेल का नियम लागू है.

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Personal Loan – पर्सनल लोन ऐप्स का जाल आज लाखों भारतीयों के लिए धोखाधड़ी, डर और डेटा लीक का कारण बन गया है। RBI और सरकार के ताजा नियमों के बावजूद, कई अवैध डिजिटल लेंडिंग ऐप्स अब भी बाजार में सक्रिय हैं.
छुपे चार्ज और धमकी की तकनीक
अवैध लोन ऐप्स आकर्षक ब्याज दर और फास्ट अप्रूवल के नाम पर कम प्रोसेसिंग और छुपे चार्ज वसूलते हैं। कई ऐप्स लोन मिलने के बाद वास्तविक रकम से 10% तक प्रोसेसिंग फीस काट लेते हैं, जबकि ब्याज पूरी अमाउंट पर वसूला जाता है। पेमेंट में देरी करने या डिफॉल्ट पर ग्राहकों को गाली-गलौज, फोटो मॉर्फिंग जैसी धमकी भरी तकनीकों से वसूली की जाती है.
डेटा लीक का बड़ा खतरा
ये ऐप्स फोन की गैलरी, कांटैक्ट व मैसेजेस की एक्सेस मांगते हैं। कई उपभोक्ताओं की निजी जानकारी का दुरुपयोग भी सामने आया है, जहां फोटो मॉर्फ कर सार्वजनिक करने या रिश्तेदारों तक धमकी पहुंचाई गई.
नकली बैंकिंग पार्टनर और फर्जी पहचान
अवैध ऐप्स खुद को किसी नामी बैंक/एनबीएफसी का पार्टनर बताते हैं, फिर भी वे RBI के रेगुलेटेड लेंडिंग प्लेटफार्म या अधिकृत लेंडिंग सर्विस प्रोवाइडर नहीं होते। फर्जी वेबसाइट और कागजात का सहारा लेकर ग्राहकों को भ्रमित किया जाता है.
सुरक्षित रहने के उपाय
RBI द्वारा मान्यता प्राप्त और लिस्टेड ऐप से ही लोन लें। 15 जून 2025 से सभी डीएलए (Digital Lending Apps) का पब्लिक डेटाबेस अनिवार्य है.
एप्लिकेशन की सभी यूजर परमिशन ध्यान से पढ़ें, अनावश्यक एक्सेस से इनकार करें।
प्रोसेसिंग फीस व अन्य चार्जेज की पूरी जानकारी पहले ही ले लें।
गूगल प्ले स्टोर या ऐप स्टोर के रिव्यू-अंक जरूर देखें।
किसी भी स्थिति में पर्सनल डेटा या ओटीपी साझा न करें। शिकायत की स्थिति में तुरंत साइबर सेल या ऑनलाइन उपभोक्ता मंच पर रिपोर्ट करें।
RBI और सरकार के सख्त कदम
RBI ने मई 2025 में नए डिजिटल लेंडिंग गाइडलाइंस लागू किए, जिसके तहत लोन राशि ग्राहक के बैंक खाते में सीधा ट्रांसफर, फुल चार्ज डिस्क्लोजर और सख्त रिकवरी नियम शामिल हैं। सरकार ने 1 करोड़ जुर्माना व 10 साल तक जेल का भी प्रावधान प्रस्तावित किया है.
डेटा सुरक्षा के नए नियम
नवंबर 2025 में लागू DPDP (Digital Personal Data Protection) नियम के तहत हर ऑनलाइन संस्था को ग्राहकों के डेटा का सुरक्षित संग्रहण और उपयोग पारदर्शिता के साथ करना अनिवार्य है। किसी भी उल्लंघन पर भारी जुर्माना और जेल का नियम लागू है.

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Personal Loan – पर्सनल लोन ऐप्स का जाल आज लाखों भारतीयों के लिए धोखाधड़ी, डर और डेटा लीक का कारण बन गया है। RBI और सरकार के ताजा नियमों के बावजूद, कई अवैध डिजिटल लेंडिंग ऐप्स अब भी बाजार में सक्रिय हैं.
छुपे चार्ज और धमकी की तकनीक
अवैध लोन ऐप्स आकर्षक ब्याज दर और फास्ट अप्रूवल के नाम पर कम प्रोसेसिंग और छुपे चार्ज वसूलते हैं। कई ऐप्स लोन मिलने के बाद वास्तविक रकम से 10% तक प्रोसेसिंग फीस काट लेते हैं, जबकि ब्याज पूरी अमाउंट पर वसूला जाता है। पेमेंट में देरी करने या डिफॉल्ट पर ग्राहकों को गाली-गलौज, फोटो मॉर्फिंग जैसी धमकी भरी तकनीकों से वसूली की जाती है.
डेटा लीक का बड़ा खतरा
ये ऐप्स फोन की गैलरी, कांटैक्ट व मैसेजेस की एक्सेस मांगते हैं। कई उपभोक्ताओं की निजी जानकारी का दुरुपयोग भी सामने आया है, जहां फोटो मॉर्फ कर सार्वजनिक करने या रिश्तेदारों तक धमकी पहुंचाई गई.
नकली बैंकिंग पार्टनर और फर्जी पहचान
अवैध ऐप्स खुद को किसी नामी बैंक/एनबीएफसी का पार्टनर बताते हैं, फिर भी वे RBI के रेगुलेटेड लेंडिंग प्लेटफार्म या अधिकृत लेंडिंग सर्विस प्रोवाइडर नहीं होते। फर्जी वेबसाइट और कागजात का सहारा लेकर ग्राहकों को भ्रमित किया जाता है.
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RBI द्वारा मान्यता प्राप्त और लिस्टेड ऐप से ही लोन लें। 15 जून 2025 से सभी डीएलए (Digital Lending Apps) का पब्लिक डेटाबेस अनिवार्य है.
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प्रोसेसिंग फीस व अन्य चार्जेज की पूरी जानकारी पहले ही ले लें।
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किसी भी स्थिति में पर्सनल डेटा या ओटीपी साझा न करें। शिकायत की स्थिति में तुरंत साइबर सेल या ऑनलाइन उपभोक्ता मंच पर रिपोर्ट करें।
RBI और सरकार के सख्त कदम
RBI ने मई 2025 में नए डिजिटल लेंडिंग गाइडलाइंस लागू किए, जिसके तहत लोन राशि ग्राहक के बैंक खाते में सीधा ट्रांसफर, फुल चार्ज डिस्क्लोजर और सख्त रिकवरी नियम शामिल हैं। सरकार ने 1 करोड़ जुर्माना व 10 साल तक जेल का भी प्रावधान प्रस्तावित किया है.
डेटा सुरक्षा के नए नियम
नवंबर 2025 में लागू DPDP (Digital Personal Data Protection) नियम के तहत हर ऑनलाइन संस्था को ग्राहकों के डेटा का सुरक्षित संग्रहण और उपयोग पारदर्शिता के साथ करना अनिवार्य है। किसी भी उल्लंघन पर भारी जुर्माना और जेल का नियम लागू है.

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