दारूखोर दूल्हा पहुंचा ब्याह रचाने, दुल्हन ने देखते ही कर दिया मना, बारात लौटी वापस
द्वार पूजा के लिए दूल्हा पहुंच चुका था, लेकिन वह भी अपने पैर पर ठीक से खड़ा नहीं हो पा रहा था, उसकी वजह थी शराब। शराब के नशे में दूल्हा झूम रहा था उसके चार दोस्त उसे पकड़ कर खड़े थे। जब दुल्हन ने उसे देखा तो शादी के लिए तत्काल मना कर दिया।
Vijay
28 Jun 2026
•
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बारात दरवाजे पर आ चुकी थी, ढोल नगाड़े बज रहे थे, रिश्तेदार भी जमकर नाच रहे थे, हर कोई बस उस पल का इंतजार कर रहा था जब दूल्हा दुल्हन एक दूसरे के हो जाएंगे। लेकिन छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा जिले के एक गांव में बीते दिन कुछ ऐसा हुआ जो कि अब चर्चा का विषय बन गया है।
द्वार पूजा के लिए दूल्हा पहुंच चुका था, लेकिन वह भी अपने पैर पर ठीक से खड़ा नहीं हो पा रहा था, उसकी वजह थी शराब। शराब के नशे में दूल्हा झूम रहा था उसके चार दोस्त उसे पकड़ कर खड़े थे। जब दुल्हन ने उसे देखा तो शादी के लिए तत्काल मना कर दिया।
दुल्हन ने कहा कि मैं बिल्कुल भी शादी नहीं करूंगी, कुछ ही मिनट में जहां खुशियों का माहौल था कुछ ही मिनट में तनाव के माहौल में बदल गया।
दोनों परिवार एक दूसरे के सामने आ गए, दुल्हन मुस्कान अपने फैसले पर फिर भी टिकी रही, मुस्कान ने कहा कि जब दूल्हा अपने पैर पर खड़ा नहीं हो सकता तो मुझे क्या संभालेगा।
दुल्हन मुस्कान कहती है की शादी सिर्फ एक दिन का रिश्ता नहीं बल्कि पूरे जिंदगी का फैसला होता है, क्या समाज लड़कियों की बात को दबाना चाहता है? अगर दबाना चाहता है तो मैं इसका पुरजोर से विरोध करती हूं। मैं दारू खोर शराब खोर लड़के से शादी नहीं करना चाहती हूं।
मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पांडे ने भी दुल्हन मुस्कान को सम्मानित किया, साथ ही उन्होंने नशा मुक्ति अभियान का यूथ आइकॉन भी मुस्कान को बनाया है और महिला परिवार परामर्श केंद्र में मानदेय के साथ जिम्मेदारी देने की भी घोषणा की है।
मुस्कान कहती है कि उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान कोई पुरस्कार नहीं बल्कि यह बात है कि अगर उसकी कहानी सुनकर एक भी लड़की गलत रिश्ते से बच जाती है तो उसे लगेगा की उसका फैसला सही है. क्योंकि उस दिन उसने सिर्फ एक शादी नहीं रोका बल्कि उसने पूरी जिंदगी बचाने का फैसला लिया था।
पिता नहीं थे... मां ने मजदूरी कर पाला
मुस्कान की कहानी सिर्फ एक शादी टूटने की नहीं बल्कि उनके पीछे संघर्षों की कहानी है। जब वह छोटी थी तभी उनके पिता का निधन हो गया। घर की पूरी जिम्मेदारी उनकी मां के हाथों में आ गई। मां ने मजदूरी की, मेहनत की, और तीन बेटियों एवं एक बेटे की परवरिश की। मां गरीब थी लेकिन बच्चों पर इसका साया नहीं पड़ने दिया। उन्होंने बच्चों को पढ़ाया लिखाया ताकि काबिल इंसान बन सके।
शायद यही वजह रही होगी जब शादी वाले दिन मुस्कान ने दूल्हे को शराब के नशे में देखा तो उसने समाज और रिश्तेदारों की परवाह नहीं की और तुरंत ही शादी के लिए मना कर दिया। मुस्कान को अपने मां की बरसों की मेहनत याद आई, वह जानती थी कि जिस मां ने अकेले संघर्ष करके उसे इस मुकाम तक पहुंचा है।
आने वाले समय में वह नशेड़ी युवक के साथ शादी नहीं करना चाहती, खास बात यह रही कि जिस पल पूरे गांव में शादी टूटने की चर्चा हो रही थी उस वक्त मां अपनी बेटी के साथ चट्टान बनकर खड़ी रही।
पहला सवाल... शराब पीते हो कि नहीं... जवाब - नहीं
कुछ समय पहले जब मुस्कान के पास संत कुमार का रिश्ता आया तो उसने संत कुमार से पहला सवाल यही किया कि क्या तुम शराब पीते हो? हालांकि जवाब में दूल्हे ने दूल्हन से कहा था कि वह शराब नहीं पिता और शराब को हाथ नहीं लगाता, इसलिए मुस्कान शादी के लिए हां कर दी थी।
बावजूद जब शादी वाले दिन लड़का शराब के नशे में आया तो उसकी हालत खराब हो गई और उसने तत्काल ही शादी के लिए मना कर दी।
शादी वाले दिन दूल्हे को चार लोगों ने पकड़ा
23 जून को जब गांव में बारात पहुंची ढोल नगाड़ों के साथ जहां एक ओर डीजे बज रहे थे वहीं दूसरी ओर शराब के नशे में दूल्हा लड़खड़ाता हुआ नजर आ रहा था। लड़खड़ाते दूल्हे को संभालने के लिए उसके चार दोस्त भी मौजूद थे।
बावजूद लड़के को संभाल नहीं पा रहे थे, मुस्कान ने बताया कि जब वह अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो पा रहा था तो मुझे उम्र भर कैसे संभालता, इसलिए मैं उससे शादी नहीं की।