INDIA - यहां इंसान नहीं बल्कि कीड़ो पर भी होता है इनाम, लोग कमा रहे लाखो रुपये

सुबह 5 से 7 बजे के बीच स्थानीय ग्रामीण इन कीटों को पकड़ते हैं और माला बनाकर वन विभाग के संग्रहण केंद्रों पर जमा करते हैं। ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रति कीट 2 रुपए का भुगतान सीधे बैंक खातों में किया जा रहा है। अब तक 10 लाख से अधिक कीट पकड़े जा चुके हैं।

Vijay

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17 Jul 2026 1 min read
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INDIA - यहां इंसान नहीं बल्कि कीड़ो पर भी होता है इनाम, लोग कमा रहे लाखो रुपये
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डिंडोरी - डिंडोरी के साल जंगलों पर 30 साल बाद फिर से साल बोरर कीट का बड़ा हमला हुआ है। सामान्य वनमंडल के पूर्व और पश्चिम करंजिया तथा दक्षिण समनापुर वन परिक्षेत्र में वर्ष 2026-27 के दौरान 30,487 हेक्टेयर वन क्षेत्र और 1.46 लाख से अधिक साल के पेड़ इस कीट से प्रभावित पाए गए हैं।

पूरे जिले में करीब 1.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में साल के जंगल हैं, जहां लगभग 40 करोड़ साल के पेड़ हैं। इन्हें बचाने के लिए वन विभाग ने 'ऑपरेशन ट्रैप ट्री' शुरू किया है। वन विभाग के अनुसार साल बोरर का प्रकोप 30 साल के अंतराल में महामारी की तरह लौटता है।

वर्ष 1995 के बाद यह पहला बड़ा प्रकोप माना जा रहा है। राज्य वन अनुसंधान संस्थान, जबलपुर की कार्ययोजना के तहत प्रत्येक दो हेक्टेयर में एक साल के पेड़ को काटकर उसकी छाल को पीटा जाता है। इससे निकलने वाली गंध से आकर्षित होकर साल बोरर कीट उस पर इकट्ठा हो जाते हैं।


साल बोरर : पेड़ों को अंदर से खोखला कर देता है
साल बोरर (वैज्ञानिक नाम हॉपलोसिबिक्स स्पाइनिकॉर्निस ) एक लंबी मूंछों वाला भूरा बीटल है। इसकी मादा जून-जुलाई में साल के पेड़ों की छाल में अंडे देती है। अंडों से निकलने वाले लाव तने के भीतर सुरंग बनाकर लकड़ी को खाते हैं, जिससे पेड़ अंदर से खोखला होकर सूख जाता है।

डीएफओ भारती ठाकरे ने बताया कि गंभीर रूप से प्रभावित 1.46 लाख 784 पेड़ों की कटाई के लिए भारत सरकार से अनुमति मांगी गई है। मंजूरी मिलते ही कटाई शुरू होगी, जिसे पूरा करने में करीब तीन महीने लगेंगे। इससे कोट के फैलाव पर नियंत्रण कर साल के जंगलों को बचाने की कोशिश की जाएगी।


कीड़ों को पकड़ने के बाद माला बनाकर रखा जाता है


सुबह 5 से 7 बजे के बीच स्थानीय ग्रामीण इन कीटों को पकड़ते हैं और माला बनाकर वन विभाग के संग्रहण केंद्रों पर जमा करते हैं। ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रति कीट 2 रुपए का भुगतान सीधे बैंक खातों में किया जा रहा है। अब तक 10 लाख से अधिक कीट पकड़े जा चुके हैं।

 

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