Credit Card – दिल्ली, 21 नवंबर: डिजिटल पेमेंट और आसान क्रेडिट के दौर में क्रेडिट कार्ड Credit Card अब सिर्फ प्लास्टिक का टुकड़ा नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। आपात स्थिति में यही कार्ड मददगार बनता है, लेकिन इसी कार्ड के बिल में छपा एक छोटा सा विकल्प लाखों लोगों को खतरनाक कर्ज़ जाल में फंसा रहा है — यह विकल्प है “मिनिमम पेमेंट ड्यू”।
क्या होता है ‘मिनिमम पेमेंट’?
हर बिलिंग साइकल के अंत में बैंक क्रेडिट कार्ड Credit Card होल्डर को कुल बकाया राशि के साथ-साथ एक छोटी अनिवार्य रकम दिखाता है, जिसे न्यूनतम भुगतान कहा जाता है। आमतौर पर यह बकाया का करीब 5–15% तक होता है और ग्राहक को यह एहसास दिलाता है कि बस इतना भर चुका देने से अकाउंट सही रहेगा और लेट फीस से बच जाएगा। वित्तीय संस्थानों के मुताबिक, अधिकतर नए यूजर्स यहीं सबसे बड़ी गलती कर बैठते हैं।
राहत नहीं, तेज़ी से बढ़ता कर्ज़
जब ग्राहक पूरा बकाया चुकाने के बजाय सिर्फ मिनिमम पेमेंट करता है, तो बाकी बची राशि पर तुरंत ऊंचा ब्याज लगना शुरू हो जाता है। भारत में क्रेडिट कार्ड Credit Card पर सालाना ब्याज दर आम तौर पर 30% से 48% के बीच रहती है, जो दुनिया में सबसे ऊंची दरों में गिनी जाती है। मतलब, यदि कोई व्यक्ति ₹1 लाख का बकाया केवल घसीटता रहे, तो कुछ ही सालों में वह मूल रकम से कहीं ज़्यादा केवल ब्याज में चुका सकता है।
EMI नहीं, ‘कर्ज़ की उम्र’ बढ़ती है
एक्सपर्ट्स बताते हैं कि मिनिमम पेमेंट करने पर हर महीने दिया गया पैसा ज्यादातर ब्याज चुकाने में चला जाता है, जबकि मूल रकम मुश्किल से घटती है। लगातार महीनों तक ऐसा चलने पर चक्रवृद्धि ब्याज के कारण बकाया घटने के बजाय बढ़ता चला जाता है, जिसे नेगेटिव अमोर्टाइजेशन यानी कर्ज़ का उल्टा बढ़ना कहा जाता है। नतीजा यह होता है कि कार्ड होल्डर को लगता है कि वह नियमित पेमेंट कर रहा है, जबकि असल में वह सिर्फ ब्याज पर ब्याज चुका रहा होता है।
क्रेडिट स्कोर पर डबल मार
सिर्फ जेब पर ही नहीं, मिनिमम पेमेंट आपके क्रेडिट स्कोर पर भी सीधा वार करता है। बकाया कम न होने की वजह से क्रेडिट कार्ड यूटिलाइजेशन रेश्यो, यानी कुल लिमिट के मुकाबले इस्तेमाल की गई लिमिट, तेजी से बढ़ जाता है। वित्तीय एजेंसियां सलाह देती हैं कि इस रेश्यो को 30% से नीचे रखना बेहतर क्रेडिट स्कोर के लिए ज़रूरी है, वरना भविष्य में होम लोन, कार लोन या सस्ते ब्याज पर क्रेडिट कार्ड मिलना मुश्किल हो सकता है।
बचाव का रास्ता: अनुशासन और पूरी पेमेंट
फाइनेंशियल प्लानर्स साफ कहते हैं कि मिनिमम पेमेंट सिर्फ इमरजेंसी में अस्थायी सांस लेने जैसा विकल्प है, इलाज नहीं। सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि हर महीने क्रेडिट कार्ड Credit Card बिल की पूरी राशि नियत तिथि से पहले चुका दी जाए, ताकि कोई ब्याज न लगे। यदि किसी महीने पूरा अमाउंट देना कठिन हो, तो भी मिनिमम पेमेंट से काफी अधिक रकम चुकाने की कोशिश की जानी चाहिए और खर्चों को तुरंत कंट्रोल में लाना चाहिए।

संवाददाता की आवश्यकता है, सम्पर्क कीजिये – 8435113308
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क्या होता है ‘मिनिमम पेमेंट’?
हर बिलिंग साइकल के अंत में बैंक क्रेडिट कार्ड Credit Card होल्डर को कुल बकाया राशि के साथ-साथ एक छोटी अनिवार्य रकम दिखाता है, जिसे न्यूनतम भुगतान कहा जाता है। आमतौर पर यह बकाया का करीब 5–15% तक होता है और ग्राहक को यह एहसास दिलाता है कि बस इतना भर चुका देने से अकाउंट सही रहेगा और लेट फीस से बच जाएगा। वित्तीय संस्थानों के मुताबिक, अधिकतर नए यूजर्स यहीं सबसे बड़ी गलती कर बैठते हैं।
राहत नहीं, तेज़ी से बढ़ता कर्ज़
जब ग्राहक पूरा बकाया चुकाने के बजाय सिर्फ मिनिमम पेमेंट करता है, तो बाकी बची राशि पर तुरंत ऊंचा ब्याज लगना शुरू हो जाता है। भारत में क्रेडिट कार्ड Credit Card पर सालाना ब्याज दर आम तौर पर 30% से 48% के बीच रहती है, जो दुनिया में सबसे ऊंची दरों में गिनी जाती है। मतलब, यदि कोई व्यक्ति ₹1 लाख का बकाया केवल घसीटता रहे, तो कुछ ही सालों में वह मूल रकम से कहीं ज़्यादा केवल ब्याज में चुका सकता है।
EMI नहीं, ‘कर्ज़ की उम्र’ बढ़ती है
एक्सपर्ट्स बताते हैं कि मिनिमम पेमेंट करने पर हर महीने दिया गया पैसा ज्यादातर ब्याज चुकाने में चला जाता है, जबकि मूल रकम मुश्किल से घटती है। लगातार महीनों तक ऐसा चलने पर चक्रवृद्धि ब्याज के कारण बकाया घटने के बजाय बढ़ता चला जाता है, जिसे नेगेटिव अमोर्टाइजेशन यानी कर्ज़ का उल्टा बढ़ना कहा जाता है। नतीजा यह होता है कि कार्ड होल्डर को लगता है कि वह नियमित पेमेंट कर रहा है, जबकि असल में वह सिर्फ ब्याज पर ब्याज चुका रहा होता है।
क्रेडिट स्कोर पर डबल मार
सिर्फ जेब पर ही नहीं, मिनिमम पेमेंट आपके क्रेडिट स्कोर पर भी सीधा वार करता है। बकाया कम न होने की वजह से क्रेडिट कार्ड यूटिलाइजेशन रेश्यो, यानी कुल लिमिट के मुकाबले इस्तेमाल की गई लिमिट, तेजी से बढ़ जाता है। वित्तीय एजेंसियां सलाह देती हैं कि इस रेश्यो को 30% से नीचे रखना बेहतर क्रेडिट स्कोर के लिए ज़रूरी है, वरना भविष्य में होम लोन, कार लोन या सस्ते ब्याज पर क्रेडिट कार्ड मिलना मुश्किल हो सकता है।
बचाव का रास्ता: अनुशासन और पूरी पेमेंट
फाइनेंशियल प्लानर्स साफ कहते हैं कि मिनिमम पेमेंट सिर्फ इमरजेंसी में अस्थायी सांस लेने जैसा विकल्प है, इलाज नहीं। सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि हर महीने क्रेडिट कार्ड Credit Card बिल की पूरी राशि नियत तिथि से पहले चुका दी जाए, ताकि कोई ब्याज न लगे। यदि किसी महीने पूरा अमाउंट देना कठिन हो, तो भी मिनिमम पेमेंट से काफी अधिक रकम चुकाने की कोशिश की जानी चाहिए और खर्चों को तुरंत कंट्रोल में लाना चाहिए।

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