मध्यप्रदेश की राजनीति एक बार फिर बयानबाज़ी की आग में झुलस रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोमवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान भाजपा सरकार पर बेरोजगारी, नशे और कुपोषण जैसे मुद्दों को लेकर तीखा हमला बोला। इसी क्रम में उन्होंने कहा कि “देशभर में महिलाओं में शराबखोरी की प्रवृत्ति सबसे ज्यादा यदि कहीं है तो मध्यप्रदेश में”।
पटवारी का यह बयान सामने आते ही विपक्ष ने इसे महिलाओं का घोर अपमान बताकर सियासी मोर्चा खोल दिया। खासतौर पर इस टिप्पणी के हरतालिका तीज के दिन आने से मामला और संवेदनशील हो गया है।
भाजपा में तीखी प्रतिक्रिया
भाजपा नेताओं ने पटवारी को घेरते हुए इसे “मातृशक्ति पर सीधा प्रहार” बताया। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि “कांग्रेस प्रदेश की महिलाओं को शराबी बताकर उनका अपमान कर रही है। यह राजनीति नहीं बल्कि समाज की आधी आबादी के सम्मान से खिलवाड़ है।”
वहीं भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने तो और सख्त लहजा अपनाते हुए कहा कि पटवारी बार-बार महिलाओं और बहनों-बेटियों को लेकर अपमानजनक बयान देते रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस की शीर्ष नेता सोनिया गांधी से हस्तक्षेप कर पटवारी को अनुशासित करने की मांग की।
कांग्रेस का बचाव
दूसरी ओर, कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पटवारी के बयान का गलत अर्थ निकाला जा रहा है। वे केवल यह बताना चाहते थे कि भाजपा की शराब नीति ने प्रदेश को किस स्थिति में पहुंचा दिया है। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि पटवारी ने सरकार की नीतियों को कटघरे में खड़ा किया, न कि महिलाओं पर व्यक्तिगत टिप्पणी की।
चुनावी सियासत में नया मोड़
पहले ही बेरोजगारी और शराबबंदी जैसे मुद्दों पर आरोप-प्रत्यारोप झेल रही मध्यप्रदेश की राजनीति में यह विवाद नया सियासी मोर्चा खोल सकता है। भाजपा इसे “महिला सम्मान” बनाम “कांग्रेस की नासमझी” के तौर पर प्रचारित करने की तैयारी में है, जबकि कांग्रेस इसे “शराब नीति की नाकामी” के संदर्भ से जोड़कर दिखाने का प्रयास करेगी।








