सिंगरौली जिला प्रशासन सरकार की योजनाओं और आदिवासी कल्याण को लेकर कितना गंभीर है इसका जीता जागता प्रमाण सामने है। वीडियो में दिख रहे मासूम का नाम दिल कुमारी बैगा है और 11 साल की है लेकिन सरकार भले ही मंचों से लाखों दावे आदिवासी कल्याण को लेकर करती हो बावजूद सिंगरौली आते-आते इन योजनाओं की हवा गुल हो जाती है।
पूरा मामला सिंगरौली जिले के ग्राम पंचायत बरहपान का है । जहां मुडवनिया टोला में 11 वर्षीय मासूम दिल कुमारी बैगा आज भी सरकार की योजनाओं से दूर है । जन्म से ही दिल कुमारी बैगा दिव्यांग है परिजन सरपंच सचिव के पास कई दफा गए बावजूद उन्हें किसी भी तरह की कोई भी योजनाओं का लाभ नहीं मिला ।
वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि दोनों पैर से दिव्यांग दिल कुमारी बिना कपड़ों की है और सर पर लगभग 12 किलो के लकड़ी का गट्ठर लेकर सड़क से गुजर रही है यह वीडियो गांव के ही शिक्षक ने बनाया है । लिहाजा वीडियो सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने आदिवासी बच्चों को जरूरत के अनुसार सामग्री देने की बात कह रहा है। जब टीम मासूम 11 वर्षीय दिल कुमारी बैगा के घर पहुंची तो हालात कुछ और ही बयां कर रहे थे।
इनके पास ना तो पक्के घर थे और ना ही खाना बनाने के लिए उज्जवला गैस। अगर कुछ था तो सिर्फ गरीबी। मासूम दिल कुमारी ने बताया कि बचपन से ही वह नहीं चल पा रही है। वह कक्षा तीन में पढती है स्कूल भी जाती है लेकिन घसीट कर । उसकी उम्मीद है कि अगर उसे जिला प्रशासन के तरफ से एक ट्राई साइकिल मिल जाए तो स्कूल एवं आसपास इलाके में आने जाने में सहूलियत मिल सकती है।
मासूम बड़े ही उत्साह के साथ बात की उसने बताया कि बड़ी होकर वह टीचर बनना चाहती है। जरा सोचिए कि जो मासूम अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पा रही है लेकिन उसके ख्वाब बड़े है। लेकिन जिला प्रशासन है कि जो योजनाओं का लाभ हर गरीब तबके के लोगों को मिलना चाहिए जिला प्रशासन के अधिकारियों की लापरवाही के चलते योजनाओं के लाभ से वंचित है।







