सगाई के 15 दिन बाद शहीद, त‍िरंगे में ल‍िपटकर घर पहुंचे बस्तर फाइटर के जवान संजय गढ़पाले

By: शुलेखा साहू

On: Sunday, May 3, 2026 6:43 AM

सगाई के 15 दिन बाद शहीद, त‍िरंगे में ल‍िपटकर घर पहुंचे बस्तर फाइटर के जवान संजय गढ़पाले
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कांकेर जिले के जंगलों में नक्सलियों के 75 किलो विस्फोटक नष्ट करते समय भयानक धमाका। बस्तर लड़ाकू बल के 4 बहादुर जवानों की शहादत ने पूरे क्षेत्र को सदमे में डाल दिया। शहीद संजय गढ़पाले की सगाई हाल ही में हुई थी, शादी की तैयारियां जोरों पर थीं।

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित कांकेर जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना ने सुरक्षा बलों को गहरा आघात पहुंचाया। 2 मई को जंगलों में नक्सलियों द्वारा छिपाए गए विस्फोटकों को नष्ट करने के दौरान हुए जोरदार धमाके में बस्तर लड़ाकू बल के चार जांबाज जवान शहीद हो गए। इनमें ग्राम हराडुला निवासी संजय कुमार गढ़पाले की कहानी सबसे ज्यादा मार्मिक है, जिनकी सगाई महज 15 दिन पहले हुई थी और जनवरी 2027 में शादी तय थी।

घटना का पूरा विवरण: जंगल में छिपी थी मौत की बोरियां

छोटेबेठिया थाना क्षेत्र के मार्काबेडा, कोरोसकोडो और आदनार जंगलों में सर्चिंग के दौरान जवानों को नक्सल कैंप मिला। पहले डंप से कंप्यूटर उपकरण बरामद हुए, फिर पास ही पांच भारी बोरियों में 75 किलो से अधिक ‘पटाखा पाउडर’ जैसा विस्फोटक सामग्री मिली। बॉम्ब डिस्पोजल स्क्वायड (बीडीएस) की टीम इसे नष्ट करने की प्रक्रिया में थी, तभी अचानक रासायनिक प्रतिक्रिया से भयंकर विस्फोट हो गया। धमाके की तीव्रता इतनी थी कि घटनास्थल पर ही निरीक्षक सुखराम वट्टी, आरक्षक संजय गढ़पाले और आरक्षक कृष्णा कोमरा शहीद हो गए। घायल आरक्षक परमानंद कोर्राम को हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू कर ले जाते समय जान चली गई।

कांकेर एसपी निखिल राखेचा ने बताया, “यह अप्रत्याशित हादसा था। टीम अनुभवी थी, लेकिन मौसम की गर्मी और पदार्थ की अस्थिरता ने सब तबाह कर दिया।” बस्तर आईजी सुंदरराज पट्टलिंगम ने शोक व्यक्त करते हुए कहा, “ये जवान नक्सल उन्मूलन में अग्रणी थे। उनकी कुर्बानी राष्ट्र रक्षा की मिसाल बनेगी।”

शहीद संजय की अमर कहानी: वर्दी का जुनून, परिवार का सहारा

1997 में हराडुला गांव के साधारण साइकिल दुकानदार सुरेश गढ़पाले के बड़े बेटे संजय ने बचपन से सेना जॉइन करने का सपना देखा। आर्मी भर्ती में न आने पर 2022 में बस्तर फाइटर्स में शामिल हुए। परिवार ने उनकी सगाई तय की, छुट्टी लेकर वे घर लौटे थे। पिता सुरेश आज बदहवास हैं: “बेटा घर का चिराग था, सपने पूरे करने वाला। अब अंधेरा छा गया।” गांव में मातम पसरा है, लड्डू बांटने वाली खुशियां तिरंगे में लिपटे शव पर बदल गईं।

नक्सल चुनौती और सुरक्षा बलों की दृढ़ता

बस्तर क्षेत्र लंबे समय से नक्सल हिंसा का केंद्र रहा है। ऐसे ऑपरेशन नियमित होते हैं, लेकिन यह हादसा सतर्कता की याद दिलाता है। राज्य पुलिस ने शहीदों को पूर्ण सम्मान देने का ऐलान किया है। पूरे छत्तीसगढ़ में शोक की लहर दौड़ गई, और ग्रामीण क्षेत्रों में जवानों के सम्मान में प्रार्थनाएं हो रही हैं। यह घटना नक्सलवाद के खिलाफ संघर्ष की कठिनाइयों को उजागर करती है, जहां हर कदम पर जान जोखिम में होती है।

 

शुलेखा साहू

मैं एक स्वतंत्र लेखक और पत्रकार हूँ, जो समाज, राजनीति, शिक्षा और तकनीक से जुड़े मुद्दों पर गहराई से लिखती हूँ। आसान भाषा में जटिल विषयों को पाठकों तक पहुँचाना Hurdang News के मंच से मेरा प्रयास है कि पाठकों तक निष्पक्ष, स्पष्ट और प्रभावशाली जानकारी पहुँच सके।
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