The Vvaan Movie Review : आस्था और मान्यताओं का अंधविश्वास, जरुर देखनी चाहिए यह मूवीज

कुछ समय से बॉलीवुड में लोक कथाओं का काफी बोलबाला दिख रहा है। माइथो, हॉरर और कॉमेडी का फार्मूला दर्शकों को खूब लुभा रहा है। सुनी सुनाई दंत कथाओं और प्रचलित मान्यता अब फिल्म के पर्दे पर भी दिख रही हैं। पहेली से लेकर स्त्री मुंज्या और कंतारा तक फिल्मकारों ने लोक विश्वासों को अपनी कहानियों के आधार पर पर्दे पर उतारा है।
Vijay

Vijay

Local Desk | Updated: 25 Sep 2026, 08:21 PM IST | 1 min read
The Vvaan Movie Review : आस्था और मान्यताओं का अंधविश्वास, जरुर देखनी चाहिए यह मूवीज
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कुछ समय से बॉलीवुड में लोक कथाओं का काफी बोलबाला दिख रहा है। माइथो, हॉरर और कॉमेडी का फार्मूला दर्शकों को खूब लुभा रहा है। सुनी सुनाई दंत कथाओं और प्रचलित मान्यता अब फिल्म के पर्दे पर भी दिख रही हैं। पहेली से लेकर स्त्री मुंज्या और कंतारा तक फिल्मकारों ने लोक विश्वासों को अपनी कहानियों के आधार पर पर्दे पर उतारा है।

निर्देशक दीपक कुमार मिश्रा भी इसी कड़ी को जोड़ते हुए आगे बढ़ रहे हैं। वन देवी से जुड़ी दंतकथा पर आधारित द वन फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट लेकर आए हैं जो कि लोगों को खूब पसंद आ रही है। 

मूवी की कहानी द वन

मुंबई में रहने वाले पति-पत्नी ऋषि और ममता की द वन में कहानी है जो लंबे समय से माता-पिता बनने की कोशिश कर रहे हैं मगर कामयाब नहीं हो पा रहे थे। 

छठ पूजा के मौके पर दोनों अपने पैतृक गांव जाते हैं जहां ऋषि के भैया भाभी अपने बच्चों के साथ रहते हैं। उनके साथ उनका ब्लॉगर दोस्त भी गांव में पहुंचता है। गांव पहुंचकर उन्हें पता चलता है कि यहां सदियों पुरानी मान्यताओं को आज भी उतनी ही श्रद्धा और डर के साथ माना जाता है। गांव के जंगल में सूर्यास्त के बाद प्रवेश पूरी तरीके से वर्जित है और ऋषि इसे ही अंधविश्वास मानता है।

कहानी में आगे है कि जब ऋषि का परिचित दीपक शहर से बेहतर कनेक्टिविटी के लिए जंगल का कुछ हिस्सा काटकर रास्ता बनाने की कोशिश करता है तो गांव वाले इसका विरोध करते हैं। 

वहीं ऋषि खुद जंगल से लगी अपनी जमीन को बेचना चाहता है। विकास और पुरानी मान्यताओं के टकराव के बाद ऋषि सूर्यास्त के बाद जंगल में प्रवेश करता है तो उसे काफी रहस्य दिखाई देते हैं। सदियों पुरानी इन मान्यताओं के पीछे आखिर सच क्या है यह जानने के लिए आपको जरूर दावन मूवी देखनी चाहिए।

क्लाइमेक्स में देवी की स्थापना से जुड़ी बैक स्टोरी कुछ हद तक दूर की कौड़ी लगती है कहानी में सहजता से पिरोई हुई महसूस नहीं होती यही वजह है कि तमाम रहस्यों के बावजूद क्लाइमेक्स वैसा प्रभाव नहीं छोड़ पाता जिसकी उम्मीद है कुल मिलाकर कहानी बेहतरीन और दिलचस्प है इसके साथ ही अगर संगीत की बात करें तो इस फिल्म में समझो ना ठुमक ठुमक और छठी मैया के बहुत ही अच्छे गाने हैं.

मूवी का अंत यह होता है कि जब ऋषि की पत्नी छठ पूजा करने जाती है उसी दौरान नदी में डूब जाती है और उसे ऋषि बचा लेता है जिसके बाद दैत्य शक्तियों से ऋषि मुकाबला करके एक बार फिर से देवी के आस्था पर सबका मन भा जाता है और ऋषि यह सोचता है कि अब यहां पर यहां का जंगल ना नहीं उजाड़ा जाएगा इसके बाद लास्ट में दिखता है कि ऋषि को एक बेटी भी हुई है इसी के साथ कहानी खत्म हो जाती है.

 

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