सिंगरौली जिले के नगर पालिक निगम में स्वच्छता व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शहर के कई वार्डों में जगह-जगह कचरे के ढेर, गंदगी से भरी नालियां और जमा गंदा पानी सफाई व्यवस्था की जमीनी हकीकत बयां कर रही है। जिन गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर नियमित सफाई होनी चाहिए वहां कई दिनों तक कचरा पड़ा रहने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर पालिक निगम द्वारा सफाई व्यवस्था को लेकर लगातार दावे किए जाते हैं, लेकिन कई वार्डों की स्थिति इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आती है।
नियमित कचरा उठाव और नालियों की सफाई नहीं होने से गंदगी बढ़ती जा रही है। कचरे के ढेर के कारण राहगीरों और आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नगर पालिक निगम की सफाई व्यवस्था पर होने वाले खर्च को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
नागरिकों का कहना है कि सफाई के नाम पर होने वाले भुगतान और वास्तविक सफाई कार्य के बीच अंतर की जांच जरूरी है। यदि नियमित सफाई हो रही है और उसके लिए भुगतान भी किया जा रहा है तो वार्डों में जगह-जगह कचरे के ढेर क्यों दिखाई दे रहे हैं।
लोगों ने मांग की है कि नगर पालिक निगम सफाई कार्य से संबंधित कार्यादेश, सफाई कर्मचारियों की उपस्थिति, ठेकेदारों के बिल भुगतान विवरण और
अधिकारियों के निरीक्षण की जानकारी सार्वजनिक करें ताकि व्यवस्था की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
कई वार्डों में नालियों की सफाई नहीं होने से पानी की निकासी प्रभावित होने की शिकायतें हैं। जमा पानी और कचरे के कारण मच्छरों के पनपने की आशंका भी बढ़ जाती है जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
रहवासियों का कहना है कि सफाई व्यवस्था केवल मुख्य सड़कों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। प्रत्येक वार्ड की गलियों, नालियों और सार्वजनिक स्थानों पर नियमित निगरानी और समयबद्ध सफाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। लंबे समय तक जमा कचरा दुर्गंध और कीटों की समस्या पैदा कर सकता है।
वहीं जलभराव वाले स्थान मच्छरों के लिए अनुकूल वातावरण बनाते हैं ऐसे में सफाई व्यवस्था महज शहर की सुंदरता का विषय नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल कागजी रिकॉर्ड और कर्मचारियों की तैनाती पर्याप्त नहीं है। रहवासियों ने नगर परिषद के वरिष्ठ अधिकारियों से वार्डवार सफाई व्यवस्था की समीक्षा कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि जहां नियमित सफाई नहीं हो रही है, वहां जिम्मेदारी तय की जाए और लापरवाही मिलने पर संबंधित कर्मचारियों अथवा एजेंसी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही नागरिकों ने सफाई पर होने वाले खर्च और वास्तविक कार्य की जांच की मांग की है।
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