BIG BREAKING - यूपीआई पेमेंट पर लगेगा चार्ज, जानिए क्या होगा असर

कुछ चुनिंदा मर्चेंट लेनदेन पर एक संशोधित यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट पेश किया गया है जो कि 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा। एनपीसीआई ने अपने बयान में बताया है कि इस ढांचे के तहत ₹2000 से कम 95% से कम मूल्य वाले यूपीआई लेनदेन और छोटे व्यापारियों के लेनदेन को अभी तक पूरी तरीके से मुक्त रखा गया है और छोटे व्यापारी के बीच यूपीआई स्वीकार के विस्तार का समर्थन करने के लिए एक नए फंड का भी प्रस्ताव लाया गया है।
Vijay

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Local Desk | Updated: 16 Sep 2026, 04:57 PM IST | 1 min read
BIG BREAKING -  यूपीआई पेमेंट पर लगेगा चार्ज, जानिए क्या होगा असर
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अब ₹2000 से ऊपर पर्सन्स टू मर्चेंट यूपीआई पेमेंट पर 0.4% की फीस लगेगी। इसके अलावा ₹75000 या इससे अधिक के भुगतान पर ₹300 से ज्यादा फीस नहीं लगेगी। 

आपको यह बताना बेहद जरूरी है कि यह शुल्क मर्चेंट डिस्काउंट रेट है। एमडीआर वह शुल्क है जो पेमेंट सिस्टम में मर्चेंट की तरफ से बैंक और दूसरे पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को दिया जाता है। ना कि यूजर से लिया जाता है। 

इस हिसाब से यूपीआई पेमेंट पर इस तरह के चार्ज लगने पर आमतौर पर उपभोक्ताओं पर कोई भी असर नहीं पड़ेगा। एनपीसीआई ने बताया कि उपभोक्ताओं के लिए यूपीआई को अभी तक निशुल्क रखे हुए हैं। 

कुछ चुनिंदा मर्चेंट लेनदेन पर एक संशोधित यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट पेश किया गया है जो कि 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा। एनपीसीआई ने अपने बयान में बताया है कि इस ढांचे के तहत ₹2000 से कम 95% से कम मूल्य वाले यूपीआई लेनदेन और छोटे व्यापारियों के लेनदेन को अभी तक पूरी तरीके से मुक्त रखा गया है और छोटे व्यापारी के बीच यूपीआई स्वीकार के विस्तार का समर्थन करने के लिए एक नए फंड का भी प्रस्ताव लाया गया है।

 एनपीसीआई ने अपने नए बयान में अलग-अलग तरह की पेमेंट पर लगने वाले चार्ज के बारे में विस्तार से भी बताया है। हालांकि हाल ही में यूपीआई पेमेंट का इस्तेमाल करने वाले लाखों लोगों के मन में एक चिंता बैठ गई है। 

दरअसल केंद्र सरकार ने नोटिफिकेशन के बाद इसकी चर्चा सोशल मीडिया पर जमकर हो रही है। सरकार ने अधिसूचना जारी करते हुए कहा था कि बैंक ₹2000 तक के यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगा सकते। 

सरकार की ओर से जारी गजट अधिसूचना में रुपए डेबिट कार्ड ₹2000 तक के भुगतान पर किसी भी तरह का शुल्क लगाने पर रोक लगाई है। अधिसूचना के अनुसार कोई भी बैंक या सिस्टम प्रोवाइडर इन माध्यमों से भुगतान करने या प्राप्त करने वाले व्यक्ति से सीधे या प्रत्यक्ष तौर पर कोई भी राशि नहीं ले सकता। सरकार ने यह अधिसूचना पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट 2007 की धारा 10 ए के तहत जारी की है।

 

 

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