CM मोहन यादव और विजयवर्गीय आमने सामने , बोले इंदौर की उपेक्षा से आहत हूं, ढाई वर्षों से असहयोग
विजयवर्गीय ने खत में लिखा- प्रदेश के मुखिया और मेरे गृह जिले के प्रभारी मंत्री होने के नाते मुझे आपसे सहयोग की अपेक्षा थी परंतु मुझे पिछले ढाई वर्षों में असहयोग, उपेक्षा व विरोध ही मिला है। मेरे विभाग के स्थानांतरण मेरी जानकारी के बिना कर दिए जाते हैं। इंदौर के विकास की गति बढ़ाना तो दूर उसे न्यायोचित हक भी नहीं मिल पा रहा।
Vijay
नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक पत्र लिखा जिसमें उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि मुझे ढाई वर्षों से सिर्फ असहयोग, उपेक्षा और विरोध ही मिल रहा है। खत में उन्होंने मास्टर प्लान में देरी, मेट्रोपॉलिटन में नाम पीछे किए जाने, एयरपोर्ट विस्तार के लिए जमीन उपलब्ध नहीं कराने, आरजीपीवी के विभाजन में अनदेखी, पीथमपुर में सुविधाओं के अभाव से और सिंहस्थ के कार्यों में इंदौर को शामिल नहीं किए जाने पर भी आपत्ति दर्ज कराई है। पत्र पर 20 जून की तारीख दर्ज है और इसके साथ पहले लिखे गए पत्र भी लगाए गए हैं, जिनमें मास्टर प्लान और मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी इंदौर के नाम पर ही बनाने की बात कही गई थी।
5 बिंदुओं पर उपेक्षा की शिकायत ... विजयवर्गीय ने खत में लिखा- प्रदेश के मुखिया और मेरे गृह जिले के प्रभारी मंत्री होने के नाते मुझे आपसे सहयोग की अपेक्षा थी परंतु मुझे पिछले ढाई वर्षों में असहयोग, उपेक्षा व विरोध ही मिला है। मेरे विभाग के स्थानांतरण मेरी जानकारी के बिना कर दिए जाते हैं। इंदौर के विकास की गति बढ़ाना तो दूर उसे न्यायोचित हक भी नहीं मिल पा रहा।