नाग पंचमी क्यों मनाते हैं? जानिए धार्मिक महत्व 

आस्तिक मुनि के आग्रह पर राजा जनमेजय ने यज्ञ  समाप्त कर दिया जिससे तक्षक नाग और बाकी नागों के प्राण बच गए। जिस दिन आस्तिक मुनि ने यज्ञ रुकवा कर नागों के प्राणों की रक्षा की थी और उन पर कच्चा दूध व जल छिड़क कर उनकी तपन शांत की थी

Vijay

Vijay

16 Aug 2026 1 min read
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नाग पंचमी क्यों मनाते हैं? जानिए धार्मिक महत्व 
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हर साल सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का त्यौहार मनाया जाता है, इस दिन नाग देवता को लावा और फल फूल चढ़ाते हैं साथ ही दूध भी पिलाते हैं। नाग पंचमी की पूजा करने से कालसर्प जैसे दोष से छुटकारा मिल जाता है। इस साल भी नाग पंचमी पर शुभ सहयोग बना रहा है।
 
ज्योतिषों की दृष्टि से दुर्लभ और फलदाई माना जा रहा है। तो इस दिन हर किसी को नागदेव और महादेव की पूजा करनी चाहिए, जिससे सुख संपत्ति और तरक्की प्राप्त हो। आइए हम जानते हैं कि आखिर में नाग पंचमी क्यों मनाई जाती है। 
 
पौराणिक कथा के अनुसार कुरुवंश के राजा परीक्षित को शामिक के श्राप के कारण तक्षक नाग ने डस लिया था, जिसके कारण उनकी मृत्यु हो गई थी अपने पिता की मृत्यु का समाचार सुनकर उनके पुत्र राजा जनमेजय काफी क्रोधित हो गए,
 
उन्होंने संसार से समस्त सांपों का विनाश करने के लिए एक विशाल सर्प सत्र महायज्ञ का आयोजन किया, राजा जनमेजय के सर्प सत्र यज्ञ में ऋषियों द्वारा उच्चारित शक्तिशाली मंत्रों के प्रभाव से दुनिया भर के सर्प खुद खींचकर कुंड की अग्नि में गिरकर भस्म होने लगे, प्राण बचाने के लिए तक्षक नाग देवराज इंद्र के शरण में पहुंचे और उनके सिहासन से लिपट गए, जब ऋषियों ने इंद्र सहित तक्षक को यज्ञ कुंड में खींचने के लिए मंत्र पढ़ना शुरू किया तो देवलोक में हाहाकार मच गया।
 
तब देवताओं की प्रार्थना पर माता मनसा देवी के पुत्र युवा विद्वान आस्तिक मुनि राजा जनमेजय के यज्ञ स्थल पर पहुंचे और उन्होंने अपने ज्ञान और वचनों से राजा जन्मेजा को काफी प्रसन्न किया। यज्ञ की समाप्ति और नागवंश की रक्षा राजा जनमेजय ने आस्तिक मुनि को मनचाहा वरदान मांगने को कहा। तब आस्तिक मुनि के आग्रह पर तुरंत यज्ञ रोकने और नागों को अभयदान देने की माँग की।
 
आस्तिक मुनि के आग्रह पर राजा जनमेजय ने यज्ञ  समाप्त कर दिया जिससे तक्षक नाग और बाकी नागों के प्राण बच गए। जिस दिन आस्तिक मुनि ने यज्ञ रुकवा कर नागों के प्राणों की रक्षा की थी और उन पर कच्चा दूध व जल छिड़क कर उनकी तपन शांत की थी, उस दिन सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि थी तब नागों ने आशीर्वाद दिया की इस तिथि को जो भी मेरी पूजा करेगा उसे सर्प भय नहीं होगा, तभी से यह पर्व नाग पंचमी के रूप से मनाया जाता है।
 
 
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। )

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