मिडिल ईस्ट में बिगड़ते हालात ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट को हिला दिया। अमेरिका के ईरान पर हमलों के जवाब में ईरान के ड्रोन स्ट्राइक्स – जिसमें सऊदी अरब में अमेरिकी दूतावास को निशाना बनाया गया – ने कच्चे तेल की कीमतों को आसमान छू लिया। मंगलवार को WTI क्रूड 8.6% उछलकर 77.36 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 6.7% बढ़कर 81.29 डॉलर पहुंचा, जो एक साल का उच्चतम स्तर है।
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अमेरिका में इसका असर सीधा पड़ा। अमेरिकन ऑटोमोबाइल एसोसिएशन (AAA) के अनुसार, एक गैलन (3.78 लीटर) पेट्रोल की औसत कीमत रातोंरात 11 सेंट चढ़कर 3.11 डॉलर हो गई। रुपये में तब्दील करें तो लीटर पेट्रोल करीब 75.69 रुपये। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मियों के लिए स्पेशल फ्यूल प्रोडक्शन पहले से चल रहा था, लेकिन युद्ध ने तेजी को दोगुना कर दिया।
होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से ग्लोबल सप्लाई चेन खतरे में। ईरान का यह कदम 20% विश्व तेल प्रवाह रोक सकता है। कतर ने ड्रोन अटैक के बाद LNG प्रोडक्शन स्थगित कर दिया, जो एशिया को प्रभावित करेगा। तेल ट्रेडर्स अलार्म्ड – सप्ताह भर में कीमतें 15% ऊपर।
भारत पर क्या असर? चिंता की कोई बात नहीं। पेट्रोलियम मंत्रालय के सूत्रों ने पुष्टि की कि देश के पास 25 दिनों का क्रूड और रिफाइंड ऑयल स्टॉक पड़ा है। सरकार वैकल्पिक स्रोत तलाश रही – रूस, अमेरिका और अफ्रीकी देशों से आयात बढ़ाएंगे। LPG और LNG के लिए भी प्लान बी तैयार।
तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा, “हमारी स्ट्रैटेजिक रिजर्व और डाइवर्सिफाइड सोर्सिंग से संकट टल जाएगा।” लेकिन लंबे युद्ध से पेट्रोल ₹100 पार कर सकता है। ऑटो सेक्टर और ट्रांसपोर्ट पर नजर। खाड़ी संकट कब थमेगा? दुनिया बेचैन।
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