उत्तराखंड के खारसी गांव में दौलत सिंह चौहान के परिवार ने छह शादियां एक साथ कराईं। जोझोडा परंपरा में पांच दुल्हनों की बारात ने सबको हैरान कर दिया। सामूहिक विवाह से बचा खर्च, बढ़ा अपनापन।
उत्तराखंड के जौनसार-बावर क्षेत्र से एक ऐसी खबर आई है, जो आधुनिक समय में बिखरते परिवारों के बीच उम्मीद की किरण बन रही है। चकराता तहसील के खारसी गांव में बुधवार को एक ही परिवार ने छह शादियां एक साथ संपन्न कराईं। यह नजारा इतना भव्य था कि पूरे इलाके में चर्चाएं थम नहीं रही हैं। स्थानीय ठेकेदार दौलत सिंह चौहान के नेतृत्व में यह आयोजन हुआ, जहां पांच दुल्हनों ने जोझोडा रीति के तहत बारात लेकर ससुराल पहुंचीं।
जोझोडा परंपरा की अनोखी झलक
जौनसार की यह प्रथा देशभर में विख्यात है, जहां दुल्हनें खुद बाराती बनकर आती हैं। स्थानीय बोली में इन्हें ‘जोझोल्टी’ कहा जाता है। खारसी गांव में पांच बहनों और चचेरा भाई-बहनों ने एक साथ यह रिवाज निभाया। बीच में परिवार की एक बेटी का कन्यादान भी हुआ, जिसे विदा किया गया। गांववाले ढोल-नगाड़ों और नृत्यों के बीच जश्न मना रहे थे। दौलत सिंह ने बताया, “हमारा परिवार कई पीढ़ियों से एक छत के नीचे रहता है। इस आयोजन से हमने साबित किया कि एकता में ही ताकत है।”
संयुक्त परिवार की मजबूत जड़ें
दौलत सिंह चौहान का परिवार दर्जनों सदस्यों का है। जहां शहरों में भाई-भाई अलग हो जाते हैं, वहीं यहां सभी मिलकर जिम्मेदारियां निभाते हैं। ठेकेदार पेशे से दौलत सिंह ने इस समारोह की रूपरेखा तैयार की। ग्रामीणों के मुताबिक, सामूहिक विवाह से लाखों रुपये का खर्च बचा। फिजूलखर्ची पर लगाम लगी और रिश्तों में अपनापन बढ़ा। एक बुजुर्ग ने कहा, “यह सिर्फ शादी नहीं, समाज को संदेश है कि एकजुट रहो तो कोई काम मुश्किल नहीं।”
सामाजिक संदेश और भविष्य की प्रेरणा
यह घटना जौनसार की समृद्ध संस्कृति को दर्शाती है, जो प्रकृति से प्रेरित परंपराओं से भरी है। क्षेत्र में ऐसी शादियां पहली बार इतने बड़े स्तर पर हुईं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह छोटे परिवारों के दौर में बड़े संदेश के रूप में देखी जाएगी। दौलत सिंह का परिवार अब इलाके की शान बन चुका है। आने वाले समय में अन्य परिवार भी इससे प्रेरित हो सकते हैं।








