भोपाल | काले हिरण और चिंकारा के शिकार के मामले में मुंबई निवासी आरोपी सलमान की तीसरी जमानत याचिका मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने खारिज कर दी है। कोर्ट ने संरक्षित वन्य जीवों के शिकार को गंभीर अपराध मानते हुए आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया।
मप्र स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एमपीएसटीएसएफ) ने आरोपी की जमानत याचिका पर आपत्ति दर्ज करवाई थी। सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से 20 माह से अधिक समय से जेल में बंद रहने और प्रकरण के विचारण में लग रहे समय का हवाला देकर जमानत मांगी थी।
कोर्ट ने एमपीएसटीएसएफ की ओर से कोर्ट में पेश किए गए तथ्यों के आधार पर संरक्षित वन्य जीवों का क्रूरतापूर्वक शिकार किए जाने और शिकार के फोटो और वीडियो बनाए जाने को अत्यंत गंभीर अपराध मानते हुए आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उच्च न्यायालय ने विचारण न्यायालय को प्रकरण की दैनिक आधार पर सुनवाई कर शीघ्र निराकरण करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, गवाहों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने के भी निर्देश दिए हैं।
वन्य जीव अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने की दिशा में एमपीएसटीएसएफ की इंदौर इकाई ने 3 दिसंबर 2024 को आरोपी सलमान को गिरफ्तार किया था। सलमान के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर उसके कब्जे से 64.70 किलोग्राम काले हिरण का मांस, एक अवैध पिस्टल, तीन जिंदा कारतूस और शिकार में प्रयुक्त टोयोटा इनोवा वाहन जब्त किया गया था।
जांच के दौरान सलमान और उसके साथियों के मोबाइल फोन से चिंकारा और काले हिरण के शिकार से संबंधित तस्वीरें और वीडियो क्लिप भी बरामद हुए। इनमें आरोपी मृत वन्य जीवों के साथ दिखाई दिया। जांच में प्रदेश के उज्जैन, भोपाल, नर्मदापुरम, सागर और इंदौर वन वृत्तों के अंतर्गत विभिन्न जिलों एवं वनमंडलों में बड़ी संख्या में शाकाहारी वन्य जीवों के शिकार से जुड़े संगठित गिरोह की संलिप्तता सामने आई।

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