इंदौर। नए साल की शुरुआत में साइबर दुनिया में एक नया खतरा उभर आया है। यहां के नाम से बनी फर्जी एस्कॉर्ट सर्विस वेबसाइट ने युवा छात्रों को निशाना बनाया और हजारों रुपये की ठगी की घटना को अंजाम दिया। सोशल मीडिया मॉनिटरिंग और साइबर क्राइम यूनिट ने इस गिरोह का पर्दाफाश शुरू कर दिया है, जिससे शहर में सनसनी फैल गई।
यह मामला तब सामने आया जब कुछ कॉलेज छात्रों ने क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई। बताया जाता है कि आरोपी युवाओं को आकर्षित करने के लिए गूगल सर्च पर टॉप में फर्जी साइटें दिखाते थे। साइट पर आकर्षक प्रोफाइल और संपर्क नंबरों का जाल बिछाया गया था। छात्रों ने सोचा कि आसानी से सर्विस मिल जाएगी, लेकिन यह सब एक सुनियोजित फंदा साबित हुआ। एडिशनल डीसीपी क्राइम राजेश दंडोतिया ने पुष्टि की कि 10 से ज्यादा ट्रांजेक्शन में करीब 75 हजार रुपये की ठगी हुई। सभी संदिग्ध खाते ब्लॉक कर दिए गए हैं।
कैसे काम करता था यह जाल? वेबसाइट पर कॉल या मैसेज करने पर एजेंट तुरंत व्हाट्सएप पर दर्जनों युवतियों की तस्वीरें भेजता। ग्राहक को पसंद आने पर होटल का नाम पूछा जाता और वादा किया जाता कि युवती 30 मिनट में पहुंच जाएगी। दरें तय होतीं—प्रति घंटे 3 से 6 हजार रुपये। फिर क्यूआर कोड भेजा जाता और भुगतान करवाया जाता। पैसे मिलते ही बहाने बनाए जाते—ट्रैफिक जाम, लोकेशन गलत या इमरजेंसी। इसी चक्कर में बार-बार पेमेंट उगोहलाया जाता और अंत में नंबर ब्लॉक कर फरार। छात्रों ने बताया कि वे शर्म के कारण देर से शिकायत करने पहुंचे।
पुलिस जांच में पता चला कि यह गिरोह इंदौर के नाम का इस्तेमाल कर दूसरे शहरों से भी शिकार बना रहा था। साइबर सेल अब वेबसाइट को ट्रेस कर रही है और आईपी एड्रेस की तलाश में जुटी हुई है। दंडोतिया ने चेतावनी दी कि ऑनलाइन ऐसी सर्विसेज से दूर रहें, क्योंकि 90 फीसदी फर्जी होती हैं। मध्य प्रदेश में साइबर क्राइम पिछले साल 40 प्रतिशत बढ़ा है, जिसमें युवा सबसे ज्यादा शिकार हो रहे।








