SINGRAULI - धान खरीदी में हेराफेरी करने वाले समिति प्रबंधक उदयपाल सिंह को 10 वर्ष की सजा

सरई के बरका में आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित का समिति प्रबंधक उदयपाल सिंह पिता मंगल सिंह निवासी पिपरा खरीदी केंद्र बरका क्रमांक एक और पिपरी खरीदी केंद्र का प्रभारी था तथा लोक सेवक की हैसियत से कार्य कर रहा था। उसने दोनों खरीदी केंद्रों में एक करोड़ रुपये से अधिक राशि की हेराफेरी की, जिसकी जानकारी होने पर जिला प्रशासन द्वारा सहकारिता विभाग के माध्यम से पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई गई थी।

Vijay

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26 Jun 2026 0 min read
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 SINGRAULI - धान खरीदी में हेराफेरी करने वाले समिति प्रबंधक उदयपाल सिंह को 10 वर्ष की सजा
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समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी में एक करोड़ रुपये से अधिक की हेराफेरी करने वाले आरोपी समिति प्रबंधक को दस साल की कारावास की सजा न्यायालय द्वारा सुनाई गई है। पूरा मामला वर्ष 2023 में समर्थन मूल्य में हुई धान खरीदी का है।

सरई के बरका में आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित का समिति प्रबंधक उदयपाल सिंह पिता मंगल सिंह निवासी पिपरा खरीदी केंद्र बरका क्रमांक एक और पिपरी खरीदी केंद्र का प्रभारी था तथा लोक सेवक की हैसियत से कार्य कर रहा था। उसने दोनों खरीदी केंद्रों में एक करोड़ रुपये से अधिक राशि की हेराफेरी की, जिसकी जानकारी होने पर जिला प्रशासन द्वारा सहकारिता विभाग के माध्यम से पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई गई थी।

पुलिस की जांच विवेचना में सामने आया कि समिति प्रबंधक बड़े पैमाने पर सरकारी राशि का गबन किया गया है। पुलिस द्वारा प्रकरण को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां पर हुई सुनवाई के बाद अपर सत्र न्यायाधीश देवसर महेंद्र पाल सिंह की अदालत ने आरोपी समिति प्रबंधक को दोषसिद्ध करते हुए दस वर्ष के कारावास और 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

पुलिस ने पेश किए ठोस सबूत

धान खरीदी में गोलमाल कर सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाने वाले समिति प्रबंधक के खिलाफ सरई पुलिस थाने में प्रकरण दर्ज किया गया था। पुलिस ने धारा 420, 409, 120 बी आईपीसी के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना में लिया था। प्रकरण की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए पुलिस द्वारा घटनास्थल का सूक्ष्म निरीक्षण कर महत्वपूर्ण साक्ष्य संकलित किए गए, गवाहों के कथन दर्ज किए गए व वैज्ञानिक / तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर विवेचना की गई। आरोपी को शीघ्र गिरफ्तार कर उसके विरुद्ध ठोस साक्ष्यों के आधार पर अभियोग पत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। प्रकरण की विवेचना उप निरीक्षक संदीप नामदेव द्वारा की गई थी।

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